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क्या महायुति में अब अजित पवार कुछ दिनों के मेहमान हैं? जानिए क्यों लग रही हैं ऐसी अटकलें

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मुंबई:

सालभर पहले महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल लाने वाले अजित पवार क्या अब अकेले पड़ते जा रहे हैं? विधानसभा चुनावों के लिए आगे बढ़ रहे महाराष्ट्र में इन दिनों यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुखपत्र द ऑर्गनाइजर में बीजेपी की हार के लिए अजित पवार को जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद कुछ ऐसी प्रतिक्रिया शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना की है। टाइम्स नाउ को सूत्रों से मिली जानकारी में सामने आया है कि स्थानीय बीजेपी नेताओं और शिवसेना के सदस्यों का मानना है कि अजीत पवार के महायुति में शामिल होने से कोई लाभ नहीं हुआ है, बल्कि इससे परेशानी ही पैदा हुई है। महायुति में अजित पवार के लिए पहले वाली स्थिति नहीं हर गई है।

पांच लोकसभा सीटों पर मिली हार
इन नेताओं का कहना है कि अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के विधायकों के इलाकों में भी बीजेपी और शिवसेना के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। शिवसेना नेता डिंडोरी, माढा, सोलापुर, मावल और शिरुर लोकसभा सीटों पर महायुति की हार के लिए अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका कहना है कि बीजेपी और सीएम शिंदे के उम्मीदवारों को अजीत पवार के खेमे से जुड़े विधायकों से समर्थन नहीं मिला। अजित पवार पिछले साल 2 जुलाई को अपने चाचा शरद पवार को छोड़कर महायुति में आए थे। इसके बाद वह सरकार में उप मुख्यमंत्री बने थे। अजित पवार के साथ 40 विधायकों ने शरद पवार का साथ छोड़ दिया था।

निशाने पर हैं अजित पवार
लोकसभा चुनावों में महायुति की कारारी हार के बाद बीजेपी और शिवसेना के साथ वैसे तो एनसीपी में भी आत्ममंथन का दौर चला रहा है, लेकिन बीजेपी और शिवसेना के नेता अंदरखाने अजित पवार को महायुति में रखने का विरोध कर रहे हैं। आरएसएस से जुड़े ‘ऑर्गनाइजर’ में रतन शारदा ने साफ लिखा था कि बीजेपी ने बिना किसी जरूरत के अजित पवार को साथ लेकर अपनी ब्रांड वैल्यू कम कर ली थी। हालांकि आरएसएस की इस टिप्पणी का पार्टी के नेता छगन भुजबल ने विरोध किया था और कहा कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में क्यों हार गई? वहां पर तो अजित पवार फैक्टर नहीं था। छगन भुजबल ने कहा था कि बीजेपी को अबकी बार 400 पार नारा भारी पड़ा? भुजबल ने कहा था कि यही बात एकनाथ शिंदे कह रहे हैं।

सुनेत्रा की हार से गिरी साख
अजित पवार की एनसीपी राज्य में 4 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इसमें पार्टी सिर्फ एक सीट पर जीत पाई है। रायगढ़ लोकसभा सीट से पार्टी के नेता सुनील तटकरे जीते हैं। अजित पवार को सबसे बड़ा झटका बारामती में लगा है। यहां से उन्होंने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को उतारा था। वे चुनाव हार गईं। अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में उतारा है। जिसमें उनकी जीत का औपचारिक ऐलान बाकी है। कहा जा रहा है कि अजित की पत्नी सुनेत्रा केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह पा सकती है। मोदी 3.0 में एनसीपी को एक राज्य मंत्री की पोस्ट ऑफर की गई थी। सुनेत्रा पवार ने राज्य मंत्री बनने की इच्छा व्यक्त की है।

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