नई दिल्ली:
फरवरी में भी धरती इस बार ऐतिहासिक तौर पर गर्म रही। इस महीने औसत तापमान 1.77 डिग्री अधिक रहा। यूरोपीय संघ की एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने यह जानकारी दी है। इससे पहले यह रेकॉर्ड फरवरी 2016 के नाम था। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस असामान्य गर्मी की वजह अल नीनो है। मध्य प्रशांत महासागर की सतह अल नीनो की वजह से तेजी से गर्म होती है।
सी3एस के अनुसार इस साल जनवरी में पहली बार पूरे साल का वैश्विक औसत तापमान डेढ़ डिग्री को पार कर गया। पेरिस समझौते में वैश्विक तापमान को डेढ़ डिग्री से ऊपर जाने से रोकना है। सी3एस की गुरुवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि धरती का वैश्विक सतह तापमान 1850-1900 के औसत तापमान से करीब 1.1 डिग्री बढ़ चुका है। इसकी वजह से दुनियाभर में रिकॉर्ड सूखे, वनों में आग और बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं।
इस साल अच्छी बारिश के आसार
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023-24 में अल नीनो इफेक्ट सबसे मजबूत रहा। अब यह कमजोर पड़ रहा है। इसके बावजूद आने वाले कुछ महीनों तक इसका असर दिखेगा। मार्च से मई तक जमीनी सतह पर भी तापमान में बढ़ोत्तरी होगी। इसके बाद ला नीना इफेक्ट बन सकता है। इससे इस साल अच्छी बारिश होने के आसार है। ला नीना के चलते इस साल हॉर्न ऑफ अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में ज्यादा बारिश हो सकती है।
यह लगातार नौवां महीना है जो वैश्विक स्तर पर सबसे गर्म रहा.मार्च 2023-फरवरी 2024 के 12 महीनों में ग्लोबल एवरेज तापमान प्री इंडस्ट्रियल औसत (1850-1900) से 1.56 डिग्री अधिक रहा.सबसे अधिक गर्मी की मार यूरोप पर दिखी। यहां 1991-2022 की तुलना में तापमान 3.30 डिग्री अधिक रहा।सर्दियों (दिसंबर-जनवरी-फरवरी) के दौरान दुनिया 0.78 डिग्री गर्म रही
