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Sunday, May 10, 2026
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चीन की मिलिट्री तैयारी से भारत को क्यों है खतरा, ये खबर चौंकाने वाली है

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नई दिल्ली:

क्या चीन किसी बड़ी प्लानिंग में जुटा है? ये सवाल उस समय उठे जब पड़ोसी राष्ट्र ने पिछले हफ्ते अपने देश के सशस्त्र बलों का व्यापक पुनर्गठन किया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्ट्रेटजिक सपोर्ट फोर्स (SSF) को भंग करने का चौंकाने वाला फैसला लिया। इस मिलिट्री डिविजन को उन्होंने 2015 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की अलग-अलग क्षमताओं को एक साथ लाने के लिए स्थापित किया था। इस फोर्स में स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और साइकोलॉजिकल वॉरफेयर शामिल थे। हालांकि, अब एसएसएफ को भंग कर इसकी जगह पर इंफॉर्मेशन सपोर्ट फोर्स का गठन किया गया है। ये पूरा घटनाक्रम में ऐसे समय में हो रहा जब भारत में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं। जिसमें केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी समेत सभी सियासी पार्टियां जोरआजमाइश कर रही हैं।

चुनावी घमासान के बीच चीन बढ़ा रहा टेंशन!
भारत में चुनावी घमासान के बीच चीन की तरफ से हो रही ये मिलिट्री तैयारी चौंकाने वाली है। चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति का सीधा असर भारत की डिफेंस प्लानिंग और सुरक्षा स्थिति पर पड़ता है। दिल्ली में मौजूद केंद्र सरकार को संभावित चीनी हमलों से रोकने के लिए अपने सैन्य आधुनिकीकरण प्रयासों में अधिक संसाधनों का निवेश करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके लिए अन्य विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं को पीछे छोड़ने की आवश्यकता होती है। पिछले एक दशक में, भारत ने अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और उनकी कार्यकुशलता को बढ़ाने के उद्देश्य से रक्षा सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। एक महत्वपूर्ण सुधार ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम है, जिसके जरिए स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और रक्षा क्षमताओं में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।

जिनपिंग ने भंग की SSF, शुरू किया ISF
शी जिनपिंग ने एसएसएफ को भंग कर इंफोर्मेशन सपोर्ट फोर्स शुरू किया। इसे लेकर चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ISF, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का एक नया रणनीतिक घटक है। ये नेटवर्क सूचना प्रणाली के समन्वित विकास और इस्तेमाल के लिए अहम सहयोग मुहैया कराएगा। इस नए फोर्स के आने से अब पीएलए में चार प्राइमरी ब्रांच हो गई हैं। इसमें ग्राउंड फोर्स, नौसेना बल, वायु सेना और रॉकेट फोर्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अब चार सहायक इकाइयां हैं, जिसमें एसएसएफ से मिले तीन डिवीजन और ज्वाइंट लॉजिस्टिक सपोर्ट फोर्स शामिल हैं।

चीन के सैन्य बदलाव की क्या हैं वजहें
चीन में किए जा रहे रणनीतिक सैन्य बदलाव के पीछे कई वजहें मानी जा रही है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उभरती हुई तकनीक का इस्तेमाल अहम है। जानकारी के मुताबिक, पिछले साल पीएलए में व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के बाद शी जिनपिंग को फोर्स में इस पुनर्गठन का फैसला लेना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि उस कार्रवाई के दौरान कई प्रभावशाली जनरल फंसे थे। रॉकेट फोर्स के भीतर महत्वपूर्ण व्यवधान पैदा किया गया। वैसे गौर करें तो पिछले एक दशक में, बीजिंग ने अपनी सैन्य क्षमताओं का व्यापक आधुनिकीकरण किया है। इसका लक्ष्य पीएलए को एक ऐसी शक्ति में बदलना है जो क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम हो। इसके लिए चीन उन्नत हथियार, इंस्ट्रूमेंट, एयरक्राफ्ट कैरियर, आगली पीढ़ी के फाइटर जेट, मॉडर्न बैलिस्टिक-क्रूज मिसाइल को अपने बेड़े में शामिल कर रहा। उसका उद्देश्य चीनी सेना को मजबूती प्रदान करने पर है।

चीन के इस दांव से दिल्ली में भी हलचल!
चीन जिस तरह से अपनी सैन्य क्षमता में जरूरी बदलाव कर रहा, ये भारत की सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाला हो सकता है। ऐसी स्थिति में अगर दिल्ली में बैठी सरकार ऐसा कोई कदम उठाती है तो दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव बढ़ने के आसार हैं। वैसे पिछले एक दशक में, भारत ने भी अपनी आर्म्ड फोर्सेज के मॉडर्नाइजेशन और कार्यकुशलता को बढ़ाने के उद्देश्य से रक्षा सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल हुई। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण सैन्य हार्डवेयर और प्रौद्योगिकी के अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

चीन पर लगाम के लिए नई सरकार को करनी होगी खास प्लानिंग
भारत ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) और रणनीतिक भागीदारी मॉडल जैसे उपायों का उद्देश्य खरीद प्रक्रियाओं को आसान बनाने में किया। इसके साथ ही रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया है। भारतीय सीमाओं पर, खास तौर से चीन के साथ लगने वाले बॉर्डर एरिया में सिक्योरिटी के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने का खास प्रयास किया गया। इसमें सशस्त्र बलों के लिए गतिशीलता और रसद सहायता में सुधार के लिए सड़कों, हवाई अड्डों और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। इसी बीच थिएटर कमांड पर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, अभी भी ये बातचीत तक ही है। हालांकि, चीन की ओर से उठाए जा रहे हालिया कदम एक चेतावनी जैसे हैं। ऐसे में भारतीय सशस्त्र बलों को 21वीं सदी में होने वाली जंग के लिए तैयार करना जून में सत्ता संभालने वाली भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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