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22 बार कैंची से गोदा तो कहीं पत्थर से कुचल खोपड़ी तोड़ी… ये कैसी सनक?

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नई दिल्ली

प्यार अंधा होता है, ये बात हमने कई बार सुनी है। मौजूदा समय में चीजें इस तरह से बदली है कि प्यार अंधा होने के साथ ही सनकी और हैवान भी नजर आने लगा है। दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से प्यार में हैवानियत की इतनी खबरें सामने आ रही हैं कि लोगों के प्यार से भरोसा ही उठ रहा है। स्थिति यह है कि प्यार करने वाला युवक अपनी सनक में हैवान बन जा रहा है। कोई अपनी कथित प्रेमिका को 22 बार कैंची से गोद देता है। कहीं, कोई अपनी प्रेमिका को कुल्हाड़ी से चीर देताहै। कोई ब्रेकअप से इतना आहत हो जाता है कि प्रेमिका के सिर को इतना कुचलने से भी गुरेज नहीं करता। हैवानियत की हद देखिए कि कथित प्रेमी इतनी बेरहमी से कुचलता है कि प्रेमिका की खोपड़ी के कई टुकड़े हो जाते हैं। आखिर ये स्थिति क्यों बन रही है। क्यों प्यार करने वाला या एकतरफा प्यार में निराशा मिलने पर लोगों में सनक हावी हो जा रही है।

बीच बाजार 22 बार कैंची से गोद दिया
सुरेंद्र सिंह नाम का एक व्यक्ति ऐसा था कि कॉकरोज को देखते ही उछल पड़ता था। वह बेहद ही डरपोक और दब्बू किस्म का इंसान था। साल 2014 में उसने कंप्यूटर ट्रेनिंग क्लास में एडमिशन लिया। यहां उसकी मुलाकात करुणा नाम की एक महिला से होती है। ये उसको प्यार करने लगता हैं। कुछ महीनों में इसका प्यार जुनून में बदल जाता है। सुरेंद्र करुणा का फेसबुक पासवर्ड भी चुरा लेता है। वह उसके फेसबुक चैट को एक्सेस कर लेता है। इस सब चीजों से अंजान करुणा, सुरेंद्र सिंह को केवल एक अच्छा दोस्त मानती थी। यहां तक कि वह बेझिझक सुरेंद्र के घर लंच के लिए चली जाती थी। साल 2015 की शुरुआत में सिंह ने उसके लिए अपने प्यार का इजहार किया। करुणा ने उसे ठुकरा दिया। रिजेक्शन ने 34 वर्षीय सिंह को एक अंधेरी दुनिया में धकेल दिया। सुरेंद्र ने सितंबर 2016 में, करुणा पर एक क्रूर हमला किया। उसने एक व्यस्त बाजार में सार्वजनिक रूप से करुणा को 22 बार कैंची से गोद दिया।

प्यार को ठुकराया तो कुल्हाड़ी से काट डाला
सिंह की तरह कई कहानियां हैं। ताजा मामला पूर्वी दिल्ली के शाहबाद डेयरी में साक्षी की हत्या करने वाले साहिल खान का है। शहर ने शांत, सामान्य से दिखने वाली आदमी लड़कियों के खिलाफ अत्यधिक हिंसा में लिप्त हैं। ये घटनाएं प्यार में रिजेक्शन के बाद की हैं। ऐसे ही एक मामला 21 साल के प्रवीण का था। डीयू ग्रेजुएट प्रवीण नौकरी की तलाश में था। इस बीच साउथ दिल्ली के मोती बाग में अपने पड़ोस की एक 16 वर्षीय लड़की से प्यार हो गया। उसने महीनों तक उसका पीछा किया लेकिन उसे मना कर दिया गया। अब प्रदीप का व्यवहार बदलने लगा। अब वह ऐसा लड़का था जो उस लड़की से प्यार नहीं बल्कि उससे अंदर तक नफरत करता था। साल 2021 में लड़की के पिता ने प्रवीण को प्रताड़ित करने के लिए थप्पड़ मार दिया। आक्रोशित युवक ने आरके पुरम में कुल्हाड़ी खरीदी। उसने 13 जुलाई को स्कूल से घर जा रही किशोरी को काट डाला। जब लड़की अपनी जिंदगी के लिए अस्पताल जीवन के लिए संघर्ष कर रही थी, तब प्रवीण हरियाणा के पलवल में अपनी बहन के घर में छिपा था। 24 घंटे बाद जब लड़की की मौत हो गई तो पुलिस उसकी निशानदेही पर पहुंची और प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया।

अरमान ने नैना को मार दी गोली
इसी तरह 19 साल का अमानत अली भी 16 साल की नैना पर अपना दिल हार बैठा था। अमानत ने महीनों तक नैना का पीछा किया। उसने सोशल मीडिया पर अरमान नाम से अकाउंट बनाया। अमानत अली एक शर्मीला लड़का था, वहीं अरमान तेजतर्रार था। उसे इंस्टाग्राम पर मोटरसाइकिल की सवारी और पार्टी करना पसंद करने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाई देता था। वास्तव में, अली ज्यादातर अपने आप में ही रहता था। नैना ने रिश्ते के लिए उनके बार-बार के प्रेम प्रस्ताव को नकार कर दिया। पिछले साल 25 अगस्त को अली ने बाइक पर ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा नैना स्कूल जाते समय पीछा किया। इसके बाद उसे करीब से गोली मार दी। इधर नैना आईसीयू में जीवन और मौत की जंग लड़ रही थी। उधर अली अपने रिश्तेदारों के पास छुपने के लिए मुजफ्फरनगर भाग गया। हालांकि पुलिस ने कुछ दिन बाद उसे पकड़ लिया।

स्टॉकिंग को कभी भी नजरअंदाज ना करें
इन घटनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रत्येक क्रूर कृत्य के खतरे की चेतावनी छुपी थी। इसमें सामने आया कि किसी ने भी इस तरह की क्रूर हिंसा का सहारा लेने वाले ‘डरपोक और शर्मीले लड़कों’ का अनुमान नहीं लगाया था। मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि अंतर्मुखी, अशांत बचपन वाले लोग अक्सर रिजेक्शन को झेल नहीं पाते हैं। इसकी वजह उनका समाज में घुलने मिलने की कमी है। प्यार में ठुकराए हुए लोगों की पर्सनेल्टी में नेगेटिव चेंज आ जाता है। इस तरह के मामलों की जांच करने वाले चेतावनी देते हैं कि स्टॉकिंग को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मामले से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पीड़ितों और उनके परिवारों ने शुरुआत में ही पुलिस से मदद मांगी होती तो शायद उनकी जान नहीं जाती। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि आम तौर पर, माता-पिता अपनी बेटियों के ‘सम्मान’ और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा के नुकसान के कारण पुलिस से संपर्क नहीं करना चाहते हैं। हालांकि, हम समय पर ऐक्शन लें तो कीमती जान बचाई जा सकती है।

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