नई दिल्ली
दिल्ली में मानसिक रूप से बीमार बच्चों के लिए चल रहे सरकारी शेल्टर होम में पिछले महीने अचानक मौतों में इजाफा का मुद्दा गरमा रहा है। दिल्ली सरकार के ‘आशा किरण’ शेल्टर होम में जुलाई में 14 बच्चों की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने पूरे मामले की मैजिस्ट्रेट जांच और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। दूसरी तरफ, बीजेपी ने इसे लेकर दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी पर हमला बोला है। बीजेपी महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया है कि शेल्टर होम में बच्चों को गंदा पानी दिया जा रहा है। उन्हें खाना नहीं दिया जा रहा और न ही इलाज मुहैया कराया जा रहा है। गुप्ता ने जुलाई में 17 बच्चों की मौत का दावा करते हुए आरोप लगाया कि सच छिपाने के लिए शेल्टर होम में किसी को जाने नहीं दिया जा रहा।
मामले को तूल पकड़ता देख दिल्ली की मंत्री आतिशी ने ‘आशा किरण’ शेल्टर होम में हुई कई मौतों की मैजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। दिल्ली सरकार की एक रिलीज के मुताबिक, मंत्री की तरफ से दिए गए आदेश में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने को भी कहा गया है।
रिलीज में कहा गया है, ‘एसीएस, राजस्व को तुरंत पूरे मामले की मैजिस्ट्रेट जांच शुरू करने और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया जाता है।’ इसमें आगे कहा गया है कि आशा किरण शेल्टर होम में हुई 14 मौतें स्वास्थ्य समस्याओं और कुपोषण के कारण हुईं, क्योंकि बच्चों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही थीं।
दिल्ली सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, ‘दिल्ली जैसे महानगर में ऐसी बुरी खबर सुनकर बहुत धक्का लगा है और अगर यह सच पाया गया तो हम इस तरह की चूक बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इसकी गहन जांच की जानी चाहिए ताकि सभी ऐसे शेल्टर होम की स्थिति में सुधार के लिए पूरी व्यवस्था में सुधार के लिए कड़े कदम उठाए जा सकें और कैदियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकें।’
दिल्ली सरकार ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। इस घटना ने बता दिया है कि मानसिक रूप से दिव्यांग लोगों के लिए सरकारी शेल्टर होम में बुनियादी सुविधाओं की कमी कितने गंभीर स्तर पर पहुंच गई है।
इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेख गुप्ता ने कहा, ‘आशा किरण दिल्ली सरकार की यूनिट है जहां दिव्यांग लोगों को रखा जाता है। उनकी देखभाल के नाम पर ये शेल्टर चल रहा है। परंतु इस शेल्टर में लगातार मौतें हो रही हैं। इस साल अबतक 27 बच्चों की मौत हो चुकी है। जुलाई महीने में ही हमारी जानकारी के मुताबिक 17 बच्चों की मौत हो चुकी है। अखबार में बस 13 मौत की बात आई है। कारण प्रशासन बता नहीं रहा। एसडीएम की इन्क्वॉयरी क्या कह रही है, कुछ पता नहीं चल रहा। खुद गेट बंद करके सभी अधिकारी बैठे हैं। किसी को अंदर जाने नहीं दिया जा रहा। हम सामाजिक लोग हैं, जनप्रतिनिधि हैं, हमें तक अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। हमें जानकारी मिली है कि बच्चों को गंदा पानी दिया जा रहा है। उन्हें भोजन नहीं मिलता। उन्हें अनाज नहीं मिलता और आखिरकार अस्पताल में दम तोड़ रहे हैं बच्चे। दोषी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का केस चलना चाहिए।’
AAP का बीजेपी पर निशाना
दिल्ली के आशा किरण में हुई रहस्यमी मौतों के मामले पर दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने कहा, ‘भाजपा प्रदर्शन करने पहुंच रही है लेकिन मां-बेटे की मौत पर प्रदर्शन करने के लिए मयूर विहार नहीं गई, भागकर आशा किरण पहुंच गई क्योंकि उनको पता है कि वो दिल्ली सरकार के अधीन आता है. इस मामले में संबंधित मंत्री क्लोजली मॉनिटर कर रहे हैं. दोषी लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा. दिल्ली सरकार लोगों के साथ खड़ी है.’
पहले भी हो चुकी हैं यहां मौतें
इससे पहले भी कई बार इसी तरह से मौतें हुई थी, तब खूब हो-हल्ला हुआ था. अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी. पहले एक-दो या फिर ज्यादा से ज्यादा 10 मौतें हुई थी. लेकिन इसबार मामला एक महीने के भीतर 13 मौतों का है. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ना मिलने का हवाला दिया जा रहा है. लेकिन एसडीएम का भी मानना है कि मौत की वजह खराब पानी हो सकता है. हालांकि, अब आशा किरण होम में व्यवस्था ठीक होनी की बात कही है.
जिस सरकारी संस्थान से उम्मीद की जाती है, कि वो लोगों के कल्याण के लिए काम करेंगे, वहीं इस तरह के घटनाक्रम डरावनी स्थिति पैदा करते हैं. वैसे बच्चों की मौत को लेकर कार्रवाई की बात कही जा रही है, माना की दोषिय़ों पर एक्शन तो होगा, लेकिन जिन बच्चों की मौत लापरवाही की वजह से हुई है. वो तो लौटकर नहीं आ सकते. और क्या प्रशासन इस बात की गारंटी दे सकता है कि भविष्य में इस तरह से किसी बच्चे की मौत नहीं होगी.
SDM का बयान
रोहिणी के एसडीएम मनीष वर्मा ने बताया, ‘जैसे ही इसकी खबर आई तो हमने तुरंत तहकीकात शुरू की. जो जानकारी आई वो बिल्कुल सत्य है. जो मृत्यु दर है वो पिछले महीनों और पिछले साल की तुलना में ज्याादा हुई है. हमने इसके बारे में जब वहां के देखरेख करने वाले डिप्टी डायरेक्टर से पूछा तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि संख्या ज्यादा है. चूंकि अभी बच्चों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है तो असली कारण क्या है वो नहीं बता पाए. रिपोर्ट आने के बाद वो बताएंगे. हमने उनको सजेस्ट किया है कि वो पानी की जांच करवाएं, वाटर फिल्टर बदलवाएं और खाने-पीने को पहले टेस्ट करें उसके बाद ही उन्हें सर्व करें. इन सब चीजों पर उन्होंने गौर किया है और बताया है कि सारे एक्वागार्ड बदल दिए गए हैं.’
