पटना
‘सुशील मोदी जी छपास रोग से ग्रसित लीडर हैं। जैसे छात्र नेता नहीं होता है। उसको रोज कुछ न कुछ छपना रहता है। वही हालत है सुशील मोदी की। हमको लगता है कि असत्य बोलने वालों का जो एक गिरोह है। उस गिरोह के सरगना हैं सुशील कुमार मोदी।’ उपरोक्त बयान जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने दिया है। ललन सिंह ने सुशील मोदी पर तगड़ा अटैक किया है। सुशील मोदी को लेकर बिहार के सियासी गलियारों में चर्चा चल रही है कि वे आजकल पत्रकारों के चेहरे और उनके माइक को देखकर बयान दे रहे हैं। सुशील मोदी गिने-चुने पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे हैं। इतना ही नहीं सियासी गलियारों में चर्चा है कि सुशील मोदी का यही व्यवहार बिहार बीजेपी को नुकसान पहुंचाएगा। खासकर आनंद मोहन के मामले में उनकी बयानबाजी प्रदेश नेतृत्व पर भारी पड़ेगी।
आखिर कहना क्या चाहते हैं सुशील मोदी
सुशील मोदी बिहार बीजेपी के उन नेताओं में शामिल हैं जो आनंद मोहन की रिहाई का विरोध कर रहे हैं। हालांकि सुशील मोदी के इस विरोध की वजह से क्षत्रिय समाज नाराज है। सुशील मोदी के खिलाफ पटना में बकायदा प्रदर्शन हो चुके हैं। बीजेपी के खिलाफ नारे लगाये जा चुके हैं। आनंद मोहन की रिहाई के बाद प्रभुनाथ सिंह और अनंत सिंह की रिहाई की भी मांग उठ रही है। रिहाई की मांग उठाने वाले बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी हैं। दूसरी ओर सुशील मोदी वहीं, बीजेपी के पूर्व डिप्टी सीएम आनंद मोहन की रिहाई का विरोध कर रहे हैं। उधर, पार्टी के ज्यादातर नेता इस रिहाई का समर्थन कर रहे हैं। जिनमें राजीव प्रताप रूडी, गिरिराज सिंह, नीरज बबलू के अलावा एक दर्जन ऐसे नेता हैं जो आनंद मोहन की रिहाई पर खुशी जाहिर कर रहे हैं।
सुशील मोदी के विरोध से सवर्ण वोटर नाराज
जानकारों की मानें, तो सुशील मोदी के रिहाई का विरोध करने की वजह से बीजेपी के कई नेता उहापोह की स्थिति में हैं। वे फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि आनंद मोहन पर पार्टी का स्टैंड क्या है। वहीं इस संबंध में सुशील मोदी से जब पत्रकार प्रश्न करते हैं, तो वे सभी के प्रश्नों का जवाब नहीं देते। वे पत्रकारों और गिने-चुने चैनलों के माइक को देखने के बाद ही जवाब देते हैं। पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी लगातार मीडिया से सरकार पर जेल मैनुअल से छेड़छाड़ कर पूर्व सांसद आनंद मोहन को रिहा करने का आरोप लगा रहे हैं।
महागठबंधन ने खेल दिया बड़ा गेम
एक तरह महागठबंधन आनंद मोहन की रिहाई के बहाने सवर्ण वोटरों को साधने में जुटा है। बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव आरजेडी को ए टू जेड की पार्टी बता रहे हैं। जिनमें मुख्य रूप से भूमिहार, ब्राह्मण, और राजपूत वोटर आते हैं। बताते चलें कि बोचहां उपचुनाव के दौरान भूमिहार समाज ने बीजेपी को सबक सिखाने के लिए आरजेडी के अमर पासवान को खुलकर वोट दिया था। जिसका नतीजा यह हुआ अमर पासवान भारी मतों से जीतकर विधानसभा पहुंचे। अब आरजेडी की कोशिश राजपूत वोटरों को भी साधने की है। ऐसे में नीतीश और तेजस्वी दोनों एक ही रणनीति पर काम करते नजर आ रहे हैं। ताकि साथ चुनाव लड़ने के दौरान इसका फायदा गठबंधन को मिले। ये बात अलग है कि इससे पहले आरजेडी मुस्लिम, यादव और अति पिछड़ा और दलित समाज के वोटरों पर भरोसा दिखाती थी। मगर आरजेडी के नए सिपहसालार तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी की विचारधारा को बदलते हुए अब इसे ए टू जेड की पार्टी बनाने की कोशिश में हैं। जिसका नतीजा है की पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ किया गया।
नीतीश कुमार ने भी पूरा किया मंच से किया वादा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महाराणा प्रताप जयंती के दौरान किया गया वादा पूरा कर दिया। उन्होंने मंच से इस बात का ऐलान किया था कि वह आनंद मोहन की रिहाई जल्द करवाएंगे। दरअसल, महाराणा प्रताप जयंती के दौरान क्षत्रिय समाज के लोगों ने “आनंद मोहन को रिहा करो” का नारा लगाया था। इस बात को सुनते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उसी मंच पर यह ऐलान किया था कि वह आनंद मोहन को जल्द रिहा करेंगे। उन्होंने क्षत्रिय समाज के लोगों से पटना के मिलर हाई स्कूल के मैदान पर कहा था की इसके लिए उनकी बातचीत हो रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस ऐलान के बाद आनंद मोहन की रिहाई से क्षत्रिय समाज के लोगों में एक अच्छा मैसेज गया है। वहीं, इसके उलट बीजेपी के पूर्व डिप्टी सीएम के लगातार विरोध से राजपूत और स्वर्ण समाज में नाराजगी है। बताते चलें कि इस रिहाई के बाद प्रभुनाथ सिंह और अनंत सिंह की रिहाई की मांग भी तेज हो गई है।
