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चीन पर हमला बोलेगा कई हजार ड्रोन का झुंड, अमेरिका कर रहा एक सीक्रेट टेक्‍नोलॉजी पर काम

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वॉशिंगटन

अमेरिका दुनिया का वह देश है जो सेनाओं और मिलिट्री टेक्निक्‍स पर सबसे ज्‍यादा खर्च करता है। अमेरिकी मिलिट्री ने दुनिया को बताया था कि ड्रोन क्‍या है और कैसे इसकी मदद से बस कुछ ही सेकेंड्स में दुश्‍मन का सफाया हो सकता है। अब देश का रक्षा विभाग पेंटागन उस ड्रोन टेक्निक पर काम कर रहा है जिसके बाद एक साथ कई हजार ड्रोन दुश्‍मन पर एक साथ हमला बोलेंगे। पेंटागन इस तकनीक को चुपचाप यानी सीक्रेट तरीके से डेवलप कर रहा है। कुछ लोगों ने इस प्रोजेक्‍ट को लेकर चिंताएं जाहिर की हैं।

हवा, जमीन और पानी हर जगह ड्रोन
इस प्रोजेक्‍ट को अमैस प्रोजेक्‍ट के तौर पर जाना जाएगा। पेंटागन की तरफ से जो प्रोग्राम शुरू किया गया है उसके तहत एक दो नहीं बल्कि कई हजार ड्रोन का पूरा एक झुंड दुश्‍मन को घेरेगा। ये ड्रोन हवा में, जमीन पर और पानी में भी कम करेंगे। जो चिंता रक्षा विशेषज्ञों को सता रही है, उसके मुताबिक क्‍या ऐसे ड्रोन पर इंसान नजर रख पाएंगे। अमैस यानी ऑटानमस मल्‍टी डोमेन एडैप्टिव स्‍वार्म्‍स ऑफ स्‍वार्म्‍स अमेरिका की डिफेंस रिसर्च एजेंसी DARPA का कई लाख डॉलर वाला प्रोजेक्‍ट है। इस नए प्रोजेक्‍ट के बाद ही यह साफ हो गया है कि अमेरिकी मिलिट्री एक बार फिर से ड्रोन के सेक्‍टर की बादशाह बनने वाली है।

सर्विलांस और मिसाइल लॉन्‍चर तक तबाह
यूक्रेन की जंग और ताइवान की सुरक्षा में तैनात अमेरिकी ड्रोन पहले ही अपनी क्षमताओं को साबित कर चुके हैं। इस पूरे प्रोजेक्‍ट को पूरी तरह से लो प्रोफाइल रखा गया है। डी-ब्रीफ की ए‍क रिपोर्ट के मुताबिक अमैस प्रोग्राम के जरिए उस क्षमता को विकसित किया जाएगा जिसके तहत एक आदेश पर ही हजारों ड्रोन एक साथ मिलकर दुश्‍मन की एयर डिफेंस क्षमता को फेल कर सकें। ये ड्रोन इतने क्षमतावान होंगे कि किसी भी आर्टिलरी के टुकड़े, मिसाइल लॉन्‍चर्स और इंटेलीजेंस के साथ ही साथ सर्विलांस के भी हर प्‍लेटफॉर्म को तबाह कर देंगे।

सबसे छिपाकर रखा प्रोजेक्‍ट
डीब्रीफ के मुताबिक अभी इस प्रोग्राम के बारे में हर जानकारी को सबसे छिपाकर रखा गया है। मगर माना जा रहा है कि अमैस को ताइवान में चीनी हमले को फेल करने के मकसद से जल्‍द से जल्‍द पूरा करने की कोशिशें जारी हैं। डीएआरपीए के प्रवक्‍ता की तरफ से अमैस प्रोग्राम ड्रोन के झुंड को बहुत ज्‍यादा दुश्‍मनी वाले माहौल में मिलिट्री ऑपरेशंस को पूरा करने के मकसद से चलाया जा रहा है। कम कीमत वाले झुंड जिसमें कई तरह के सेंसर्स होंगे उन्‍हें फॉरवर्ड और अपने आप लॉन्‍च हो सकने वाली पोजीशन पर तैनात किया जा सकेगा। ये ड्रोन दुश्‍मन के क्षेत्र की दूरी का पता लगाकर उसका सबसे ज्‍यादा फायदा उठाने की कोशिशें करेंगे। रिपोर्ट पर यकीन करें तो यह प्रोजेक्‍ट 78 मिलियन डॉलर का है। माना जा रहा है कि इसे एक सिंगल प्राइवेट कॉन्‍ट्रैक्‍टर को सौंपा जाएगा।

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