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CBI, CEC, CVC… इनके चीफ की कैसे होती है नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदलेगा

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नई दिल्ली

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सलाह पर की जाएगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के चीफ जस्टिस शामिल होंगे। जस्टिस के एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अपने फैसले में कहा कि यह नियम तब तक कायम रहेगा जब तक कि संसद इस मुद्दे पर कानून नहीं बना देती। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकसभा में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं हैं तो सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति संबंधी समिति में शामिल किया जाएगा।

पहले क्या था तरीका और अब कैसे होगी चुनाव आयुक्त की नियुक्ति
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की ओर से नोटिफिकेशन जारी होता है। लॉ मिनिस्ट्री की ओर से नामों की सिफारिश प्रधानमंत्री को जाती है और पीएम से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति पर मुहर लगाई जाती है। आमतौर पर ब्यूरोक्रेट की नियुक्ति इस पद पर की जाती है। अधिकतम कार्यकाल छह साल होता है या 65 साल की उम्र तक इस पर चुनाव आयुक्त बने रह सकते हैं इनमें जो पहले आता है वह लागू होता है। चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग से ही हटाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सलाह पर की जाएगी। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के चीफ जस्टिस शामिल होंगे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं होने पर सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को शामिल किया जाएगा।

CBI डायरेक्टर को चुनने की आखिर क्या है प्रक्रिया
CBI निदेशक का चयन सेलेक्शन कमेटी की ओर से किया जाता है। इस कमेटी में देश के प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल होते हैं। CBI डायरेक्टर को चुनने की प्रक्रिया की शुरुआत गृह मंत्रालय से होती है और इस दौरान आईपीएस अधिकारियों की एक सूची तैयार की जाती है। लिस्ट तैयार करने के दौरान अधिकारियों के अनुभव का ध्यान रखा जाता है। लिस्ट फाइनल होने के बाद उसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेज दिया जाता है। हालांकि सीबीआई डायरेक्टर को लेकर भी कई बार सवाल खड़े हुए हैं। एक वक्त ऐसा था जब सरकार अपनी मर्जी से कभी भी सीबीआई निदेशक को हटा सकती थी। यह नियम 1997 तक था जब सरकार ऐसा कर सकती थी। 1997 में विनीत नारायण मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से कार्यकाल को कम से कम दो साल का कर दिया गया। इसके पीछे मकसद था कि सीबीआई चीफ बिना किसी दबाव के अपना कार्य कर सके।

CVC की कैसे होती है नियुक्ति
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार नियंत्रण की सर्वोच्च संस्था है। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति एक कमेटी की सिफारिश पर होती है। तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और लोकसभा में नेता विपक्ष होते हैं। इनकी ओर से जिस नाम की सिफारिश की जाती है अंतिम मुहर राष्ट्रपति की होती है। आयोग में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और दो सतर्कता आयुक्त होते हैं। सीवीसी का कार्यकाल 4 साल या 65 साल, जो भी पहले हो। एक बार कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा इस पद पर नियुक्ति के लिए वह योग्य नहीं होता।

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