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अमेरिका-यूरोप में खलबली भारत में बम-बम, देश के बैंकों को लेकर आई बड़ी खुशखबरी

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नई दिल्ली

बीते दिनों अमेरिका का बैंकिंग संकट हम सभी ने देखा। कई बड़े बैंक डूब गए। यूरोप में भी बैंकों का बुरा हाल है। इसके विपरीत भारत में बैंकों की एक तरह से पार्टी चल रही है। पिछले 10 वर्षों में भारतीय बैंकों ने कमाल कर दिया है। कभी भारतीय बैंक बुरे कर्ज यानी एनपीए के बोझ तले दबे हुए थे। आज ये बैंक बंपर मुनाफा कमा रहे हैं। आरबीआई ने बुधवार को बताया कि भारतीय बैंकों का ग्रॉस एनपीए (NPA) 10 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। यह मार्च तिमाही में गिरकर 3.9 फीसदी रहा। इन 10 वर्षों में लगातार बैंको के बुरे कर्ज में गिरावट आई है। आरबीआई ने अपनी द्विवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) में बताया कि शुद्ध एनपीए रेश्यो गिरकर 1.0 फीसदी पर आ गया है।

मजबूत स्थिति में भारतीय बैंक
आरबीआई ने बुधवार को अपनी द्विवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट जारी की है। सेंट्रल बैंक ने कहा कि आधारभूत परिदृश्य में ग्रॉस एनपीए में 3.6 फीसदी तक सुधार होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘क्रेडिट रिस्क के लिए मैक्रो स्ट्रेस टैस्ट से पता चलता है कि SCBs गंभीर तनाव परिदृश्यों में भी मिनिमम कैपिटल रिक्वायरमेंट्स का अनुपालन करने में सक्षम होंगे।’ रिपोर्ट में कहा गया कि स्ट्रैस टेस्ट से पता चलता है कि एससीबी अच्छी तरह से कैपिटलाइज्ड हैं और किसी भी अतिरिक्त पूंजी निवेश के अभाव में भी एक साल के व्यापक आर्थिक झटके को सह सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि स्ट्रेस टेस्ट रिजल्ट के अनुसार सभी SCBs का ग्रॉस एनपीए रेश्यो मार्च 2024 तक और सुधरकर 3.6 फीसदी हो जाएगा।

स्टेबल है भारतीय फाइनेंशियल सेक्टर
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा कि बैंकिंग और कॉरपोरेट सेक्टर की बैलेंस शीट को मजबूत किया गया है। जिससे विकास के लिए ‘दोहरी बैलेंस शीट लाभ’ मिला है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारतीय फाइनेंशियल सेक्टर स्टेबल है और लचीला है।

14.6% के भयानक स्तर पर पहुंच गया था सरकारी बैकों का एनपीए
साल 2015 में सरकारी बैंकों में एसेट क्वालिटी रिव्यू शुरू हुआ था। उस समय एक के बाद एक बेड लोन सामने आए थे। मार्च 2018 में पता लगा था कि सरकारी बैंकों का वास्तविक एनपीए 14.6 फीसदी के भयानक स्तर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2017-18 में सरकारी बैंकों को 85,390 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। साल 2015-16 से 2019-20 के बीच सरकारी बैंकों को घाटा हुआ। यह कुल 2.07 लाख करोड़ रुपये का था। एक समय 21 सरकारी बैंकों में से 11 आरबीआई के पीसीए फ्रेमवर्क के अंदर आ गए थे। यह संकट अब पूरी तरह खत्म हो गया है। अकाउंटिंग प्रैक्टिस को सही किया गया है। कुछ बैंकों को रिकैपिटलाइज्ड किया गए। कुछ को मर्ज किया गया। इसके परिणामस्वरूप सरकारी बैंकों का ग्रॉस एनपीए गिरकर 5 फीसदी के करीब रह गया है। वित्त वर्ष 2021-22 में सरकारी बैंकों का कुल मुनाफा 66,543 करोड़ रुपये रहा। साथ ही सभी बैंकों ने मुनाफा बनाया।

इस साल एसबीआई को बंपर मुनाफा
वित्त वर्ष 2022-23 में बैंकों की स्थिति और अच्छी हुई। साल 2017-18 के 85,390 करोड़ के घाटे से सरकारी बैंक 2022-23 में 1.04 लाख करोड़ रुपये के प्रॉफिट में आ गए हैं। एसबीआई टॉप पर है। इसके मुनाफे में 59 फीसदी सालाना का उछाल आया है। फिच ग्रुप से जुड़ी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के अनुसार पिछले 10 वर्षों में बैंकों की सबसे बेहतर एसेट क्वालिटी देखने को मिली है।

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