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नाम स्पेशल सेल, लेकिन काम… दिल्ली की एंटी-टेरर यूनिट की लगातार हो रही दुर्दशा

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नई दिल्ली :

वे पुलिस की वर्दी नहीं पहनते। बेतरतीब दाढ़ी, मुड़ी हुई आस्तीन वाली बिना टक की हुई शर्ट और फैशनेबल स्पोर्ट्स शूज पहनते हैं। वे होल्स्टर नहीं रखते, उनके ग्लॉक आमतौर पर उनकी पीठ पर छिपे होते हैं। दिल्ली की एंटी टेरर यूनिट स्पेशल सेल के अधिकारियों से मिलिए, जो बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से न्यूजक्लिक अरेस्ट केस में प्रक्रियागत खामियों की ओर इशारा किए जाने के बाद चर्चा में है। पिछले दो साल में, यह एंटी टेरर ऑपरेशंस नहीं है जिसने स्पेशल सेल को खबरों में रखा है। राष्ट्रीय राजधानी में आतंकवाद से निपटने के लिए 80 के दशक के अंत में गठित यह यूनिट हाल ही में अन्य कारणों से सुर्खियों में रही है।

अचानक क्यों चर्चा में आया एंटी टेरर यूनिट
पूर्व टॉप पुलिस अफसरों और अतीत में इस यूनिट के शीर्ष पर रहे लोगों ने स्वीकार किया कि जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में प्रक्रियागत खामियों की वजह से एंटी टेरर यूनिट को फटकार लगाई वो शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। सेल के एक पूर्व प्रमुख ने कहा कि दुर्भाग्य से, आज स्पेशल सेल लोककथाओं की तरह ज्यादा नजर आ रहा। एक ऐसी यूनिट जिसका अतीत बेहद सराहनीय रहा हो, उसका इस तरह से ढहते देखना निराशाजनक है।

यूनिट के अफसरों की कभी CIA- मोसाद से भी मिली तारीफ
स्पेशल सेल की स्थिति हमेशा ऐसी नहीं थी। कुछ समय पहले तक, ये सेल न केवल लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चला रहा था, बल्कि शहर में अपराध पर भी नकेल कसने में अहम रोल निभाता रहा। उदाहरण के लिए, 2021 में, स्पेशल सेल ने 18 हत्याओं सहित 46 आपराधिक मामलों को सुलझाया। यूनिट को वीरता के लिए 13 पुलिस पदक और 19 गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन और इंटेलिजेंस मेडल भी मिले। स्पेशल सेल के एक अन्य पूर्व अधिकारी ने कहा, ‘यह यूनिट न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश में आतंकवाद से लड़ने में सबसे आगे थी। ये कश्मीर से लेकर केरल तक ऑपरेशन चला रही थी। इससे जुड़े जासूस बॉर्डर से अलग रहकर भी बेहद सक्रिय थे। सीआईए और मोसाद जैसी संस्थाओं से इसके अफसर प्रशंसा प्राप्त कर रहे थे।

स्पेशल सेल ने सुलझाए संसद हमले समेत कई बड़े केस
इस यूनिट को 2001 के संसद हमला मामले को 36 घंटे के भीतर सुलझाने का श्रेय दिया जाता है। इसने दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में सिलसिलेवार विस्फोटों के पीछे इंडियन मुजाहिदीन के मॉड्यूल का भी सफाया कर दिया था। फिर इस यूनिट के पतन का कारण क्या था? 2022 की सर्दियों में, दो संदिग्ध आतंकवादी, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के रडार पर थे, दिल्ली पहुंचे। उन्होंने कथित तौर पर एक हिंदू व्यक्ति को त्रिशूल टैटू के साथ देखने पर उसका सिर काट दिया। स्पेशल सेल को इस मामले में कोई सुराग नहीं मिला, इसके अफसरों को उन्हें पकड़ने के बाद ही बड़ी साजिश का पता चला। सूत्रों ने बताया कि यह शायद पहला संकेत था कि यूनिट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। यही नहीं संयोग देखिए कि पिछले दो साल में बाजार और आवासीय इलाकों में आईईडी की खोज समेत सभी आतंक से संबंधित मामले अनसुलझे हैं।

इस वजह से एंटी टेरर यूनिट की हालत खराब!
सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल सेल यूनिट के ऐसे हाल की कई वजहें सामने आ रही। यूनिट के भीतर नियंत्रण को लेकर ‘अनावश्यक हस्तक्षेप’, फैसला लेने वालों की ज्यादा संख्या और ऐसे अधिकारियों की पोस्टिंग जो या तो अनुभवहीन हैं या फिर विवादों में शामिल रहे हैं। उनके रैंक छोड़ने का सीमित कार्यकाल बचा होना भी उथल-पुथल के कुछ प्रमुख कारणों में शामिल है। इस यूनिट से जुड़े इंस्पेक्टर ने बताया कि ये यूनिट एक उभरते संकट की दहलीज पर है। कुछ महीनों में दो एसीपी यूनिट में नहीं रहेंगे। कई अच्छे जांचकर्ता पहले ही जा चुके हैं या जाने वाले हैं। डीसीपी रैंक के किसी भी अधिकारी या मौजूदा प्रमुख को आतंकवाद विरोधी यूनिट चलाने का कोई अनुभव नहीं है। एक अन्य सब-इंस्पेक्टर ने कहा कि अगले छह महीनों में दो डीसीपी को पदोन्नति मिलनी है। एकमात्र अनुभवी व्यक्ति एडिशनल कमिश्नर हैं, जिसे मौजूदा डीसीपी मेंसे एक के पदोन्नत होने के बाद दिल्ली से बाहर पोस्ट किया जाना है। यहां काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट से एक एसीपी सहित अधिकारियों को लाने की योजना है।

क्या कहते हैं स्पेशल सेल से जुड़े अधिकारी
पुलिस ने अधिकारियों और अधीनस्थों के बीच एक अलगाव को भी उजागर किया। साल 2000 के आस-पास इससे जुड़े एक पुलिसकर्मी ने कहा कि ‘यह एक ऐसी यूनिट थी जो इसलिए चलती थी क्योंकि डीसीपी या यहां तक कि विशेष सीपी कांस्टेबल के साथ खाने में संकोच नहीं करते थे। वे ऐसा किसी औपचारिकता या फोटो खिंचवाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे दिल से किया करते थे। आज, यहां एक आर्टिफिशियल सौहार्द दिखाई देता है। वहीं संपर्क करने पर स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हम कुछ नहीं कर रहे। हमने हाल ही में कश्मीर में एक ऑपरेशन किया था, जिसकी डिटेल्स अभी तक नहीं बताया गया है। इसके अलावा, दक्षिण भारत में किए गए कुछ ऑपरेशनों में हमारी भूमिका थी। और भी कुछ ऑपरेशन हैं जिनके बारे में बताया नहीं गया है। इसके अलावा, हम सिद्धू मूसेवाला मामले सहित क्राइम से संबंधित अलग-अलग केस में गिरफ्तारियां भी कर रहे हैं।

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