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7 मई के लिए क्यों बदलनी पड़ी बीजेपी और कांग्रेस को रणनीति, 3 लोकसभा सीटों ने बढ़ा दी टेंशन

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भोपाल:

मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दो चरणों का मतदान बेहद निराश करने वाला है। 19 अप्रैल को पहले चरण में 6 लोकसभा सीटों पर वर्ष चुनाव 2019 की तुलना में करीब 7 फीसदी कम मतदान हुआ, वहीं 26 अप्रैल को हुए दूसरे चरण में भी 6 सीटों पर 7.65 प्रतिशत कम रहा। कुल मिलाकर देखा जाये तो 12 सीटों में औसत रूप से 7 प्रतिशत तक कम मतदान हुआ है। अब तीसरे चरण की तारीख 7 मई करीब है। प्रदेश की 9 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। इसमें भिंड, मुरैना, ग्वालियर, गुना, सागर, राजगढ़, विदिशा, भोपाल और बैतूल लोकसभा क्षेत्र शामिल हैं।

आमतौर पर भिंड संसदीय क्षेत्र ऐसा है, जहां मतदान हर बार कम होता है। ऐसे में अब राजनीतिक दलों के साथ ही निर्वाचन आयोग और प्रशासन मंथन कर रहा है कि कैसे मतदान प्रतिशत बढ़ाया जाए। सबसे बड़ी चुनौती भिंड, मुरैना और ग्वालियर सीट हैं क्योंकि यहां प्रदेश में सबसे कम मतदान रहता है।

भिंड की स्थिति ठीक नहीं
आपको बता दें कि वर्ष 2014 में भिंड में सबसे कम 45.63 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि 2019 में भी स्थिति ज्यादा नहीं सुधरी थी, यहां 54.42 प्रतिशत के साथ प्रदेश में यह सबसे कम था। 2019 में भिंड की अटेर विधानसभा में सबसे कम 49.34 प्रतिशत मतदान हुआ था। भिंड में भी 49.49 प्रतिशत मतदान हुआ, छह विधानसभा क्षेत्रों में 60 प्रतिशत से कम मतदान रहा था। जबकि भांडेर और दतिया सीट ही ऐसी थीं, जहां मतदान 60 प्रतिशत से अधिक रहा था।

ग्वालियर भी चिंता का विषय
ग्वालियर लोकसभा में वर्ष 2019 में 59.78 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह आंकड़ा वर्ष 2014 के चुनाव की तुलना में 7.05 प्रतिशत अधिक जरूर था, लेकिन विधानसभावार देखा जाए तो पांच विधानसभाओं में यह 60 प्रतिशत से कम रहा था। मुरैना लोकसभा को देखें तो स्थिति भी ऐसी ही थी। यहां की भी पांच विधानसभाओं में मतदान 60 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाया था।

पार्टियों ने बदली रणनीति
कम मतदान की आशंका के चलते भाजपा और कांग्रेस ने रणनीति बदली है और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय किया गया है। भाजपा ने अपने पन्ना और अर्द्ध पन्ना प्रभारियों को घर-घर संपर्क करने का काम सौंपा है। वहीं, पार्टी के सभी बड़े नेता आयुष्मान योजना के लिए 70 से अधिक आयु के व्यक्तियों से संकल्प पत्र भरवाने के माध्यम से संपर्क साध रहे हैं। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने अपने हाथों से बुजुर्गों के फॉर्म भरे हैं।

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