नई दिल्ली :
चौथे चरण के लिए 13 मई को हुए मतदान में तेलंगाना की हैदराबाद लोकसभा सीट पर सबसे कम 48.48 फीसदी मतदान हुआ था। जबकि सबसे अधिक 87.06 फीसदी मतदान आंध्र प्रदेश की ओंगोल सीट पर हुआ था। इस चरण में 10 राज्यों की 96 लोकसभा सीटों के लिए वोट पड़े थे।भारतीय चुनाव आयोग ने बताया कि चौथे चरण में सभी 96 सीटों पर 69.16 प्रतिशत मतदान हुआ था। वोटिंग टर्नआउट का यह प्रतिशत 2019 में हुए मतदान से थोड़ा सा ही कम है। जो शायद वोटों की गिनती के दिन बराबर हो जाए या फिर आगे भी निकल सकता है। क्योंकि, काउंटिंग वाले दिन ही ऐसे सर्विस वोटर, 85 प्लस और दिव्यांग वोटरों की वोट भी गिनी जाएंगी। जिन्होंने बैलेट पेपर से वोट दिया। 69.16 फीसदी में 69.58 मेल, 68.73 फीमेल और 34.23 फीसदी थर्ड जेंडर ने वोट दिया था।
श्रीनगर में बना मतदान का रिकॉर्ड
96 लोकसभा सीटों में वैसे तो सबसे कम जम्मू-कश्मीरी की श्रीनगर सीट पर 38.49 फीसदी मतदान हुआ था। लेकिन इस अकेली सीट पर 1996 तक पड़ी वोटों की तुलना की जाए तो इस बार 1996 के बाद श्रीनगर सीट पर रिकॉर्ड मतदान हुआ। 1996 में यहां 40.94 फीसदी मतदान हुआ था। इस लिहाज से श्रीनगर सीट का नेचर अलग रहा। इसके अलावा सबसे कम मतदान हैदराबाद में हुआ। इसके बाद दूसरे नंबर पर तेलंगाना की ही सिंकदराबाद सीट रही। जहां 49.04 फीसदी वोट पड़े थे। जबकि सबसे अधिक मतदान होने में आंध्र प्रदेश की ही दो लोकसभा सीट रहीं। जहां ओंगोल में 87.06 और चित्तुर में 85.77 प्रतिशत मतदान हुआ।
सबसे ज्यादा इन तीन राज्यों में हुआ मतदान
वैसे इस चरण में 10 राज्यों की 96 सीटों पर हुए मतदान में आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 80.66 मतदान हुआ। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल 80.22 और तीसरे नंबर पर उड़ीसा 75.68 फीसदी मतदान के रूप में रहा। सबसे कम मतदान होने के रूप में बिहार में 58.21, दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश 58.22 और सबसे कम 62.21 फीसदी मतदान होने के रूप में महाराष्ट्र राज्य रहा। जहां कम मतदान हुआ। गौरतलब है कि चौथे चरण के लिए 10 राज्यों की 96 लोकसभा सीटों में तेलंगाना की सभी 17, आंध्र प्रदेश की सभी 25 सीटों, बिहार की पांच, जम्मू-कश्मीर की एक, झारखंड की चार, मध्य प्रदेश की आठ, महाराष्ट्र की 11, ओडिशा की चार,उत्तर प्रदेश की 13 और पश्चिम बंगाल की आठ सीटों के लिए मतदान हुआ था।
