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क्रूड के दाम भी कम और टैक्स भी, फिर भी पेट्रोल की कीमतें क्यों नहीं घट रहीं?

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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत में पिछले एक साल से अधिक समय से बदलाव नहीं हुआ है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी। अब यह 78 डॉलर के आसपास रह गई है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पेट्रोल और डीजल की कीमत को कई साल पहले ही बाजार के हवाले कर दिया गया था। लेकिन इनकी कीमत कच्चे तेल की कीमत में हुई बदलाव के मुताबिक नहीं बदलती हैं।

तेल का खेल
कागजों पर देखें तो देश में पेट्रोल की कीमत को 13 साल पहले जुलाई 2010 में डिरेगुलेट कर दिया गया था। इसी तरह डीजल को भी अक्टूबर 2014 में डिरेगुलेट किया गया था। सरकार ने बाकायदा संसद में यह बात कही है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत तय करती हैं। लेकिन आप पेट्रोल पंप पर जाएं तो ऐसा नहीं लगता है। उदाहरण के लिए अक्टूबर 2014 में जब क्रूड की कीमत 86.8 डॉलर प्रति बैरल थी तो देश में पेट्रोल की एवरेज कीमत 67 रुपये प्रति लीटर थी। 15 महीने बाद जब जनवरी, 2016 में जब क्रूड की कीमत 28.1 डॉलर पर आ गई तो पेट्रोल 60 रुपये लीटर के आसपास था।

​अभी क्या है कीमत
बाद में जब क्रूड की कीमत बढ़कर 50 डॉलर प्रति बैरल पहुंची तो पेट्रोल की कीमत बढ़कर 70 रुपये हो गई। लेकिन अप्रैल 2020 में जब क्रूड 19.9 डॉलर पर आ गया तो देश में पेट्रोल की कीमत में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। एक साल बाद पेट्रोल 65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया तो मार्च, 2021 में पेट्रोल 90 रुपये पर चला गया। पिछले साल जून से कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट आ रही है लेकिन देश में पेट्रोल की एवरेज कीमत 97 रुपये बनी हुई है। दिल्ली में मंगलवार को पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये और डीजल का भाव 89.62 रुपये प्रति लीटर है।

​कब हुआ था आखिरी बदलाव
पिछले एक साल में क्रूड की कीमत में 35 फीसदी गिरावट आई है। साथ ही सेट्रंल एक्साइज सितंबर 2021 के पीक की तुलना में 13 रुपये कम हुआ है। फिर भी देश में पेट्रोल की रिटेल प्राइस में कोई बदलाव नहीं हुआ है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पिछले साल मार्च में एक समय कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी जो 2008 के बाद इसका उच्चतम स्तर था। अभी क्रूड की कीमत 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। देश में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने आखिरी बार पिछले साल अप्रैल में पेट्रोल-डीजल की कीमत में बदलाव किया था। मई में केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की थी। उसके बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

​अमेरिका का हाल
अमेरिका में मार्केट तेल की कीमत तय करता है। कच्चे तेल की कीमत के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमत बदलती है। उदाहरण के लिए अक्टूबर 2014 में जब क्रूड की कीमत दो डॉलर प्रति गैलन था तो पेट्रोल की कीमत 2.4 डॉलर और डीजल की कीमत 2.5 डॉल प्रति गैलन थी। एक गैलन 3.78541 लीटर के बराबर होता है। फरवरी, 2016 में जब क्रूड 0.7 डॉलर प्रति गैलन पर आया था तो पेट्रोल और डीजल की कीमत एक डॉलर प्रति गैलन के आसपास आ गई थी। इसी तरह जून, 2022 में जब क्रूड की कीमत 2.7 डॉलर पहुंची थी तो पेट्रोल की कीमत 4.1 डॉलर और डीजल की कीमत 4.4 डॉलर पहुंच गई। लेकिन इसके बाद से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत में काफी गिरावट आई है। सवाल है कि अमेरिका में रिटेल कीमतें क्रूड के हिसाब से क्यों चलती हैं? इसकी वजह यह है कि फ्यूल की कीमत में क्रूड की सबसे ज्यादा अहमियत है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के मुताबिक पेट्रोल की कीमत में क्रूड का वेटेज 61 परसेंट है। इसके अलावा पेट्रोल की कीमत में 14 परसेंट रिफाइनिंग कॉस्ट, 11 परसेंट डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग कॉस्ट और 14 परसेंट फेडरल और स्टेट टैक्स शामिल है।

