21.2 C
London
Monday, April 27, 2026
Homeराष्ट्रीयलोहे के पुल की अहसानमंद रहेगी दिल्ली, अब 'आराम' करेगा 150 साल...

लोहे के पुल की अहसानमंद रहेगी दिल्ली, अब ‘आराम’ करेगा 150 साल पुराना यह पुल

Published on

नई दिल्ली

​यमुना ब्रिज या लोहे का पुल। दिल्ली इससे प्यार करती है। न जाने दिल्ली की कितनी पीढ़ियों ने इसके आर-पार रेल या फिर नीचे बस, कार, स्कूटर, टांगों या फिर किसी अन्य वाहन पर सफर किया है। रेलवे की भाषा में इसका नंबर 249 है। बेशक, इसे दिल्ली के सबसे बुलंद लैंडमार्ड में से एक माना जा सकता है। अब इसके ठीक साथ ही रेलवे ने नए पुल का निर्माण कर दिया है। उम्मीद है कि नया पुल कुछ समय के बाद ट्रैफिक के लिए खुल जाएगा। पुराने पुल ने दिल्ली को कई बार बनते-बदलते हुए देखा। नए पुल के बनने के बाद कह सकते हैं यह ‘आराम’ करेगा। इसने 150 सालों से भी अधिक समय तक दिल्ली की सेवा की। दिल्ली रहेगी इसकी एहसानमंद। जब रेल इसके ऊपर से गुजरती है, तब जिस तरह की आवाजें आती हैं, वो कहीं न कहीं डराती हैं। जब रेल पुल के ऊपर से गुजर रही होती है तब कई मुसाफिर इसके अंदर सिक्के गिरा रहे होते हैं।

​कब बनना शुरू हुआ था लोहे का पुल
​लोहे के पुल का निर्माण 1863 में चालू हुआ था और यह 1866 में बनकर तैयार हो गया। ये जब बनने लगा उससे पांच साल पहले ही मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को रंगून कैद में भेज दिया गया था। 850 मीटर लंबे पुल को हैरिटेज पुल का दर्जा प्राप्त है। ये शुरू में सिंगल लाइन था। इसे 1933 में डबल लाइन किया गया था। तो आप कह सकते हैं कि इसे डबल लाइन का हुए भी 80 साल हो गए हैं। यमुना नदी पर बना लोहे के पुल 12 विशाल स्तंभों पर खड़ा रहा। जब देश के अलग-अलग हिस्सों से पुलों के गिरने की खबरें आना अब सामान्य बात हो गई हो तब हमारा लोहे का पुल चट्टान की तरह खड़ा रहा। इसके ऊपर से गुजरते हुए उन तमाम अनाम इंजीनियरों और श्रमिकों को दिल से धन्यवाद करने का मन करता है जिन्होंने इस खड़ा था।

​​यमुना ब्रिज के बनने से पहले का यमुना पार
​यमुना ब्रिज के बनने से पहले कोलकाता और लाहौर से यहां आने वाले नदी मार्ग से पहुंचते थे। जरा कल्पना करें उस दौर की दिल्ली की। तब तक यमुनापार में शाहदरा और तमाम गांव आबाद थे। पर उस समय यमुनापार की आबादी कुछ हजारों में ही रही होगी। इसके साथ ही, ये भी ध्यान रखा जाए कि ब्रिटेन में ट्यूब रेल सेवा 1860 के आसपास चालू हो गई थी। हमारी दिल्ली में मेट्रो रेल 2002 के आखिर में आई थी। यमुना नदी के एक ओर पूर्वी दिल्ली और दूसरी ओर बसी पुरानी दिल्ली को आपस में जोड़ने के लिए रेलवे के लिए कलकता की ब्रेलवाइथ एंड कंपनी इंडिया लिमिटेड ने इसका निर्माण किया था। इस पुल में लगी लोहे के गार्डरों को प्री-कास्ट कर इंग्लैंड से लाकर यहां जोड़कर पुल बनाया गया था। इसके निर्माण में लगभग सवा सोलह लाख रुपये की कुल लागत आई थी। अब इतने पैसे में दिल्ली में एक कमरे का घर या मिलना मुश्किल है।

Latest articles

महिला आरक्षण के समर्थन में कांग्रेस का पैदल मार्च: भोपाल में निकाली रैली, जीतू पटवारी बोले- विधानसभा में करेंगे महिला आरक्षण की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासी संग्राम तेज...

भोपाल के अन्ना नगर गार्बेज स्टेशन में भीषण आग: 25 टन कचरा और रिसाइक्लिंग सामग्री खाक

भोपाल। राजधानी के अन्ना नगर स्थित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन में शनिवार देर रात लगी...

ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर भोपाल पुलिस सख्त: अप्रैल माह में वसूला 11 लाख से अधिक का जुर्माना

भोपाल। राजधानी की सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के...

भोपाल में भीषण गर्मी का कहर: नर्सरी से 8वीं तक के स्कूलों में 30 अप्रैल तक छुट्टी

भोपाल। राजधानी भोपाल में सूर्यदेव के तल्ख तेवरों और लगातार बढ़ रहे तापमान ने...

More like this

बंगाल चुनाव में ‘बंपर वोटिंग’, आज़ादी के बाद बना नया रिकॉर्ड, पहले चरण में 93% मतदान

तमिलनाडु के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा 85% वोटिंग कोलकाता। पश्चिम बंगाल और...

पहलगाम हमले की बरसी: PM मोदी ने जान गंवाने वाले निर्दोषों को याद किया, कहा- आतंक के आगे भारत कभी नहीं झुकेगा

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक...

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...