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सबसे पहले किसने बनाया था ‘बटर चिकन’? दिल्ली हाई कोर्ट जल्द सुनाएगा अपना फैसला

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नई दिल्ली

अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं और चिकन प्रेमी हैं तो बटर चिकन को लेकर चल रही जंग के बारे के में जरूर पता होना चाहिए। दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट में बटर चिकन की उत्पत्ति को लेकर दो रेस्टोरेंट चेन के बीच कानूनी जंग चल रही है। अब इस मामले में कोर्ट में नए सबूत पेश किए गए हैं। दरअसल मोती महल और दरियागंज अपनी-अपनी दुकानों को बटर चिकन के असली जन्मदाता होने का दावा कर रहे हैं। जिसको लेकर ही कोर्ट में जनवरी में बहस चल रही है।

2.4 लाख डॉलर का मांगा हर्जाना
लोकप्रिय मोती महल रेस्टोरेंट चेन का कहना है कि उन्हें बटर चिकन के असली जनक होने का खिताब मिलना चाहिए और दरियागंज रेस्टोरेंट चेन को इस दावे को बंद करना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें 2.4 लाख डॉलर हर्जाना भी देना चाहिए। मोती महल का कहना है कि उनके संस्थापक कुंदन लाल गुजराल ने 1930 के दशक में पेशावर (अब पाकिस्तान में) के अपने रेस्टोरेंट में मलाईदार बटर चिकन बनाया था उसके बाद वो दिल्ली आ गए थे।

दरियागंज रेस्टोरेंट ने खारिज किए मोती महल के सारे दावे
वहीं दूसरी तरफ दरियागंज रेस्टोरेंट चेन का कहना है कि मोती महल की ये बटर चिकन बनाने की कहानी सच नहीं लगती है बस इनका इसका मकसद कोर्ट को गुमराह करना है। दरियागंज ने अपने 642 पन्नों के जवाबी दस्तावेज में मोती महल के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। दरियागंज का कहना है कि उनके संस्थापक परिवार के एक दिवंगत सदस्य कुंदन लाल जग्गी ने बटर चिकन की रेसिपी बनाई थी। उस वक्त वो दिल्ली आ चुके थे और वहां के रेस्टोरेंट की रसोई संभाल रहे थे। वहीं उनके दोस्त और पेशावर से साथी रहे गुजराल सिर्फ मार्केटिंग का काम देखते थे।

कोर्ट में पेश की गई वीडियो
बता दें कि दोनों लोग अब दुनिया में नहीं हैं। गुजराल का 1997 में और जग्गी का 2018 में निधन हो गया। कोर्ट में जिन सबूतों को पेश किया गया है उनमें 1930 के दशक की वो ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शामिल है जिसमें दोनों दोस्त पेशावर में दिख रहे हैं। इसके साथ ही कोर्ट में 1949 का पार्टनरशिप एग्रीमेंट, दिल्ली आने के बाद जग्गी का बिजनेस कार्ड और 2017 का वो वीडियो भी शामिल है जिसमें जग्गी बटर चिकन की उत्पत्ति के बारे में बात कर रहे हैं।

29 मई को कोर्ट करेगा अगली सुनवाई
दरियागंज का कहना है कि दोस्ती और पार्टनरशिप के चलते दोनों पक्ष ये दावा कर सकते हैं कि उनके पूर्वजों ने ये डिश बनाई थी। वो इस पूरे विवाद को सिर्फ दो बिजनेसों के बीच की होड़ बताते हैं।मोती महल ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. जज इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को करेंगे। कोर्ट को इस विवाद में ये फैसला सुनाना है कि आखिर बटर चिकन की शुरुआत कहां, कब और किसने की?ब्रांड विशेषज्ञों का कहना है कि बटर चिकन को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ व्यंजनों की सूची में टेस्टएटलस द्वारा 43वां स्थान पर है। ऐसे में ये जानना कि किसने इसे बनाया था, ब्रांड की पहचान के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

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