नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को समलैंगिक विवाह को मान्यता मिलने को लेकर बड़ा फैसला सुनाएगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले पर अपना फैसला देगी। 11 मई को मामले की सुनवाई खत्म हो गई थी और उसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट सिर्फ कानून की व्याख्या कर सकता है लेकिन कानून नहीं बन सकता। उन्होंने साफ कहा कि सरकार इस मामले पर कमेटी बनाएं और इन लोगों को अधिकार देने चाहिए। सीजेआई ने कहा कि सभी को अपना साथी चुनने की आजादी है। मान्यता न देना अप्रत्यक्ष रूप से संविधान का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच ने मामले की सुनवाई 18 अप्रैल को शुरू की थी और 11 मई तक यह सुनवाई चली। कोर्ट में इस मामले को लेकर करीब 20 याचिका दाखिल की गई है। इसमें सेम सेक्स कपल, ट्रांसजेंडर पर्सन, LGBTQIA + शामिल है।
इन राज्यों ने किया है विरोध
असम, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, सिक्किम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मणिपुर ने सेम सेक्स मैरिज का विरोध किया है। राजस्थान की ओर से कहा गया है समलैंगिक विवाह सामाजिक ताने-बाने में असंतुलन पैदा करेगा और इसके दूरगामी परिणाम होंगे। तो वहीं असम सरकार ने कहा कि विवाह, तलाक और सहायक विषय संविधान की समवर्ती सूची की प्रविष्टि 5 के अंतर्गत आते हैं और यह राज्य विधान मंडल के क्षेत्र में है।
