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रामचरित मानस राष्ट्र ग्रंथ हो… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कर दी मांग

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सतना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य की किताबों का चित्रकूट में लोकार्पण किया है। इससे पहले उन्होंने कांच मंदिर में पूजा की। किताबों का लोकार्पण करने प्रधानमंत्री तुलसी पीठ में आयोजित कार्यकर्म स्थल पर पहुंचे। वहां, उन्होंने जगदगुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लिया है। वह जगदगुरु से लिपटे रहे हैं फिर हाथ पकड़कर उन्हें कुर्सी तक ले गए हैं। जगदगुरु रामभद्रचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंच पर बड़ी मांग कर रही है।

रामभद्राचार्य ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वह रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कर दें। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से अष्टाध्यायी भाष्य, रामानंदाचार्य चरितम और भगवान श्री कृष्ण की राष्ट्रलीला किताब का विमोचन किया है। तीनों किताबें जगदगुरु रामभद्राचार्य की है। जगदगुरु ने मंच से कहा कि मेरे सामने अगर दो लोग हों, भगवान राम और भारत माता तो मैं पहले भारत माता को प्रणाम करूंगा।

जगदगुरु ने भारत शब्द की व्याख्या भी की है। उन्होंने कहा कि जिस देश पर भगवान का आदर और प्रेम है, उसे भारत कहते हैं। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों भारत को विकसित भारत बनाने जा रहे हैं। देश दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन गया है। हम जल्द ही तीसरी अर्थव्यवस्था में शामिल होंगे। यह श्रेय हमारे मित्र को जाता है। विद्वान की सरस्वती का सम्मान ही सबसे बड़ा समान है। उन्होंने कहा कि मुझसे लोग सवाल पूछते हैं कि आपके पास क्या है। मैं कहता हूं कि मेरे पास पैसा और धन नहीं है। उन्होंने कहा कि धन तो झणभंगुर होता है। लोग चमत्कार में विश्वास करते हैं।

मैं चमत्कार में विश्वास नहीं करता
रामभद्राचार्य ने कहा कि मैं कोई चमत्कार में विश्वास नहीं करता हूं। केवल शास्त्र में विश्वास करता हूं। जगदगुरु ने कहा कि अभी मुझे मोदी जी ने कहा कि वजन घटाइए। यह बात उनसे सुनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हंसने लगे। वजन की बात पर उन्होंने कहा कि मैं क्या करूं। मैं उठने के बाद राम नाम का जप करता हूं। इसके बाद लिखता हूं, मुझे समय ही नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि अभी रामचरित मानस के नौ खंड मुझे लिखने हैं। मैं प्रधानमंत्री से यही कहूंगा कि किसी भी प्रकार से रामचरित मानस को ही राष्ट्र ग्रंथ होना चाहिए।

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