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Saturday, March 21, 2026
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भरभराकर पहाड़ से नीचे आ गए घर… हिमाचल में क्यों हो रहा ऐसा, कौन है जिम्मेदार?

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आह…हाय, बचाओ! बाबा इसके अंदर लोग तो नहीं फंसे हैं? शिमला का कृष्णानगर। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनल्स की स्क्रीन पर ये दिल दहला देने वाला वीडियो वायरल है। शिमला के समरहिल का शिव मंदिर या फागली का मकान। हर जगह से आ रही भयावह तस्वीरें भूस्खलन की तबाही का मंजर बयां कर रही हैं। एक के बाद एक तमाम घर लैंडस्लाइड की चपेट में आ रहे हैं। देवभूमि ने यह मंजर और दर्द एक महीने में दूसरी बार महसूस किया है। जलप्रलय के बाद भूस्खलन की आफत से पूरे हिमाचल प्रदेश में हाहाकार है। शिमला के लोगों में तो ऐसा खौफ है कि ना जाने कब पहाड़ टूट पड़े। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राजधानी शिमला से लेकर पूरे हिमाचल में लैंडस्लाइड की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?

सीएम सुक्खू ने बताई वजह
हिमाचल के प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि शिमला के कई इलाकों में लैंडस्लाइड की घटनाएं हो रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पानी के रिसाव के चलते ही ऐसी घटनाएं हो रही है। सीएम सुक्खू का कहना है कि शिमला में ड्रेनेज सिस्टम को लेकर आगामी समय में काम किया जाएगा ताकि इस तरह की घटनाएं न हो। सीएम ने बताया कि प्रदेश में हुई इस तबाही में अबतक 60 लोगों की मौत हो चुकी है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
पर्यावरणविद राजेश कुमार ने बातचीत में बताया कि हिमाचल प्रदेश की सड़कों को चौड़ा करने के लिए पहाड़ों ऊपर से काटा जा रहा है। इसी वजह से भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में इंसानी गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही है। इस वजह से पहाड़ों का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। बारिश के मौसम में या फिर बारिश के बाद पहाड़ों की नींव कमजोर हो जाती है। इसी वजह से पहाड़ टूटकर गिरने लगते हैं। भूस्खलन की एक बड़ी वजह वनों को काटना भी हैं। दरअसल पेड़ों की जड़े मिट्टी पर मजबूती के साथ पकड़ बनाती है। इसके साथ ही पहाड़ों के पत्थरों को भी बांधकर रखती हैं। पेड़ों को काटने से ये पकड़ मजबूत होती है। इसी वजह से जब बारिश होती है, तो पहाड़ के बड़े बड़े पत्थर गिरने लगते हैं। शिमला में हो रहे हादसों का भी यही कारण है।

हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बड़ी वजह
पहाड़ों पर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगातार हो रहे भूस्खलन की एक बड़ी वजह हैं। प्रोजेक्ट के दौरान टनल बनाने के लिए विस्फोट किए जाते हैं। भारी मशीनों के इस्तेमाल से पहाड़ों पर तेज कंपन होता है। हिमाचल प्रदेश का इकोसिस्टम अभी काफी संवेदनशील है। इन राज्यों में मौजूद पहाड़ों की उम्र भी कम होने की वजह से लैंडस्लाइड की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन को भी भूस्खलन के बढ़ते मामलों की एक वजह माना जा सकता है। पिछले साल फरवरी में नासा ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके मुताबिक क्लाइमेंट चेंज से हिमालयी के ग्लेशियर झील वाले इलाकों में जून से सितंबर के दौरान लैंडस्लाइड बढ़ सकती है। साथ ही इससे बाढ़ की आपदा से जूझना पड़ सकता है।

शिमला में हुए लैंडस्लाइड में 19 लोगों की मौत
हिमाचल की राजधानी शिमला में पिछले तीन दिनों में तीन जगह पर लैंडस्लाइड से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। समरहिल के शिव मंदिर में 12, फगली में 5 और कृष्णानग 2 शव बरामद किए गए। शिव मंदिर के मलबे में अभी भी कुछल लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। एनडीआरएफ औऱ एसीडीआरएफ की टीमों का रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

सोलन में भी 10 लोगों की मौत
शिमला से सटे सोलन में भी प्राकृतिक आपदा ने ताउम्र न भूलने वाले जख्म दिए हैं। कंडाघाट उपमंडल के ममलीग गांव में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में 10 लोगों की मौत हुई है। कुदरत ने ऐसा कहर बरपा कि दो मासूम बच्चों ने माता-पिता के साथ ही संसार त्याग दिया। वहीं दो मासूम बच्चों ने पिता के साथ दम तोड़ा। उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने कहा कि 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि दो घायल हुए हैं

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