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Thursday, April 30, 2026
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‘इलेक्टोरल बॉन्ड पर कल तक ही पूरा डेटा दें…’, SC ने लगाई फटकार, नहीं मानी SBI की दलील

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नई दिल्ली,

इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुनवाई के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (SC) ने SBI को कल (12 मार्च) तक ही पूरी डिटेल देने का आदेश दिया है.इससे पहले सुनवाई के दौरान SBI की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील हरीश साल्वे ने जानकारी देने के लिए 30 जून तक का वक्त मांगा. सुनवाई के दौरान साल्वे ने कहा कि कोर्ट ने SBI को बॉन्ड की खरीद की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं, जिसमें खरीदारों के साथ-साथ बॉन्ड की कीमत जैसी जानकारी शामिल है.

साल्वे ने सुनवाई के दौरान कहा कि इसके अलावा राजनीतिक दलों का विवरण, पार्टियों को कितने बॉन्ड मिले यह जानकारी भी देना है, लेकिन समस्या यह है कि जानकारी को निकालने के लिए एक पूरी प्रक्रिया को उलटना पड़ेगा. SOP के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि बॉन्ड के खरीदार और बॉन्ड की जानकारी के बीच कोई संबंध ना रखा जाए. हमें यह बताया गया था कि इसे गुप्त रखना है. बॉन्ड खरीदने वाले का नाम और खरीदने की तारीख कोड की गई है, जिसे डिकोड करने में समय लगेगा.

मुंबई में ही हैं दोनों डीटेल्स तो परेशानी कहां?: SC
SBI की याचिका पढ़ते हुए CJI ने कहा,’ आवेदन में आपने (SBI) कहा है कि सभी जानकारी सील करके एसबीआई की मुंबई मुख्य शाखा भेज दी गई. मुख्य शाखा में भुगतान की पर्चियां भी भेजी गईं. यानी दोनों विवरण मुंबई में ही हैं. लेकिन, हमने जानकारी का मिलान करने का निर्देश नहीं दिया था. हम तो सिर्फ यह चाहते थे कि एसबीआई डोनर्स की स्पष्ट जानकारी दे.’

सीलबंद लिफाफे खोलकर SBI को देना है विवरण
सीजेआई ने SBI से पूछा कि वह फैसले का अनुपालन क्यों नहीं कर रहे हैं. FAQ में भी दिखाया गया है कि हर खरीद के लिए एक अलग केवाईसी है. जस्टिस खन्ना ने कहा कि सभी विवरण सीलबंद लिफाफे में हैं और आपको (SBI) बस सीलबंद कवर खोलकर विवरण देना है.

SBI ने जानकारी ना दे पाने के पीछे दिया ये हवाला
SBI की तरफ से पेश हुए हरीश साल्वे ने कहा कि बॉन्ड खरीदने की तारीख के साथ बॉन्ड का नंबर और उसका विवरण भी देना होगा. इस पर CJI ने पूछा कि जब फैसला 15 फरवरी को सुनाया गया था और आज 11 मार्च हो गया है. अब तक फैसले का अनुपालन क्यों नहीं किया गया? सुप्रीम कोर्ट सवाल पर साल्वे ने कहा कि हम पूरी सावधानी बरत रहे हैं. ताकी गलत जानकारी देने के लिए हम पर मुकदमा ना हो जाए. इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा कि इसमें मुकदमे की क्या बात है. आपके (SBI) पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं.

अब क्या सामने आएगा?
सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है वह यह है कि एसबीआई को खरीदे गए बॉन्ड और पार्टियों द्वारा भुनाए गए बॉन्ड के सभी विवरण जमा करने होंगे. इससे पता चल जाएगा कि चुनावी बॉन्ड किसने खरीदा है और किस पार्टी को कितना मिला है, लेकिन यह संभावना नहीं है कि किसने-किस पार्टी को दान दिया है. यह बीजेपी और सरकार के लिए राहत की सांस साबित होगा. किस दानकर्ता ने किस पार्टी को कितनी रकम दी है, इसकी जानकारी एसबीआई को नहीं देनी होगी. चूंकि चुनावी बॉन्ड जारी करने की विंडो बहुत छोटी है. यहां तक ​​​​कि एसबीआई द्वारा सभी डेटा डालने के बावजूद दान को किसी विशेष राजनीतिक दल से जोड़ना संभव नहीं हो सकता है.

5 जजों की बेंच कर रही है मामले की सुनवाई
इस मामले पर 5 जजों की बेंच सुनवाई कर रही है, जिसमें चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं.

इलेक्टोरल बॉन्ड Timeline
दो गैर सरकारी संगठनों एडीआर और कॉमन कॉज के साथ ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने संशोधनों को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि वित्त अधिनियमों को धन विधेयक के रूप में पारित किया गया था, जिससे राज्यसभा (संसद का ऊपरी सदन) से जांच को रोका जा सके. याचिकाकर्ताओं ने जनता के सूचना के अधिकार और योजना में पारदर्शिता की कमी के बारे में भी तर्क दिए थे.

12 अप्रैल, 2019: मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने राजनीतिक दलों को दान, दाताओं और बैंक खाता संख्या के सभी विवरण एक सीलबंद कवर में चुनाव आयोग को सौंपने का निर्देश दिया.

नवंबर 2019-अक्टूबर 2020: याचिकाकर्ताओं ने कई बार अदालत का रुख किया और बिहार चुनाव से पहले मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की.

26 मार्च 2021: एडीआर 2021 की शुरुआत में इस योजना पर रोक चाहता था. 26 मार्च, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी कॉर्पोरेट प्रभाव के बारे में चिंताओं को खारिज करते हुए इस योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

16 अक्टूबर, 2023: सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एससी बेंच ने योजना के खिलाफ याचिकाओं को पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजा.

31 अक्टूबर, 2023: सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने योजना के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की.

2 नवंबर, 2023: संविधान पीठ ने मामले पर फैसला सुरक्षित रखा और चुनाव आयोग को 30 सितंबर, 2023 तक योजना के माध्यम से राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त दान पर व्यापक डेटा प्रदान करने का निर्देश दिया.

फरवरी 15, 2024: SC ने इस योजना को रद्द करते हुए सर्वसम्मति से फैसला सुनाया और कहा कि यह भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सूचना के अधिकार के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है.

भारतीय स्टेट बैंक को राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त चुनावी बांड का विवरण 6 मार्च तक भारत निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था. ईसीआई बाद में 13 मार्च तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसे विवरण प्रकाशित करेगा.

4 मार्च, 2024: एसबीआई ने राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए चुनावी बांड के विवरण का खुलासा करने के लिए 30 जून तक की मोहलत की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया.

11 मार्च, 2024: सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई के आवेदन को खारिज कर दिया, कल तक विवरण का खुलासा करने को कहा और पैनल को 15 मार्च की शाम तक इसे अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना चाहिए.

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