– भेल दशहरा मैदान पर जगदगुुरु रामभद्राचार्य महाराज 31 जनवरी तक सुनाएंगे श्रीराम कथा
भोपाल
संसार में जितने भी संबंध बनाओ वे कष्ट ही देते हैं, लेकिन जब आप भगवान से संबंध बनाते हो तो वे आपको भवसागर से पर कर देते हैं। यह बात राजधानी के भेल दशहरा मैदान पर चल रही श्रीराम कथा में जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कथा के सातवें दिन की कथा में कही। महाराज ने कहा कि अवध और मिथिला का हजारों करोड़ वर्ष से संबंध है। भोपाल के लोग मुझे बहुत प्रेम करते हैं।
रविवार को कथा सुनने पहुंची मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की धर्म पत्नी साधना सिंह से भी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि यदि साधना सिंह कह देंगी तो ऐसा नहीं है कि शिवराज सिंह मना कर दें। मैं मध्य प्रदेश सरकार से कह रहा हूं, केंद्र सरकार से भी कहूंगा कि भोपाल को भोजपाल बनाने में कोई परेशानी नहीं है। मैं आठ दिनों से अपनी कथा की यही दक्षिणा मांग रहा हूं।
आगे की कथा में महाराज ने बताया कि भोज राजा जैसा कोई राजा नहीं हुआ। इस मौके पर महाराज ने राजा विक्रमादित्या और भोज राजा की तुलना करते हुए कहा कि विक्रमादित्य जैसा किसी का शासन नहीं था और भोज राजा जैसा कोई वैदिक संरक्षक नहीं था।
रामभद्राचार्य महाराज ने बताया कि भोज राजा एक श्लोक बनाने पर एक लाख असरफियां देते थे। पर मैं मध्य प्रदेश सरकार से असरफियां नहीं, भोपाल को भोजपाल बनाना चाहता हूं। यही मेरी असरफियां और गुरु दक्षिणा है। महाराज ने कहा कि इससे हमारी गरिमा ही बढ़ेगी। महाराज ने कहा कि भोज राजा आज भले ही नहीं हैं पर भारत के कवि आज भी हैं। इस मौके पर महाराज ने कई स्वरचित श्लोक बनाकर लोगोंं को सुनाया।
आगे की कथा सुनाते हुए रामभद्राचार्य महाराज ने बताया कि चंद्रमा की नौंवी कला चंद्रिका थी, जिसका रामचंद्र ने वन लीला में उपयोग किया। चंद्रिका का स्वभाव है कि वह चंद्रमा को छोडकऱ नहीं जाती। इसी तरह रामजी के बार-बार कहने के बाद भी सीता जी रामजी को छोडकऱ नहीं जाती हैं। राम वनगमन की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा दशरथ सुमंत जी को कहते हैं कि रथ पर ले जाकर दो चार दिन घुमाफिराकर वापस ले आना। यदि वे नहीं आते हैं तो किशोरी को वापस ले आना। यहां पहली बार दशरथ ने सीता जी को किशोरी कहा।
वन गमन के दौरान राम ने सीता जी को अयोध्या जाने को कहा, तो इस पर सीता जी ने कहा कि मैं आग में चली जाउंगी पर आपके बिना अयोध्या नहीं जाऊंगी। आगे की कथा में महाराज ने भगवान राम के चित्रकूट पहुंचने का वर्णन किया। इस मौके पर बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि किशोरियां लव जेहाद के चक्कर में न फंसे, बल्कि रानी लक्ष्मी बाई और रानी कमलापति जैसा अपना व्यक्तित्व बनाएं।
कथा में मुख्य यजमान शुभावती-हीरा प्रसाद यादव हैं। रविवार को कथा सुनने साधना-शिवारज सिंह चौहान, भाजपा नेता प्रभात झा, महापौर मालती राय, डोली-आलोक शर्मा, संगीता-रामेश्वर शर्मा, कल्पना दुबे, श्रीकृष्ण मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव, मेला समिति अध्यक्ष सुनील यादव, संयोजक विकास वीरानी, महामंत्री हरीश कुमार राम, उपाध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी, के साथ ही मेला मेला समिति के पदाधिकारी मौजूद थेे।
