भोपाल
राजधानी के भेल दशहरा मैदान पर चल रही श्रीराम कथा में जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि जो सीता-राम की कीर्तन करता है उसे हार्ट की समस्या नहीं होती। यह विज्ञान में परीक्षण हो चुका है। महाराज ने कहा कि बच्चों पर कभी चिढऩा नहीं चाहिए। जो बच्चों से चिढ़ता है उसे कभी भी भगवान नहीं मिलता, क्योंकि भगवान का रूप ही बालक का है। रामभद्राचार्य महाराज ने अपनी 1361वीं कथा के चतुर्थ और पंचम दिवस की कथा में बताया कि चंद्रमा की 16 कलाएं हैं जो शुक्ल पक्ष में चंद्रमा को मिलती हैं।
रामजन्म की कथा सुनाते हुए अवध नगरिया में उअली अंजोरिया बरसल सुधा चहुंओर हो ललचाइल जियरा जैसी सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। आगे की कथा में बताया कि सती जी ने राम जी का 16 अपमान किया था। वहीं पावर्ती जी को रामजी ने 16 कलाओं का बरदान दिया था। महाराज ने कहा कि भगवान राम का अनुशरण और अनुकरण करना चाहिए। विद्यार्थियों को सीख देते हुए कहा कि कोई भी बालक जो सूर्योदय के पहले उठ जाता है। माता-पिता और गुरु को प्रणाम करता है, वह कठिन से कठिन कम्पटीशन पास कर सकता है, यह मेरा आर्शीवचन है।
रामभद्राचार्य महाराज ने खुद का उदाहरण देते हुए बताया कि जन्म के दो महीने बाद मेरी दोनों ऑखें चली गई थीं। लेकिन मैने इतना परिश्रम किया कि अभिशाप को वरदान में बदल दिया। इतना अच्छा काम करो कि आपका दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाए। आज प्रधानमंत्री मोदी भी मेरी उपस्थिति के बिना शपथ नहीं लेते। महाराज ने कहा कि आंखें नहीं होने से एक बार मुझे परिवार के निजी कार्यक्रम में नहीं ले जाया गया, पर आज बड़े से बड़े कार्यक्रम का शुभारंभ मैं ही करता हूं।
महाराज ने कहा कि संसार मेंं भाग्य बनाने का काम सिर्फ गुरु करता है। गुरुदेव की कृपा माटी को सोना बना सकती है। माता-पिता का स्वार्थ होता है पर गुरु का कोई स्वार्थ नहीं होता। इस मौके पर भगवान भोलनाथ के हनुमान जी बनने की कथा सुनाते हुए बताया कि महादेव महावीर बन गए। महाराज ने बताया कि शिवजी क्यों वानर बनना चाहते हैं। रामभद्राचार्य महाराज ने आगे की कथा में हनुमान जी की उत्पत्ति और राम जी का जन्म और चारो भाइयों के नामकरण की कथा सुनाई।
वहीं पांचवे दिन की कथा में गणतंत्र दिवस का महत्व बताते हुए कहा कि 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था। महाराज ने बताया कि भारतीय संविधान के पहली प्रति के पहले पृष्ट पर पहला चित्र सीता-राम का है। महाराज ने बताया कि भारतीय संविधान भारतीय लोकतंत्र का मंदिर है। उन्होंने कहा कि भगवान रामचंद्र का चरित्र कभी भी लोकतंत्र के विरुद्ध नहीं रहा।
कथा में नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति में संत हस्तक्षेप नहीं करेंगे तो क्या गुंडे बदमाश करेंगे। संत के अनुशासन के बिना सत्ता शासन नहीं कर सकती। सत्ता शासन तब करेबी जब संत का अनुशासन होगा। इस दौरान भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को लेकर कहा कि वह जब छोटी सी थी तो उसे आतंकवाद में फंसा दिया गया। उस समय उसके गुरु भी पीछे हट गए, जिससे दीक्षा ली थी। उन्होंने कहा कि हमारी शिष्या नहीं है। उसका मैने विरोध किया और कहा कि निर्दोश किशोरी पर इतना अत्याचार नहीं होना चाहिए। उस किशोरी को बहुत अधिक दंड दिया गया, जो भारतीय संविधान के अनुकूल नहीं था।
आगे की कथा में रामभद्राचार्य महाराज ने बताया कि भोलेनाथ पार्वती को बिना बताए रामचंद्र के दर्शन करने ज्योतिषी बनकर अयोध्या चले जाते हैं। जब यह बात पार्वती को पता चलता है तो वे भी खिलौना बेचने वाली बनकर भोलेनाथ से पहले अयोध्या पहुंच जाती हैं और वहीं पर रुककर भगवान रामचंद्र के दर्शन के साथ ही उनकी सेवा करती हैं। इस मौके पर महाराज ने एक बार फिर कहा कि भोपाल भोजपाल बने और यहां का प्रत्येक नर-नारी स्वावलंबी बने। महाराज ने लोगों से तम्बाकू गुटखा छोडऩे की अपील करते हुए कहा कि इससे दांत भी काला होता है और भविष्य भी।
कथा में मुख्य यजमान शुभावती-हीरा प्रसाद यादव हैं। कथा में अमीता चापरा महिला वित्त विकास निगम अध्यक्ष, मध्य प्रदेश महिला प्राधिकारण के अध्यक्ष माखन सिंह, विधायक पीसी शर्मा, अशोक सैनी, राजेंद्र भदौरिया, श्रीकृष्ण मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव, विधायक प्रतिनिधि अशोक गुप्ता असाटी, मेला समिति के अध्यक्ष सुनील यादव, संयोजक विकास वीरानी, महामंत्री हरीश कुमार राम, उपाध्यक्ष विरेंद्र तिवारी के साथ ही मेला मेला समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।
