10.5 C
London
Monday, April 20, 2026
Homeराष्ट्रीयभारत विभाजन में अलग हो गए थे दो परिवार, 75 साल बाद...

भारत विभाजन में अलग हो गए थे दो परिवार, 75 साल बाद मिले तो छलक गए आंसू

Published on

नई दिल्ली

साल 1947 को हुए विभाजन को याद करते ही आज भी हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। 15 अगस्त को हमें आजादी जरूर मिली लेकिन उसके साथ मिला विभाजन का दंश। बड़ी संख्या में लोग एक मुल्क से दूसरे मुल्क जाकर बस गए। कुछ तो अलग देश की शर्त पर बने पाकिस्तान चले आए तो कुछ पाकिस्तान से भारत। न जाने कितने लोग जहां थे वहीं रह गए। विभाजन के दौरान लाखों की संख्या में लोगों का खून बहा और न जाने कितने लोगों के अपने उनसे बिछड़ गए। इसी कड़ी में 75 साल पहले एक ही कुनबे के दो परिवार बिछड़ गए थे। आजादी के इतने सालों के बाद जब दोनों परिवार मिले तो जैसे हर ओर हर्ष का माहौल हो गया। करतारपुर कॉरिडोर में जब यह परिवार मिला तो खुशी के मारे एक दूसरे पर फूलों की वर्षा करने लगा। उस दौरान जिसने भी इस दृश्य को देखा उसके आंखों में आंसू आ गए। इन दो परिवारों को मिलाने की वजह बना सोशल मीडिया।

कौन हैं ये दो परिवार और कैसे हुआ यह मिलन
विभाजन का यह दंश आज से 75 साल पहले इन दो परिवारों को भी झेलना पड़ा था। साल 1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के दौरान, बड़ा भाई गुरुदेव सिंह करीम बख्श के साथ पाकिस्तान चला गए थे। वहीं छोटा भाई दया सिंह अपने मामा के साथ हरियाणा में ही रह रहा था। तो फिर यह परिवार आखिर कहां और कैसे मिला। इन दो परिवारों की मुलाकात हुई करतारपुर कॉरिडोर में। यहां जब दोनों ने एकदूसरे को देखा तो जैसे सबकुछ मिल गया। देखते ही एकदूसरे को इमोशनल हो गए। खुशी में फूलों की वर्षा करने लगे। असल में दोनो भाई हरियाणा के रहने वाले थे। दोनों विभाजन के पहले अपने दिवंगत पिता के दोस्त करीम बख्श के साथ महेंद्रगढ़ जिले के गोमला गांव में रहते थे। लेकिन 75 साल पहले दोनों अलग हो गए। बाद में सोशल मीडिया की मदद से दोनों परिवार फिर एक बार एकदूसरे से मिल गए।

बड़े भाई ने जिंदा रहते हुए लिखे थे सरकार को कई पत्र
विभाजन के दौरान साल 1947 में बड़ा भाई गुरुदेव सिंह अपने पिता के दोस्त करीम बख्श के साथ पाकिस्तान चला गया वहीं छोटा भाई दया सिंह अपने मामा के साथ हरियाणा में ही रह गया। पाकिस्तान पहुंचने के बाद बड़े भाई गुरुदेव सिंह को लाहौर से लगभग 200 किलोमीटर दूर पंजाब प्रांत के झांग जिले में बस गए। उन्हें वहां एक मुस्लिम नाम दिया गया। नाम रखा गया गुलाम मुहम्मद। हालांकि गुरुदेव सिंह इस दुनिया में नहीं हैं। उनके बेटे मोहम्मद शरीफ ने मीडिया को बताया कि सालों से उनके पिता अपने भाई दया सिंह के भारत वाले ठिकाने का पता लगाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखते थे। आपको बता दें कि करतारपुर कॉरिडोर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुरुद्वारा दरबार साहिब सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का अंतिम विश्राम स्थल है। उसे कॉरिडोर की मदद से पंजाब के गुरुदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक मंदिर से जोड़ा जाता है।

Latest articles

भोपाल तमिल संगम ने सफलतापूर्वक किया बीटीएस तमिल उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह और भव्य तमिल नव वर्ष समारोह का आयोजन 

भोपाल। मध्य भारत में तमिल समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से...

नारी शक्ति वंदन विधेयक गिरने के विरोध में भाजपा आज निकालेगी आक्रोश रैली

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने रविवार को...

राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

वार्ड 68 में 1 करोड़ 37 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन और...

भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर बैरसिया भगवामय, जयघोषों के बीच निकली भव्य विशाल बाइक रैली

राजेन्द्र शर्मा बैरसिया। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर रविवार को नगर बैरसिया भगवान...

More like this

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...

54 वोट से गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा बिल: पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298

मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल से...

गेल (इंडिया) ने उप्र और महाराष्ट्र में लगाएगी 700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का सोलर प्लांट

नई दिल्ली। गेल (इंडिया) लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में 700 मेगावाट सौर...