​भारत की स्थिति
भारत में स्थिति अमेरिका से अलग है। हमारे यहां पेट्रोल-डीजल की कीमत में टैक्स का सबसे बड़ा हिस्सा है। जब भी कच्चे तेल में गिरावट आती है तो केंद्र सरकार एक्साइज बढ़ा देती है। उदाहरण के लिए अक्टूबर 2014 में जब क्रूड की कीमत 86.8 डॉलर थी तो सेंट्रल एक्साइज 9.5 रुपये प्रति लीटर थी। जनवरी, 2016 में जब क्रूड की कीमत गिरकर 28.1 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई तो सेंट्रल एक्साइज बढ़कर 19.7 डॉलर प्रति लीटर हो गया। अप्रैल 2020 में कोरोना के कारण जब क्रूड की कीमत 19.9 डॉलर प्रति बैरल रह गई तो सेंट्रल टैक्स बढ़कर 23 रुपये प्रति लीटर हो गई। एक महीने बाद यह बढ़कर 33 रुपये हो गई। मई 2022 में जब क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंची तो सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज घटाकर 19.9 रुपये कर दिया। इसके बावजूद भी यह अक्टूबर 2014 के स्तर से करीब 10 रुपये ज्यादा है।

​अब ओएमसी कमा रही मुनाफा
क्रूड ऑयल की कीमत भी पीक से काफी नीचे आ चुकी है और सेंट्रल टैक्स भी 2021 की तुलना में कम हो चुका है लेकिन पेट्रोल और डीजल की कीमत एक साल से नहीं बदली है। इसकी वजह यह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने डीलरों के लिए कीमत बढ़ा दी है। सितंबर 2021 में जब क्रूड की कीमत 73.1 डॉलर प्रति बैरल थी तो केंद्र सरकार प्रति लीटर पेट्रोल पर 32.9 रुपये टैक्स वसूल रही थी जबकि तेल कंपनियां डीलरों को 41.6 रुपये के भाव पर पेट्रोल बेच रही थी। एक महीने बाद जब क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई तो सेंट्रल एक्साइज घटकर 27.9 रुपये रह गया जबकि तेल कंपनियों ने बेस प्राइस बढ़ाकर 48.2 रुपये प्रति लीटर कर दिया। मार्च, 2022 में क्रूड की कीमत 100 डॉलर के पार चली गई थी तो केंद्र सरकार ने एक्साइज घटाकर 19.9 रुपये कर दिया लेकिन तेल कंपनियां 57 रुपये को बेस प्राइस वसूल रही थीं। तबसे यह उसी लेवल पर बना हुआ है। भारत को रूस से भी सस्ता तेल मिल रहा था लेकिन इसका फायदा कंज्यूमर्स को नहीं मिल रहा है।

​क्या रुपया जिम्मेदार है
भारत अधिकांश क्रूड का आयात करता है। इसलिए एक्सचेंज रेट का भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर होता है। लेकिन रुपये की कीमत में गिरावट की तुलना में पेट्रोल-डीजल की कीमत ज्यादा तेजी से बढ़ी है। अक्टूबर, 2014 में एवरेज एक्सचेंज रेट 61.3 रुपये प्रति डॉलर था जबकि क्रूड की एवरेज कीमत 86.8 डॉलर प्रति बैरल थी। इस हिसाब से क्रूड की कीमत 5,325 रुपये प्रति बैरल यानी 33 रुपये प्रति लीटर बैठती है। अब डॉलर की कीमत 82 रुपये के ऊपर चली गई है लेकिन क्रूड 74.5 डॉलर प्रति बैरल है। इस हिसाब से क्रूड की कीमत 38 रुपये प्रति लीटर बैठती है। इस तरह रुपये के संदर्भ में देखें तो क्रूड की कीमत में 14.9 परसेंट की तेजी आई है। लेकिन इस दौरान पेट्रोल की कीमत 43.8 परसेंट चढ़ी है और डीजल 61.2 परसेंट महंगा हुआ है।

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