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बालासोर जिला से पहले भी हो चुके हैं 7 सबसे बड़े रेल हादसे, पिछले 30 सालों का रिकॉर्ड देख कांप जाएगी रूह

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भारतीय रेलवे को दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क माना जाता है। बुनियादी सुविधाओं के खराब होने के कारण यहां पिछले कई सालों से खूब रेल हादसे हुए हैं। बता दें कि भारतीय रेल में हर दिन सवा करोड़ से ज्‍यादा लोग सफर करते हैं। कई अपनी मंजिल तक पहुंच जाते हैं, तो कुछ का सफर अधूरा रह जाता है। इन सबकी वजह है रेल हादसा।

भारत में रेल दुर्घटना का इतिहास काफी पुराना रहा है। देश में अब तक कई रेल हादसे हो चुके हैं, जिसकी शुरुआत 6 जून 1981 से हुई। आज 42 साल बाद हाल ही में ओडिशा के बालासोर जिला में हुए कोरोमंडल एक्सप्रेस, हावड़ा-यशवंतपुर एक्‍सप्रेस और मालगाड़ी के बीच हुई रेल दुर्घटना ने सबका दिल दहला दिया है और देश के सबसे बडे रेल हादसों की याद दिला दी है। आइए हम आपको पिछले कुछ सालों में हुए बड़े रेल हादसों के बारे में बताते हैं।

​बागमती रेल हादसा- ​
42 साल पहले का वो खौफनाक मंजर ही था, जब बिहार में देश का सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था। यात्रियों से खचाखच भरी ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी। इसमें 238 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। कहते हैं कि हादसा इतना भयानक था कि 5 किमी तक इसकी आवाज सुनाई दी थी।

​फिरोजाबाद रेल हादसा- ​
20 अगस्‍त 1995 में हुए फिरोजाबाद रेल हादसे में 350 लोगों की मौत हुई थी और 400 लोग घायल हुए थे। आधी रात को नई दिल्‍ली जा रही कालिंदी एक्‍सप्रेस ट्रैक पर खड़ी नीलगाय से जाकर टकराकर रुक गई थी। इसी बीच फिरोजाबाद के उस ट्रेक पर कालिंदी एक्‍सप्रेस 100 किमी की रफ्तार से निकली और कालिंदी एक्सप्रेस को पीछे से जोर से टक्‍क्‍र दी। रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन लगभग 3 दिन तक चला। ट्रेक के चारों तरफ लोगों के शरीर के टुकड़ों को इकट्ठा कर जला दिया गया।

​खन्‍ना रेल दुर्घटना- ​
बात 26 नवंबर 1998 की है, जब फ्रंटियर गोल्‍डन टेंपल मेल जम्‍मूतवी सियालदाह से टकरा गई। यह हादसा पंजाब के खन्‍ना में हुआ। इस दुर्घटना में फ्रंटियर गोल्‍डन टेंपल मेल के करीब 6 डिब्‍बे ट्रेक से उतर गए थे। हादसा काफी भयंकर था, जिसमें 212 लोगों की मौत हो गई थी।

​गैसाल रेल हादसा- ​
3 अगस्‍त 1998 को भी एक हादसा हुआ, जिसमें 290 यात्रियों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबर आई थी। इस दिन पश्चिम बंगाल के गैसाल में दिल्ली जा रही ब्रह्मपुत्र मेल और अवध-असम एक्‍सप्रेस आपस में टकरा गई। हादसे के वक्‍त ट्रेन में ढाई हजार यात्री मौजूद थे।

​राजधानी एक्‍सप्रेस दुर्घटना- ​
9 सितंबर 2002 में कोलकाता-नई दिल्‍ली राजधानी एक्‍सप्रेस बिहार में पटरी से उतर गई थी। रात के लगभग 10.40 बजे गया और डेहरी ऑन -सोन स्‍टेशनों के बीच रफीगंज स्‍टेशन के पास यह हादसा हुआ। इसमें 140 लोगों की मौत हो गई थी।

​ज्ञानेश्‍वरी एक्सप्रेस दुर्घटना- ​
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले में रात 1:30 बजे ज्ञानेश्‍वरी एक्सप्रेस नक्‍सली हमले का शिकार हुई। रेल ट्रेक पर विस्‍फोट के बाद मुंबई-हावड़ा-कुर्ला-लोकमान्य तिलक ज्ञानेश्वरी सुपर डिलक्स एक्सप्रेस पटरी से उतर गई और मालगाड़ी से जा भिड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में 170 लोग मारे गए थे।

​सैंथिया रेल हादसा- ​
19 जुलाई 2010 को पश्चिम बंगाल के बीरभूमि जिले में सैंथिया में उत्‍तर बंग एक्‍सप्रेस प्‍लेटफॉर्म से बाहर निकलते समय वनांचल एक्सप्रेस से टकरा गई। इसमें 62 लोग मारे गए और 150 से ज्‍यादा लोग घायल हो गए थे।

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