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अयोध्या डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर CAG रिपोर्ट में क्या सवाल उठाए गए?

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नई दिल्ली,

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने केंद्र की स्वदेश दर्शन योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अयोध्या विकास परियोजना के कार्यान्वयन में ठेकेदारों को अनुचित लाभ देने सहित कई अनियमितताएं पाई हैं. सीएजी ने जनवरी 2015 से मार्च 2022 तक स्वदेश दर्शन योजना की शुरुआत से इसका परफॉरमेंस ऑडिट किया है. बुधवार को लोकसभा में पेश की गई परफॉरमेंस ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदारों को छह राज्यों में छह परियोजनाओं/सर्किट में 19.73 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ दिया गया.

इन परियोजनाओं में अयोध्या का विकास; सिंक्वेरिम-अगुआडा जेल गोवा का विकास, हिमाचल प्रदेश का हिमालयन सर्किट, तेलंगाना का हेरिटेज सर्किट; सिक्किम रंगपो-सिंगतम का विकास और मध्य प्रदेश का बौद्ध सर्किट शामिल है.

अयोध्या को लेकर सीएजी की रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा
अयोध्या विकास परियोजना में ठेकेदारों को दिए गए अनुचित लाभ का विस्तृत विवरण देते हुए, सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है: ‘कार्यान्वयन एजेंसी अर्थात उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा नियुक्त ठेकेदार को पांच प्रतिशत की दर से परफॉर्मेंस गारंटी जमा कराना जरूरी था जो अनुबंध धनराशि 62.17 करोड़ रुपये का 5 प्रतिशत यानि 3.11 करोड़ रुपये थी. हालांकि, ठेकेदार ने इसके नवीनीकरण (सितंबर 2021) के समय रिकॉर्ड पर बिना कारण बताए परफॉर्मेंस गारंटी की राशि यानी केवल 1.86 करोड़ रुपये जमा की.’

लेखापरीक्षा में ऐसे उदाहरण देखे गए जहां छह परियोजनाओं/सर्किटों में ठेकेदारों को 19.73 करोड़ का अनुचित लाभ दिया गया, जिसमें निम्नलिखित शामिल है:

(ए) अयोध्या, उत्तर प्रदेश का विकास: कार्यान्वयन एजेंसी अर्थात उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा नियुक्त ठेकेदार को पांच प्रतिशत की दर से परफॉर्मेंस गारंटी जमा कराना जरूरी था जो अनुबंध धनराशि 62.17 करोड़ रुपये का 5 प्रतिशत यानि 3.11 करोड़ रुपये थी. हालांकि, ठेकेदार ने इसके नवीनीकरण (सितंबर 2021) के समय रिकॉर्ड पर बिना कारण बताए परफॉर्मेंस गारंटी की राशि यानी केवल 1.86 करोड़ रुपये जमा की.

– गुप्तार घाट, अयोध्या में काम को समान आकार के 14 लॉट में बांटा गया था और कई निजी ठेकेदारों को काम सौंपा गया था. हालांकि, निष्पादन एजेंसी (सिंचाई विभाग) ने ठेकेदारों द्वारा प्रस्तावित वित्तीय बोलियों/दरों का तुलनात्मक विश्लेषण करने में उचित सावधानी नहीं बरती और एक जैसे तथा स्वीकृत लागत के काम अलग-अलग दरों पर एक ही ठेकेदारों को दे दिए, इससे 19.13 लाख रुपये का नुकसान हुआ.

– तीन ठेकेदारों को काम देने के बाद राज्य सरकार ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उनका जीएसटी पंजीकरण रद्द कर दिया. मतलब ये हुआ कि वे अब पंजीकृत ठेकेदार नहीं रहे और जीएसटी एकत्र करने के हकदार नहीं रहे. हालांकि, एक ठेकेदार को उसके जीएसटी पंजीकरण के विपरीत कुल 19.57 लाख का अनियमित भुगतान किया गया था. अन्य दो ठेकेदारों के मामले में, यह भुगतान लंबित था, जबकि जीएसटी की पूरी राशि को कटौती करने का जिम्मा निष्पादन एजेंसी (सिंचाई विभाग) पर था.

(बी) सिंक्वेरिम-अगुआडा जेल, गोवा का विकास: गोवा भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) नियम, 2008 नियम उल्लंघन में तीन साइटों (अंजुना, टेराखोल और कैलंगुट) के संबंध में ठेकेदार के बिलों से ₹ 15.65 लाख की श्रम कल्याण उपकर की कटौती नहीं की गई थी. लेखापरीक्षा द्वारा इंगित किए जाने पर, राज्य सरकार ने कहा (मार्च 2022) कि उसने ठेकेदारों के चालू खाते के बिलों से 6.33 लाख रुपये की वसूली की है और 9.32 लाख रुपये की शेष राशि अगले चालू खाता बिलों से की वसूली की जाएगी.

(सी) हिमालयन सर्किट, हिमाचल प्रदेश: पांच कार्यों में, 1.99 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी (तीन मामलों में परफॉर्मेंस गारंटी ठेकेदार से नहीं लगी गई थी और अन्य दो मामलों में परफॉर्मेंस गारंटी को इसके खत्म होने के बाद भी नहीं बढ़ाया गया) नहीं ली गई. इसके अलावा, एक मामले में, प्रस्ताव के अनुरोध में 10 प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का प्रावधान था, हालांकि राज्य सरकार ने, 5 प्रतिशत की दर पर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी तय कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप 0.38 करोड़ की कम राशि प्राप्ति हुई. पर्यटन विभाग ने ऑडिट अवलोकन को स्वीकार करते हुए कहा (जनवरी 2022) कि शेष 5 प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी ठेकेदार के रनिंग बिल से काट ली जाएगी.

(डी) हेरिटेज सर्किट, तेलंगाना: योजना के दिशानिर्देशों में ठेकेदार को अग्रिम भुगतान की परिकल्पना नहीं की गई थी, राज्य सरकार ने मंत्रालय की मंजूरी के बिना, ठेकेदारों को 4.99 करोड़ की अग्रिम राशि (जुलाई 2021) दे दी, इससे न केवल योजना के दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ बल्कि 13.31 लाख रुपये का ब्याज प्राप्त करने का अवसर भी खो दिया.

(ई) रंगपो-सिंगतम, सिक्किम का विकास: विभाग ने ऑडिट की तारीख (जनवरी 2022) तक किसी भी ठेकेदार के रनिंग अकाउंट बिल/अंतिम बिल से 5 प्रतिशत भंडारण शुल्क नहीं काटा, हालांकि राज्य कार्य मैनुअल और अनुमोदन द्वारा राज्य सरकार ने इसकी परिकल्पना की थी, जिससे ठेकेदारों को अनुचित लाभ हुआ और 0.28 करोड़ का नुकसान हुआ.

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