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Wednesday, April 29, 2026
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चीनी ड्रैगन की निकली हेकड़ी, श्रीलंका के कर्ज पर पीछे खींचने पड़े कदम, भारत-अमेरिका की बड़ी जीत

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कोलंबो

भारत के पड़ोसी देशों श्रीलंका, पाकिस्‍तान, मालदीव को कर्ज के जाल में फंसाकर जबरन अपनी बातें मानने को मजबूर कर रहे चीन को आखिरकार झुकना पड़ा है। श्रीलंका के राष्‍ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने ऐलान किया है कि चीन कर्जों का पुर्नगठन करने के लिए राजी हो गया है। दरअसल, आर्थिक रूप से डिफॉल्‍ट हो चुके श्रीलंका को 2.9 अरब डॉलर के अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पैकेज की दरकार है। इस पैकेज को हासिल करने में श्रीलंका की सबसे बड़ी बाधा चीन बना हुआ था। करीब दो महीने की ना नुकूर के बाद अब चीन अपने कर्ज का पुनर्गठन करने को राजी हो गया है।

चीन ने श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन कार्यक्रम में मदद करने का आश्वासन दिया है। राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने मंगलवार को संसद को सूचित किया कि सरकार को सोमवार रात चीनी एक्जिम बैंक से आश्वासन पत्र मिला है जिसे तुरंत आईएमएफ को भेज दिया गया है। विक्रमसिंघे, जिनके पास वित्त विभाग भी है, उन्होंने आश्वासन दिया कि एक बार आईएमएफ समझौता हो जाने के बाद, सौदा सरकार की भविष्य की योजना और रोड मैप के मसौदे के साथ संसद में पेश किया जाएगा। द्वीप राष्ट्र श्रीलंका को चीन ने सबसे ज्‍यादा कर्ज दिया है।

अमेरिका ने चीन को दी थी नसीहत
श्रीलंका के कुल लोन का 52 प्रतिशत चीन का है। इसके चलते श्रीलंका को आईएमएफ से मिलने वाले बेलआउट पैकेज बाधा बन रही थी। जनवरी में श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत जूली चुंग ने बेलआउट पाने के लिए आईएमएफ की शर्तों तक पहुंचने के श्रीलंका के प्रयास का जिक्र करते हुए चीन से स्पॉइलर नहीं बनने का आग्रह किया था। उन्होंने शिकायत की थी, ‘श्रीलंकाई लोगों की खातिर, हम निश्चित रूप से आशा करते हैं कि चीन आईएमएफ समझौते को आगे बढ़ने में रोड़ा नहीं अटकाएगा।’

जनवरी में बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिकी राजदूत ने दावा किया कि श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन के संबंध में आगे बढ़ने का बड़ा दायित्व, सबसे बड़े द्विपक्षीय ऋणदाता के रूप में चीन पर था। राजदूत चुंग ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि वे देरी नहीं करेंगे क्योंकि श्रीलंका के पास देरी करने का समय नहीं है। उन्हें इन आश्वासनों की तत्काल आवश्यकता है।’ संकटग्रस्त देश के निकटतम पड़ोसी भारत का बकाया ऋण पिछले साल जून तक लगभग 1.7 अरब डॉलर था। भारत ने भी आईएमएफ को अपना आश्‍वासन दे दिया था।

भारत ने भी ड्रैगन पर बनाया था दबाव
भारत के बाद, फरवरी में लेनदारों के पेरिस क्लब ने श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन के लिए अपने समर्थन की घोषणा की थी। यही नहीं भारत ने जी-20 देशों के वित्‍त मंत्रियों की बैठक में भी श्रीलंका और पाकिस्‍तान के कर्ज का मुद्दा उठाया था। माना जा रहा है कि भारत और अमेरिका के चौतरफा दबाव के बाद चीन को अपना अड़‍ियल रवैया छोड़ना पड़ा है। चीन के कर्ज को पुर्नगठित करने से अब श्रीलंका को आईएमएफ से कर्ज मिलना आसान हो जाएगा।

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