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वो पांच कारण जिससे बीजेपी ने भेदा कमलनाथ का अभेद गढ़, 27 साल बाद फिर दोहरा दिया इतिहास

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छिंदवाड़ा

साल था 1980 का कमलनाथ छिंदवाड़ा आए और सांसद का चुनाव लड़ा था। इसके बाद से उनका विजयरथ निरंतर दौड़ता रहा। वर्ष 1996 में कमलनाथ की जगह उनकी पत्नी अल्कानाथ यहां से सांसद बनीं और फिर कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया। 1997 में यहां उपचुनाव हुए बीजेपी ने सुंदरलाल पटवा को कमलनाथ के खिलाफ मैदान में उतारा। कमलनाथ यह चुनाव हार गए। कमलनाथ के राजनीतिक जीवन की यह एक मात्र हार थी। अब बात करते हैं 2024 की। छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में फिर से बीजेपी ने जीत हासिल की है। इस बार उम्मीदवार कमलनाथ नहीं बल्कि उनके नकुलनाथ। हालांकि प्रतिष्ठा कमलनाथ की ही दांव पर थी। बीजेपी की रणनीति ने कांग्रेस का अभेद गढ़ कहे जाने वाले किले को 27 साल फिर से भेद लिया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास की गारंटी, प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की घेराबंदी, प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की रणनीति और स्थानीय उम्मीदवार विवेक साहू की मेहनत ने नकुलनाथ को चुनाव हारा दिया। इस हार के बाद नकुलनाथ ने कहा मैं छिंदवाड़ा छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा। कमलनाथ ने भी कहा कि वह छिंदवाड़ा के लोगों की सेवा करते रहेंगे।

पांच साल पहले से की तैयारी
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मध्य प्रदेश में 28 सीटें मिली थीं। केवल छिंदवाड़ा ही ऐसी सीट थी जहां से कांग्रेस को जीत मिली थी। इसके बा से ही बीजेपी ने टारगेट सेट कर लिया था कि छिंदवाड़ा को जीतना है। 2020 में राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने छिंदवाड़ा पर फोकस करना शुरू कर दिया था। 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने लंबे समय से मांग रही पाढुर्ना को जिला बनाकर छिंदवाड़ा से अलग कर दिया। केन्द्रीय मंत्रियों के दौरे तेज हो गए।

कमलनाथ नहीं नकुलनाथ को किया टारगेट
पूरे लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने परिवारवाद और नकुलनाथ को टारगेट किया। बीजेपी यह जानती थी कि अगर कमलनाथ को टारगेट किया जाएगा तो नुकसान होगा। इसलिए उन्होंने नकुलनाथ को टारगेट किया। इसके साथ ही मोदी की गांरटी और प्रदेश सरकार की उफलब्धियों को जनजन तक पहुंचाया।

कैलाश विजयवर्गीय की रणनीति ने किया काम
छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में जीत के लिए बीजेपी ने राज्य के माहिर रणनीतिकार माने जाने वाले कैलाश विजयवर्गीय को जिम्मेदारी सौंपी। जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने सबसे पहले पार्टी के उन नेताओं को मनाया जो पार्टी से नाराज चल रहे थे। कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी के सीनियर नेताओं को मनाया। इसके अलावा बड़ी संख्या में बीजेपी में कांग्रेस नेताओं की ज्वाइनिंग कराई जिसके बाद से लोगों में यह मैसेज गया कि कांग्रेस में कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

मोहन यादव ने लगातार किया कैंपेन
छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव को जीतने के लिए बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने खूब कैंपेन किया। सीएम मोहन यादव ने लगातार छिंदवाड़ा में रैलियां की। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी जमकर रैली की। वहीं, कांग्रेस की कमान अकेले कमलनाथ और नकुलनाथ ही संभाले रहे।

स्थानीय नेता पर लगाया दांव
विवेक साहू को बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा विधानसभा सीट से कमलनाथ के खिलाफ उतारा था। विवेक साहू अपना चुनाव हार गए। उसके बाद अटकलें लगाई जानें लगीं कि छिंदवाड़ा से नकुलनाथ की जगह शिवराज सिंह चौहान को मैदान उतारा जाए लेकिन संगठन ने तय किया बड़े चेहरे को उतारने से नकुलनाथ का कद बढ़ेगा इससे स्थानीय चेहरे पर दांव लगाया जाए और उसके लिए मेहनत की जाए।

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