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Wednesday, April 22, 2026
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वित्त मंत्री जी, आपने टैक्स बढ़ाया नहीं तो घटाया भी नहीं, फिर आटा-चावल क्यों महंगे ?

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नई दिल्ली

साल 2023-24 का आम बजट आज से ठीक 16वें दिन पेश हो जाएगा। इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वह वह भी मिडिल क्लास से ताल्लुक रखती हैं। लिहाजा मिडिल क्लास के दवाब को समझ सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने इसे भी दोहराया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने मिडिल क्लास पर कोई नया टैक्स नहीं थोपा है। लेकिन, यह बात आंशिक सत्य ही है। उन्होंने यह सही है कि मोदी सरकार ने मिडिल क्लास पर इनकम टैक्स का बोझ नहीं बढ़ाया है। लेकिन शायद यह भूल गईं कि पेट्रोल-डीजल पर जो टैक्स और सेस या सरचार्ज में बढ़ोतरी हुई है, उससे मिडिल क्लास भी प्रभावित हुआ है। जीएसटी के रेट से क्या अमीर क्या गरीब, सब प्रभावित हैं। ऐसे में उन्हें बीते नौ साल से इनकम टैक्स में कोई छूट नहीं मिली है। तिस पर आटा-चावल-रसोई गैस का बढ़ता भाव उन्हें अलग से परेशान कर रहा है।

क्या कहा सीतारमण ने
बीते रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वह मिडिल क्लास के दबावों को समझती हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह याद दिलाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने मिडिल क्लास पर कोई भी नया टैक्स नहीं लगाया है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि पांच लाख रुपये तक की आमदनी इनकम टैक्स के दायरे से मुक्त है।

कब मिली थी इनकम टैक्स में छूट
इंडिविजुअल इनकम टैक्स में राहत की बात करें तो इसमें अंतिम बार छूट साल 2014 में मिली थी। उस समय बीजेपी के अगुवाई में प्रचंड बहुमत के बाद एनडीए की सरकार बनी थी। सरकार बनने के बाद जुलाई 2014 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार का पहला बजट पेश किया था। उसी में पर्सनल टैक्स छूट की सीमा में बदलाव किया गया था। उसके बाद इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस बात को नौ साल हो गया है। हर बजट में मिडिल क्लास इनकम टैक्स में छूट की बाट जोहते हैं, लेकिन उन्हें निराशा के अलावा कुछ नहीं मिलता है।

अभी क्या है इनकम टैक्स स्लैब
इस समय सरकार ने इनकम टैक्स में दो तरह का टैक्स रिजीम शुरू कर दिया है। एक तो ओल्ड टैक्स रिजीम और दूसरा न्यू टैक्स रिजीम। न्यू टैक्स रिजीम का ऐलान साल 2020 के बजट हुआ था। इसमें किसी तरह के निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलती है। इसमें 2.5 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है। 2.5 लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की इनकम पर 5%, 5 लाख से 7.5 लाख रुपये तक की इनकम पर 10%, 7.5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक 15%, 10 लाख रुपये से 12.5 लाख रुपये तक 20%, 12.5 लाख से 15 लाख रुपए तक 25% और 15 लाख रुपए से ज्यादा इनकम पर 30% टैक्स लगता है। हर टैक्स स्लैब पर टैक्स के अलावा 4% का एजुकेशन सेस भी वसूला जाता है।

ओल्ड टैक्स रिजीम में क्या है टैक्स स्लैब
यदि ओल्ड टैक्स रिजीम की बात करें तो इसमें ढाई लाख रुपये तक की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं लगता है। ढाई लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की आमदनी पर 5%, पांच से साढ़े सात लाख रुपये पर 10% टैक्स, साढ़े सात लाख से 10 लाख रुपये की आमदनी पर 15%, 10 लाख रुपये से 12.5 लाख की आमदनी पर 20%, 12.5 लाख से 15 लाख की आमदनी पर 25% और 15 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी पर 30% का टैक्स लगता है। हर टैक्स स्लैब पर टैक्स के अलावा 4% का सेस भी लगता है।

बाजार में महंगाई चहुंओर
इस समय सिर्फ सब्जी को छोड़ दिया जाए तो महंगाई के मारे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। यदि एक फरवरी 2019 से ही तुलना करें तो आटा, दाल, चावल, रसोई गैस आदि का दाम काफी बढ़ गया है। उस समय आटा 20 से 25 रुपये किलो मिलता था जो अब 35 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। इसी तरह औसत किस्म के चावल का दाम भी 20 रुपये से बढ़ कर 35 रुपये पर चला गया है। उस समय चना दाल 54 रुपये किलो मिलता था जो कि अब 85 रुपये किलो हो गया है। एक फरवरी 2019 को दिल्ली में रसोई गैस का एक सिलेंडर 659 रुपये में आता था जो कि इस समय 1053 रुपये में मिल रहा है। उस समय एक लीटर सरसों तेल 80 रुपये में आता था जोकि अभी 160 रुपये में मिल रहा है।

डायरेक्ट टैक्स में सरकार की खूब भर रही है झोली
डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की बात करें तो इसमें खूब तेजी आई है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के दौरान डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में करीब 26 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन भी करीब 20 फीसदी बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 17 दिसंबर 2022 तक डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की राशि 11,35,745 करोड़ रुपये रही। इससे एक साल पहले इसी अवधि में सरकार की झोली में 9,47,959 करोड़ रुपये आए थे। इसलिए मिडिल क्लास, खास कर वेतनभोगी वर्ग इस बार बजट से कुछ विशेष छूट की मांग कर रहे हैं।

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