नई दिल्ली,
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के आचरण को लेकर चिंता जताई है, और दो टूक कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना कर रहे हैं. दरअसल राज्यपाल DMK नेता के पोनमुडी की दोषसिद्धि पर रोक लगने के बावजूद राज्य मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल करने से इनकार कर रहे हैं. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने राज्यपाल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, वह “सर्वोच्च न्यायालय की अवहेलना” कर रहे हैं. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हम इस मामले में राज्यपाल के आचरण को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं. वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय की अवहेलना कर रहे हैं.”
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब किसी अदालत द्वारा दोषसिद्धि पर रोक लगा दी जाती है, तो राज्यपाल के पास कुछ कहने के लिए नहीं रह जाता है. पीठ ने अब राज्यपाल को डीएमके के नेता के पोनमुडी को मंत्री नियुक्त करने के लिए कल तक का एक दिन का समय दिया है.
सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पोनमुडी को मंत्री के रूप में फिर से नियुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा की गई सिफारिश को स्वीकार करने के लिए राज्यपाल रवि को निर्देश देने की मांग की गई थी. तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. राज्यपाल आरएन रवि ने वरिष्ठ डीएमके नेता के पोनमुडी को मंत्री नियुक्त करने से इनकार कर दिया था. तमिलनाडु सरकार ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया था.
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को आय से अधिक संपत्ति के मामले में पोनमुडी की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी और तीन साल की जेल की सजा को निलंबित कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल केवल नाममात्र का मुखिया है, जिससे चुनी हुई सरकार के फैसलों को लागू करने की उम्मीद की जाती है. चीफ जस्टिस ने कहा कि, “क्या हम कानून के शासन द्वारा शासित हैं? कोई भी संवैधानिक पदाधिकारी ऐसा कैसे कह सकता है. हमारे आदेश को लागू किया जाना चाहिए. राज्यपाल के पास सरकार को सलाह देने की शक्ति है. अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की सुनवाई कल करने का अनुरोध किया है.
