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डीएम ने मुझे कमरे में आकर बैठने को कहा… पूजा खेडकर के वकील ने कोर्ट को क्या बताया

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नई दिल्ली

दिल्ली की एक अदालत धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में आरोपी ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत अर्जी पर एक अगस्त को फैसला सुना सकती है। सुनवाई के दौरान खेडकर ने अदालत से कहा कि एक अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जंगला ने बुधवार को खेडकर द्वारा दायर अर्जी पर दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। खेडकर ने अपने वकील के माध्यम से दायर अर्जी में दावा किया कि उन्हें गिरफ्तारी का खतरा है। अभियोजन पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि उन्होंने व्यवस्था को धोखा दिया है।

कार्यवाही के दौरान, खेडकर ने कहा कि वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्रिम जमानत चाहती हैं। खेडकर की ओर से पेश वकील बीना महादेवन ने अदालत से कहा, मैंने (खेडकर ने) यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है, इसीलिए मेरे खिलाफ यह सब हो रहा है। यह सब जिलाधिकारी के इशारे पर हो रहा है, जिनके खिलाफ मैंने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। उस व्यक्ति ने मुझे एक निजी कमरे में आकर बैठने को कहा। मैंने कहा कि मैं एक योग्य आईएएस हूं और मैं ऐसा नहीं करूंगी। मैं अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्रिम जमानत का अनुरोध कर रही हूं।

महादेवन ने अदालत को बताया कि खेडकर ने कोई जानकारी नहीं छिपाई तथा उन्होंने परीक्षा में शामिल होने की संख्या गलत बताई है। उन्होंने कहा, मैंने पांच लिखा था, लेकिन मुझे 12 लिखना चाहिए था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैंने अलग कोटे के तहत उन (परीक्षा में बैठने के) प्रयासों का लाभ उठाया। यह सद्भावना से किया गया था या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। वकील ने यह भी कहा कि जांच के तहत खेडकर को कई अधिकारियों ने बुलाया है।

उन्होंने कहा, आईएएस अकादमी मसूरी ने मुझे (खेडकर को) बुलाया है, पुणे आयुक्त ने मुझे बुलाया है। डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) ने भी मुझे नोटिस दिया है। मुझे इन सभी मंचों पर अपना बचाव करने के लिए अग्रिम जमानत की आवश्यकता है। वकील ने कहा कि इस मामले के बाद से मीडिया खेडकर को निशाना बना रहा है, लेकिन वह एक बार भी मीडिया के पास नहीं गईं क्योंकि उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है।

अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि खेडकर ने खामियों का फ़ायदा उठाया और अपना नाम बदल लिया। लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा, हम अभी (जांच के) बहुत प्रारंभिक चरण में हैं। हमें उनसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है। अदालत ने जब पूछा कि यदि जांच प्रारंभिक चरण में है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की जल्दी में क्यों है, तो श्रीवास्तव ने कहा, यदि उन्हें अग्रिम जमानत मिल जाती है तो वह सहयोग नहीं करेंगी।

श्रीवास्तव ने कहा, ओबीसी कोटे में क्रीमी लेयर और नॉन-क्रीमी लेयर की अवधारणा है। उनके (खेडकर के) पिता ने 53 करोड़ रुपये की अपनी संपत्ति घोषित की है। इससे बचने के लिए उन्होंने दावा किया कि उनके माता-पिता का तलाक हो चुका है और वह अपनी मां के साथ रहती हैं। यह भी जांच का हिस्सा है। हम मेडिकल दस्तावेजों की भी जांच करेंगे।

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