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151 मौजूदा सांसदों, विधायकों के खिलाफ महिला अपराध के केस, जानें किस दल से कितने माननीय हैं शामिल

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नई दिल्ली

कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच महाराष्ट्र के बदलापुर कांड ने भी पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। लोग सड़क पर उतर कर कड़े कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन जिस संसद के पास कानून बनाने की अधिकार हैं, वहां सैकड़ों ऐसे सांसद हैं, जिनपर महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े केस चल रहे हैं। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 151 मौजूदा सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं। इनमें से एक तिहाई से ज्यादा यानी 54 बीजेपी से जुड़े हैं।

151 सांसद-विधायकों पर महिलाओं से जुड़े अपराध के केस
यह रिपोर्ट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) ने तैयार की है। रिपोर्ट में 4,809 में से 4,693 सांसदों और विधायकों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया गया। इनमें 775 में से 755 सांसद और 4,693 में से 4,033 विधायक शामिल हैं। विश्लेषण में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 16 मौजूदा सांसदों और विधायकों पर बलात्कार के आरोप हैं। इनमें से 2 सांसद हैं। जिन नेताओं पर महिलाओं से जुड़े अपराध के मामले दर्ज हैं उन 151 में से 16 मौजूदा सांसद हैं और 135 मौजूदा विधायक हैं।

किस पार्टी के कितने नेताओं के खिलाफ मामले?
एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के नेता महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित 54 मामलों के साथ पहले नंबर पर हैं। इसके बाद कांग्रेस के 23 और टीडीपी के 17 नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज हैं। बीजेपी और कांग्रेस के पांच-पांच सांसदों और विधायकों पर बलात्कार के आरोप हैं। आम आदमी पार्टी, बीएपी, एआईयूडीएफ, तृणमूल कांग्रेस और टीडीपी के एक-एक सांसद या विधायक पर बलात्कार के आरोप हैं।

कौन सा राज्य आगे?
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल 25 मामलों के साथ उन राज्यों में सबसे आगे है जहां महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों की घोषणा करने वाले मौजूदा सांसदों और विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा है। आंध्र प्रदेश 21 के साथ दूसरे और ओडिशा 17 मौजूदा सांसदों और विधायकों के साथ आरोपों का सामना कर रहे हैं। 151 में से 16 मौजूदा सांसद/विधायक ने बलात्कार से संबंधित मामलों की घोषणा की है, जिनमें से दो मौजूदा सांसद हैं और 14 मौजूदा विधायक हैं।

चुनावी हलफनामे में देनी होती है जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में यह अनिवार्य कर दिया था कि राजनीतिक दलों को सार्वजनिक रूप से यह बताना होगा कि वे आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को क्यों टिकट दे रहे हैं। एडीआर ने सिफारिश की थी कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, ADR ने सिफारिश की है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ अदालती मामलों को तेजी से निपटाया जाना चाहिए और एक तय समय सीमा के भीतर उनका समाधान किया जाना चाहिए, पुलिस जांच की निगरानी अदालतों द्वारा की जानी चाहिए। मतदाताओं से यह भी आग्रह किया जाता है कि वे ऐसे उम्मीदवारों का चुनाव करने से बचें, जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों और अन्य गंभीर अपराधों से संबंधित स्व-घोषित मामलों की घोषणा की हो।

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