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दिल्ली से दूर क्यों रहना चाहते हैं शिवराज सिंह चौहान? खुद को रेस से ‘OUT’ कर बढ़ा दिया प्रेशर

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भोपाल:

‘मैं दिल्ली नहीं जाऊंगा।’, ‘मैं मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल नहीं हूं।’ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के यह दो बयान इन दोनों बहुत चर्चा में है क्योंकि 3 दिसंबर को ही विधानसभा चुनाव के परिणाम आए हैं। मध्य प्रदेश में भाजपा ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई है और अब नए मुख्यमंत्री की तलाश जारी है। ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बयान के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा दखल रखने वाले विश्लेषकों से नवभारत टाइम्स डिजिटल ने सीएम शिवराज सिंह चौहान के इन सवालों के जवाब जानने चाहे तो उनके अलग-अलग जवाब हमें मिले?

वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र सिंह ने फोन पर बात करते हुए कहा कि शिवराज सिंह चौहान चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में हुई जीत के पीछे लाडली बहना योजना के व्यापक प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता। राघवेंद्र सिंह आगे कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं को देखें तो शिवराज सिंह चौहान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बराबर कद में आकर खड़े हो गए हैं। अब मुख्यमंत्री किसी भी भाजपा नेता से कमतर नहीं है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व कोई भी फैसला शिवराज से पूछे बगैर लेगा? ऐसा व्यवहारिक नहीं है।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार धनंजय प्रताप सिंह ने बताया कि शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते ही मध्य प्रदेश में भाजपा की इतनी बड़ी वापसी हुई है। क्योंकि वे खुद वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में भी क्यों कहेंगे कि वे मुख्यमंत्री की रेस में शामिल हैं। जो नेता मुख्यमंत्री नहीं है, वह इस रेस में शामिल होने का बयान जरूर दे सकते हैं। दिल्ली न जाकर भोपाल से ही बयान जारी कर उन्होंने इशारों-इशारों में ही हाई कमान को अपनी बात कह दी है।

क्या बोले थे CM शिवराज
दरअसल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में चुनाव जीतने के दो दिन बाद 5 दिसंबर को सोशल मीडिया में अपना एक बयान जारी किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा था कि मैं सीएम पद का दावेदार न तो पहले कभी रहा हूं और ना आज ही हूं। उसके बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा था कि मैं दिल्ली नहीं जाऊंगा, मैं छिंदवाड़ा जाकर 29 कमल के फूलों की माला पीएम मोदी के गले में पहनाऊंगा। इसका तात्पर्य आगामी लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी लोकसभा की 29 सीटों को जिताना था। आपको बता दें वर्तमान में छिंदवाड़ा छोड़कर सभी 28 लोकसभा सीटें भाजपा के कब्जे में हैं।

छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा
छिंदवाड़ा से कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ कांग्रेस सांसद हैं। इस बार हुए विधानसभा चुनाव में भी भले ही भाजपा 163 सीटों के साथ प्रचंड जीत हासिल कर चुकी हो लेकिन, कांग्रेस नेता कमलनाथ का गढ़ कहीं जाने वाले छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले की सभी सात विधानसभा सीट हार गई है। आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज छिंदवाड़ा रवाना हो रहे हैं। वहां वे करीब 2 घंटे रुककर कार्यकर्ताओं से हार का फीडबैक लेंगे।

गौरतलब है कि 4 दिसंबर को जनता को वीडियो संदेश देकर धन्यवाद दे चुके मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक बार फिर वीडियो संदेश जारी किया है, उसे ट्वीट भी किया है। इस वीडियो में उनके कही गई बातों के एक के बाद एक तो तय हो चुकी है कि मध्य प्रदेश के अगले सीएम शिवराज नहीं होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में संपन्न, समृद्धशाली, गौरवशाली और शक्तिशाली भारत का निर्माण हो रहा है।

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