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बीजेपी को कर्नाटक का दिया गम यूपी ने किया कम, समझिए 2024 चुनाव से पहले जनता का संदेश क्या है

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नई दिल्‍ली

भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कर्नाटक में बड़ा झटका लगा है। राज्‍य में कांग्रेस ने उसे करारी शिकस्‍त दी है। पंजे ने आसानी से बहुमत हासिल कर लिया है। इसने कांग्रेसियों में जान फूंक दी है। बीजेपी के लिए नतीजे वाकई निराशाजनक हैं। वह कर्नाटक के रास्‍ते दक्षिण भारत में छा जाने को बेताब थी। हालांकि, कर्नाटक के गम पर उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों ने मरहम का लेप लगाया है। यूपी निकाय चुनावों में बीजेपी ने धमाकेदार प्रदर्शन किया है। पहली बार 17 नगर निगमों में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ विजय हासिल की है। प्रदेश के अंदर 200 नगर पालिका परिषदों में से 199 में चुनाव हुए। 2017 में बीजेपी के सिर 60 नगर पालिकाओं में जीत का सेहरा सजा था। इस साल बीजेपी ने नगर पालिका परिषदों में 2017 के मुकाबले दोगुना से ज्‍यादा सीटें हासिल की हैं। इस तरह बीजेपी को कर्नाटक में मिला गम यूपी ने कुछ हद तक कम किया।

इस बार के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में रेकॉर्ड 73.19 फीसदी मतदान हुआ था। ज्यादातर एग्जिट पोल में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर का अनुमान जताया गया था। त्रिशंकु विधानसभा की संभावना का संकेत देते हुए कई विश्लेषकों ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर कांग्रेस को बढ़त दी थी। हालांकि, नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने अपने बूते ही सरकार बनाने का रास्‍ता साफ कर लिया। 224 सदस्यीय विधानसभा में उसने 114 का जादुई आंकड़ा आसानी से पार लिया।

कांग्रेस ने की है दमदार वापसी…
इसके साथ ही कर्नाटक में कांग्रेस ने 10 साल बाद अपने दम पर सत्ता में वापसी कर ली है। पार्टी ने बीजेपी के कब्जे वाले एकमात्र दक्षिणी राज्य से उसे बाहर कर दिया है। पिछले साल दिसंबर में हिमाचल प्रदेश के बाद बीजेपी की यह दूसरी पराजय है। कर्नाटक चुनाव में सत्‍ता विरोधी लहर के अलावा भ्रष्‍टाचार का मुद्दा छाया रहा। चुनाव से महीनों पहले बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह ‘40 फीसदी कमीशन’ वाली सरकार है। चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने बजरंग बली, राज्य सरकार की ओर से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मुसलमानों के लिए चार फीसदी आरक्षण को समाप्त करने और हिजाब जैसे मुद्दों को उठाया। हालांकि, ये मुद्दे वोटरों को लुभाने में नाकाम साबित हुए। लोगों ने राज्‍य में बीजेपी के खराब प्रशासन और कांग्रेस की पांच गारंटी के पक्ष में वोट किया।

सिर्फ पीएम मोदी का नाम काफी नहीं…
इससे एक और बात सामने आई। वह यह है कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर जीता नहीं जा सकता है। यह बात पहले हिमाचल प्रदेश में भी जाहिर हो चुकी है। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए लोगों को ‘रियल वर्क’ देखना है। यही वह चीज है जो लोगों को यूपी में दिखाई दी है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्‍व में प्रदेश में माफियागिरी पर लगाम लगी। निवेश को आकर्षित करने के लिए कदम उठाए गए। सरकारी स्‍कीमों का फायदा घर-घर पहुंचाने के लिए सिस्‍टम ने सारी ताकत झोंक दी। लोगों को सुरक्षा का एहसास हुआ। इसका रिजल्‍ट निकाय चुनावों में भी देखने को मिला। पहली बार 17 के 17 नगर निगमों में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ जीत का पताका फहरा दिया।

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