8.4 C
London
Friday, May 15, 2026
Homeराजनीतिचिराग, अजीत, शिंदे... 2024 से पहले NDA में इंद्रधनुष के रंग क्यों...

चिराग, अजीत, शिंदे… 2024 से पहले NDA में इंद्रधनुष के रंग क्यों भरना चाहती है भाजपा

Published on

नई दिल्ली

2024 का लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं। भाजपा संगठन में कई बड़े बदलाव कर रही है। कुछ घंटे पहले ही भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी की कुछ राज्य इकाइयों के पूर्व प्रमुखों समेत 10 नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य नियुक्त किया। इसी महीने की 18 तारीख को एनडीए की बैठक बुलाई गई है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अजीत पवार के एनसीपी गुट और शिवसेना का शिंदे ग्रुप इस बैठक में हिस्सा ले सकता है। इस बात के भी पूरे संकेत मिल रहे हैं कि चिराग पासवान की वापसी के लिए भाजपा में मंथन चल रहा है। इस दिशा में संतोषजनक प्रगति भी हुई है।

इतना ही नहीं, भाजपा लीडरशिप पहले ही सैद्धांतिक रूप से जेडीएस, ओम प्रकाश राजभर की ओबीसी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को साथ जोड़ने का फैसला कर चुकी है। मछुआरों, किसानों और नाविकों की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी भी इस लिस्ट में आ गए हैं।

अजीत पवार एनडीए में आते हैं तो प्रफुल्ल पटेल को ‘गिफ्ट’ भी मौका मिल सकता है। एनसीपी में फूट से पहले सुप्रिया सुले के साथ प्रफुल्ल पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट के तौर पर काम कर रहे थे। 2024 के चुनाव के मद्देनजर भाजपा की नजर महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों पर है। ऐसे में वह सत्तारूढ़ शिवसेना समूह को भी एनडीए में जोड़ने को तैयार है।

चिराग की ‘घर वापसी’ के मायने
पार्टी ने चिराग पासवान की भी ‘घर वापसी’ कराने का निर्णय लिया है। हो सकता है कि इससे उनके चाचा पशुपति कुमार पारस थोड़े नाराज जरूर हो जाएं। वह फिलहाल मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री का पद संभाल रहे हैं। बिहार की कुल आबादी में 4.5 प्रतिशत पासवान समुदाय है। चिराग के पिता और दलित नेता रामविलास पासवान भी एनडीए में रहे हैं। यही वजह है कि अगले चुनाव में जाने से पहले भाजपा ने काफी तौलकर यह फैसला लिया है।

गैर-यादव, गैर-कुर्मी जातियों का गणित
हाल में बिहार के एक और प्रभावशाली दलित नेता जीतनराम मांझी ने एनडीए में जंप लिया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि जेडीयू उनकी पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा का विलय करने पर दबाव बना रही है। सहनी के साथी चर्चा और चिराग की वापसी के गणित को देखें तो भाजपा लोकसभा चुनाव के लिए ऊंची जातियों, गैर-यादव और गैर-कुर्मी ओबीसी और दलितों का इंद्रधनुषी गठबंधन बनाना चाहती है। कर्नाटक में वोक्लाकिगा समुदाय में पकड़ रखने वाली जेडीएस को भी साथ लाने की कोशिश इसी का परिणाम है।

यही नहीं, भाजपा अपने दो पूर्व सहयोगी दलों टीडीपी और शिरोमणि अकाली दल के साथ चर्चा कर रही है। बीजेपी को लगता है कि ऐसे समय में जब विपक्षी दल एक होने की कोशिश कर रहे हैं तो पर्सेप्शन की फाइट में एनडीए की मजबूती उसे चुनाव में ताकत देगी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई के आखिरी हफ्ते में एनडीए को मजबूत करने और उसका विस्तार करने की बात कही थी।

Latest articles

संस्कार सेना द्वारा ‘एक शाम माँ के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन; मातृ शक्ति और मेधावी छात्र होंगे सम्मानित

भोपाल। राष्ट्रीय संस्कार सेना के तत्वावधान में 'माता-पिता सम्मान संकल्प भारत यात्रा' की तीसरी...

दिल्ली में सीएम विष्णु देव साय ने गृहमंत्री अमित शाह को सौंपा बस्तर का विकास रोडमैप

रायपुर/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय...

जालोर: ग्रामीणों के बीच पहुंचे सीएम भजनलाल शर्मा, पंसेरी में सुबह की सैर कर जाना जनता का हाल

जालोर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को अपने जालोर दौरे के दौरान अपने सहज...

भारत पर नजर उठाई तो जो अब तक नहीं हुआ, वह होकर रहेगा : राजनाथ सिंह

राजस्थान। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार...

More like this

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: पट्टा धारियों के घर तोड़ने की कार्रवाई का विरोध

भोपाल राजधानी के वार्ड 66 स्थित इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी के निवासियों के आशियानों पर मंडरा...