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CJI चंद्रचूड़ काटते रहे हर दलील, जानिए कैसे बुरी तरह बैकफुट पर दिखे ‘नंबर 1’ वकील हरीश साल्वे

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नई दिल्ली:

इलेक्टोरल बॉन्ड पर SBI की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बैंक को जमकर सुना दिया। यही नहीं, SBI की तरफ से पैरवी कर रहे देश के नंबर वन वकील हरीश साल्वे पर बैकफुट पर नजर आए। 5 जजों की बेंच की अगुवाई कर रहे चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ साल्वे की हर दलील को काट रहे थे।

बैकफुट पर दिग्गज वकील
साल्वे जैसे दिग्गज वकील अपने मुवक्किल SBI को चुनावी बॉन्ड के बारे में डिटेल देने के लिए और मोहलत हासिल करने असफल रहे। यही नहीं जजों के सवाल-जवाब के दौरान भी वो बैकफुट पर नजर आ रहे थे। उनकी दलीलों को चीफ जस्टिस से लेकर बेंच कई जज लगातार काट रहे थे। कई बार तो ऐसा लग रहा था कि साल्वे जैसे वकील की दलील जजों को प्रभावित नहीं कर पा रही है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो में साल्वे अपनी दलीलों से बेंच को प्रभावित करते नहीं दिखे।

5 जजों की बेंच में सुनवाई
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने पूरे मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने SBI को निर्देश जारी किया है कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड के खरीददार और राजनीतिक दलों के बारे में जानकारी चुनाव आयोग के सामने 12 मार्च तक पेश करें। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह 15 मार्च तक इस बारे में डिटेल अपने वेबसाइट पर अपलोड करें।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये आदेश
सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच ने कहा था कि एसबीआई को चुनावी बॉन्ड का ब्यौरा देना होगा। इस ब्यौरे में यह बताया जाए कि किस तारीख को यह बॉन्ड किसने खरीदा और कितने का खरीदा और किस तारीख को किसने कैश कराया और इसमें कितनी राशि थी। राजनीतिक पार्टियों द्वारा कैश कराए गए एक-एक बॉन्ड का ब्यौरा SBI मुहैया कराए। शीर्ष अदालत ने कहा था कि SBI द्वारा जानकारी मुहैया कराए जाने के बाद 13 मार्च तक चुनाव आयोग को इस बारे में जानकारी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी।

साल्वे ने दी ये दलील
एसबीआई की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे पेश हुए और कहा कि एसबीआई ने गोपनीयता बरतने के लिए एक-एक बॉन्ड के बारे में मैचिंग का डाटा नहीं रखा है और उसे मिलान करने में 30 जून तक का वक्त लगेगा। डोनर का डिटेल और जिसने उसे भुनाया इसका डिटेल अलग-अलग शीट में है। अदालत के आदेश के तहत इसे मिलान करने में वक्त लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे आदेश के तहत एसबीआई को इसे मिलान करने की जरूरत नहीं है। आप सीधे जानकारी दें।

CJI ने साल्वे के तर्क को काट दिया
चीफ जस्टिस ने कहा कि चूंकि एक-एक परचेजर का केवाईसी हो रखा है और बैंक के पास राजनीतिक पार्टियों का खाता है और किस पार्टी ने कितना भुनाया है इसका डिटेल है। कोर्ट ने कहा कि हमने जो आदेश दिया था उसमें मैचिंग (मिलान) करने के लिए नहीं कहा था। हमने आपको कहा था कि डोनर और राजनीतिक पार्टियों के डिटेल पेश करें। ऐसे में आपने जिस आधार पर वक्त मांगा है वह हमारे आदेश में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई के वकील साल्वे ने इस बात को स्वीकार किया कि एसबीआई के पास बॉन्ड के परचेजर का डिटेल है।

चंद्रचूड़ ने कहा, 26 दिन में क्या किया?
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारा आदेश 15 फरवरी का था। 11 मार्च को सुनवाई के रोज 26 दिन बीत गए। आपने मैचिंग यानी मिलान के लिए 26 दिन में क्या किया। आपने इस बारे में आवेदन में क्यों नहीं लिखा कि क्या किया। अदालत ने कहा कि SBI से कहा गया है कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड के खरीद का डिटेल और खरीददार का डिटेल SBI के पास है। साथ ही SBI के पास राजनीतिक पार्टियों द्वारा इसे भुनाए जाने का डिटेल भी है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के डिटेल हैं कि कितने बॉन्ड किसने भुनाए।

12 मार्च तक डिटेल देने का आदेश
कोर्ट ने कहा कि जो जानकारी एसबीआई से मांगी गई है वह उसके पास उपलब्ध है ऐसे में वह डिटेल 12 मार्च तक पेश करे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह 15 मार्च को शाम पांच बजे तक इलेक्टोरल बॉन्ड के बारे में जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करे। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खारिज कर दिया था। साथ ही इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को निर्देश दिया था कि वह छह साल से चल रही इस स्कीम के तहत डोनेशन देने वालों के नामों की जानकारी चुनाव आयोग को छह मार्च तक मुहैया कराएं।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी SBI की अर्जी
शीर्ष अदालत ने कहा कि SBI की उस अर्जी को खारिज की जाती है जिसमें उसने जानकारी देने के लिए 30 जून तक का वक्त मांगा था और SBI को निर्देश दिया जाता है कि वह 12 मार्च 2024 तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इलेक्टोरल बॉन्ड का डिटेल चुनाव आयोग के सामने पेश करें।

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