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राहुल गांधी ही बताएं कि बजट तैयार करने में कोई दलित अधिकारी क्यों नहीं, किसने किया ये सवाल

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नई दिल्ली

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार पर हिंदुस्तान को अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में फंसाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी गठबंधन इंडिया इस चक्रव्यूह को तोड़ेगा। उन्होंने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि 20 अफसरों ने देश का बजट बनाने का काम किया है। इनमें से सिर्फ एक अल्पसंख्यक, एक ओबीसी हैं और कोई भी दलित आदिवासी अधिकारी नहीं है। राहुल गांधी ने बजट से पहले की हलवा वाली रस्म का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इस सरकार में दो-तीन प्रतिशत लोग ही हलवा तैयार कर रहे हैं और उतने ही लोग हलवा खा रहे हैं। राहुल गांधी के संसद में दिए इस बयान पर दलित चिंतक दिलीप मंडल ने कांग्रेस पर निशाना साधा और पूछा कि ऐसा क्यों है।

दिलीप मंडल ने ट्वीट करते हुए कहा कि बजट हलवा तस्वीर में राहुल गांधी एससी, एसटी और ओबीसी अधिकारियों को खोज रहे हैं। वह दुखी हैं क्योंकि वहां कोई नहीं। यह सत्य बात लेकिन तथ्यों की जांच करना भी जरूरी है। आईएएस अधिकारी पांडे, सेठ और सोमनाथन 1987 बैच से हैं, जोशी 1989 से हैं, और मल्होत्रा 1990 से हैं। तस्वीर में दिख रहे सभी पांच आईएएस अधिकारी 27% ओबीसी कोटा युग के पहले के हैं इसलिए यह ऊंची जाति क्लब जैसा दिखता है।

दिलीप मंडल ने आगे लिखा कि राहुल को सवाल करना चाहिए कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सरकारों (1980-89) ने मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू क्यों नहीं किया, जिसे 1980 से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। 1990 में केंद्र में गैर-कांग्रेस, भाजपा समर्थित सरकार आने तक 27% ओबीसी कोटा क्यों लागू नहीं किया गया। अदालती मामलों के कारण, ओबीसी कोटा अंततः 1993 में लागू हुआ।

दिलीप मंडल ने आगे लिखा कि ऐसा लगता है कि 1993 बैच के किसी भी अधिकारी को हलवा समारोह में शामिल होने की वरिष्ठता हासिल नहीं हुई है। संविधान में अनुच्छेद 340 है। ओबीसी कोटा 1950 से लागू किया जाना चाहिए था। ओबीसी कोटा पर कांग्रेस पार्टी की देरी उन कारणों में से एक थी, जिनके कारण डॉ. आम्बेडकर ने नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। ओबीसी कोटा में विश्वासघात का इतिहास रहा है।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दिलीप मंडल ने कहा कि इसलिए हमारे पास शीर्ष पर ओबीसी अधिकारी नहीं हैं। हमारे पास उन बैचों के वरिष्ठ एससी, एसटी अधिकारी क्यों नहीं हैं। मनमोहन सिंह के दौर में नागराज फैसले पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। एससी, एसटी और ओबीसी बहुत पहले पैदा हुई समस्याओं के कारण पीड़ित हैं। ये विरासत के मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आशा है कि वर्तमान सरकार इस विसंगति और अन्याय को ठीक करने के लिए कदम उठाएगी।

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