नई दिल्ली,
साल 2022 के खरीफ सीजन के दौरान कमजोर मॉनसून के चलते किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. मॉनसून में देरी के चलते किसानों को धान की बुवाई भी लेट करने पर मजबूर होना पड़ा. इसका असर फसल की पैदावार पर भी हुआ. अब इसी स्थिति का खतरा इस साल भी मंडरा रहा है. प्राइवेट फोरकास्टिंग एजेंसी स्काईमेट वेदर (Skymet) ने देश में अगले चार हफ्तों में कमजोर मॉनसून की भविष्यवाणी की है. 6 जुलाई तक कमजोर मॉनसून का पूर्वानूमान है. बारिश नहीं होने की स्थिति में किसानों की बुवाई लेट होगी. इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा.
उत्तर भारत में 1 जूलाई तक पहुंचेगा मॉनसून
इस बार केरल तट पर ही मॉनसून ने देरी से 8 जुलाई को दस्तक दिया. स्वाभाविक सी बात है अन्य राज्यों में भी मॉनसून देरी से पहुंचेगा. मॉनसून विभाग ने 1 जुलाई तक उत्तर भारत में मॉनसून के असर की संभावनाएं जताई है. ऐसे में जब खेत तैयार करने और बुवाई का वक्त है तो बारिश नहीं होने के चलते किसानों की खेती प्रभावित होगी.
साल 2022 में यूपी के 62 जिले सूखाग्रस्त हुए थे घोषित
बता दें कि साल 2022 में कमजोर मॉनसून के चलते किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा था. उत्तर प्रदेश के 62 जिलों को सूखाग्रस्त भी घोषित कर दिया गया था. कमजोर मॉनसून के चलते किसानों को धान की जगह रागी और कम पानी वाले फसलों की खेती करने की अपील की थी. बिहार और झारखंड के भी सभी जिलों को सूखे की मार झेलनी पड़ी थी. दोनों राज्य सरकारों ने सूखे से प्रभावित किसानों की आर्थिक मदद भी की थी.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों में मॉनसून का दस्तक
मॉनसून दक्षिण भारत के राज्यों से होते हुए पश्चिम बंगाल में दस्तक दे चुका है. बंगाल के उत्तरी हिस्सों में बारिश भी दर्ज की गई है. हालांकि, बंगाल के दक्षिण हिस्सों में मॉनसून का असर दिखने में कुछ दिन और लग सकता है. हालांकि, कमजोर मॉनसून के चेतावनी के चलते लगातार दूसरे साल किसानों के ऊपर सूखे का खतरा मंडरा रहा है.
