छिंदवाड़ा
विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि छिंदवाड़ा में कमलनाथ का जादू अब भी बरकार है। लगभग 43 साल से कमलनाथ छिंदवाड़ा पर राज कर रहे है। इस बार भाजपा की तमाम रणनीति के बावजूद नाथ का करिश्मा छिंदवाड़ा में कायम रहा।2018 की तरह इस बार भी छिंदवाड़ा में सातों सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया। वहीं भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। छिंदवाड़ा, चौरई, जुन्नारदेव, परासिया, सौंसर, पांढुर्णा और चौरई में सातों सीटों पर भाजपा को पराजय का मुंह देखना पड़ा। छिंदवाड़ा के आदिवासी विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी की सारी रणनीति ध्वस्त हो गई।
अमरवाड़ा में बीजेपी को सिर्फ 88 वोट
बात अमरवाड़ा की करे तो यहां पर विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाविजय अभियान का चुनावी शंखनाद करते हुए आंचल कुंड के दादा जी धाम दरबार में पूजा अर्चना की थी। क्योंकि बटका खापा के पास बसे इस आंचल कुंड धाम से आदिवासी समाज की काफी आस्था जुड़ी हुई थी लेकिन बावजूद इसके आंचलकुंड गांव में महज बीजेपी को 88 वोट ही मिल पाए। यहां पर कांग्रेस ने 402 वोट लेकर गोंडवाना के वोट बैंक में सेंध लगा ली। गोंडवाना को महज यहां पर 72 वोट ही मिल पाए। जबकि भाजपा का दावा था कि यहां से उन्हे एक तरफा लीड मिलेगी। इसके आसपास के गांव में भी कांग्रेस ने अच्छी बढ़त ली।
जुन्नारदेव में भी कांग्रेस की जीत
कुछ ऐसा ही हाल जुन्नारदेव का भी रहा। चुनाव प्रचार के आखरी दौर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुन्नारदेव में चुनावी आमसभा की थी। जहां पर उन्होंने सभी केंडिडेट को मंच पर बुलाकर कार्यकर्ताओं को जीत का संकल्प दिलाया था, लेकिन जुन्नारदेव में भी बीजेपी प्रत्याशी नत्थन शाह कवडेती चुनाव नहीं जीत पाए। यहां पर कांग्रेस प्रत्याशी सुनील उईके ने नत्थन शाह कवडेती को 3218 वोट से हरा दिया। यहां भी पार्टी में नाराज कार्यकर्तार्ओं को स्थानीय संगठन के द्वारा कोई तरजीह ना देना हार की प्रमुख वजह मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा को यहां पर पराजय मिली।
