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Monday, April 27, 2026
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कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स को लेकर बड़ा अपडेट, ICMR ने उठाए BHU की रिपोर्ट पर सवाल

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नई दिल्ली

हाल ही में कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स पर बीएचयू में एक शोध किया गया था। यह रिसर्च एक विदेशी जर्नल में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद मीडिया में कोवैक्सिन के दुष्प्रभावों के बारे में कई रिपोर्टें सामने आईं। एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि जिन 30 फीसदी लोगों को कोवैक्सिन वैक्सीन दी गई, उनमें किसी न किसी तरह का साइड इफेक्ट देखने को मिला। इसके बाद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने इस रिसर्च पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त दी है।

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ राजीव बहल ने अध्ययन के लेखकों और पत्रिका के संपादकों को एक पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने लिखा कि यह शोध पूरी तरह से भ्रामक और गलत तथ्यों पर आधारित है। इसका आईसीएमआर से कोई लेना-देना नहीं है। आईसीएमआर ने कहा कि इसके लिए तकनीकी या वित्तीय सहायता नहीं दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने आईसीएमआर का नाम हटाने के लिए भी कहा है।

आईसीएमआर के महानिदेशक ने जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर शंखशुभ्र चक्रवर्ती और डॉ.उपिंदर कौर को नोटिस जारी कर इस मामले का जवाब देने के लिए कहा है। आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर एसएन शंखवार को भी इसकी एक कॉपी दी गई है। बताया गया है कि प्रोफेसर चक्रवर्ती ने अपने रिसर्च के प्रकाशन में आईसीएमआर की तरफ से वित्तीय और तकनीकी सहयोग करना बताया है।

बीएचयू ने कोवैक्सीन को लेकर किया था शोध
इस महीने की शुरुआत में बीएचयू के शोधकर्ताओं की कोवैक्सीन के साइड इफैक्ट्स को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी। टीका लेने वाले कुछ लोगों में साइड इफैक्ट्स दिखाई दिए थे। इस शोध में करीब 1024 लोगों को शामिल किया गया था। इसमें 635 किशोर और 391 एडल्ट लोग थे। इन सभी से टीका लगवाने के एक साल बाद तक फॉलोअफ चेकअप के लिए संपर्क किया गया।

स्टडी में यह पाया गया कि 304 किशोरों यानी करीब 48 फीसदी में वायरल अपर रेस्पेरेट्री ट्रैक इंफेक्शन्स पाया गया। ऐसी ही समान स्थिति युवाओं में भी नजर आई थी। इसके अलावा 10.5 फीसदी किशोरों में न्यू-ऑनसेट स्कीन एंड सबकुटैनियस डिसऑर्डर जैसी परेशानी देखने को मिली।

10.2 फीसदी लोगों में जनरल डिसऑर्डर यानी आम परेशानी देखने को मिली। 4.7 फीसदी में नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर यानी नसों से जुड़ी परेशानी पाई गई। इसी तरह 8.9 फीसदी युवा लोगों में आम परेशानी, 5.8 फीसदी में मुस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर यानी मांसपेशियों, नसों, जोड़ों से जुड़ी परेशानी भी देखने को मिली और 5.5 में नर्वस सिस्टम से जुड़ी परेशानी देखी गई।

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