नई दिल्ली:
वेज और नॉन-वेज थाली सस्ती हो गई है। क्रिसिल एमआईएंडए रिसर्च की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त में वेज और नॉन-वेज, दोनों तरह की थाली की कीमत में कमी आई है। इस बार थाली की कीमत में पिछले महीने के मुकाबले और पिछले साल अगस्त के मुकाबले भी कमी देखी गई है। थाली की कीमत में कमी आने का कारण रिटेल महंगाई में कमी आना रहा है। वहीं टमाटर की कीमत में कमी आने से भी थाली की कीमत में कमी आई है।
सालाना इतनी कम हो गई थाली की कीमत
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक सालाना आधार पर घर में पकाई गई वेज थाली की कीमत में 8 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं नॉन-वेज थाली की कीमत में 12 फीसदी की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक साल-दर-साल वेज थाली की कीमत में कमी मुख्य रूप से टमाटर की कीमतों में 51 फीसदी की गिरावट के कारण हुई। अगस्त में वेज थाली की कीमत में टमाटर की हिस्सेदारी 14 फीसदी थी। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों से ताजा आवक के कारण अगस्त 2023 में कीमतें 102 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर अगस्त 2024 में 50 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई थीं।
एलपीजी के कारण भी आई कमी
एलपीजी की कीमत में कमी होने से भी थाली की कीमत में कमी आई है। सालाना आधार पर एलपीजी की कीमत में करीब 27 फीसदी की गिरावट आई है। इस साल मार्च में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 803 रुपये थी। वहीं पिछले साल अगस्त में इसकी कीमत करीब 1103 रुपये थी। इससे भी थाली की कीमत में कमी आई है।
ये कारण भी रहे सस्ती थाली के
- अगस्त में पिछले एक साल के मुकाबले वनस्पति तेल, मिर्च, जीरा आदि की कीमतों में भी
- गिरावट देखी गई। वेज थाली में इन चीजों का करीब 5 फीसदी हिस्सा होता है।
- नॉन-वेज थाली की लागत में गिरावट ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में साल-दर-साल 13 फीसदी
- गिरावट के कारण हुई। यह कुल लागत का लगभग 50 फीसदी है।
एक महीने में इतनी हुई कमी
रिपोर्ट के मुताबिक मासिक आधार पर वेज थाली की कीमत में 4 फीसदी और नॉन-वेज थाली की कीमत में 3 फीसदी की कमी आई है। महीने-दर-महीने यह गिरावट मुख्य रूप से टमाटर की कीमतों में आई कमी के कारण हुई। अगस्त में टमाटर की कीमत जुलाई के मुकाबले 23 फीसदी कम हो गई थी। वहीं अगस्त में सावन महीने के कारण ब्रॉयलर चिकन की खपत में कमी के चलते भी नॉन-वेज थाली की कीमत में कमी आई। इस दौरान ब्रॉयलर चिकन की कीमत में एक से तीन फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, आलू और प्याज की कीमतों में 2 से 3 फीसदी की मासिक वृद्धि रही। इसके कारण थाली की लागत में भारी गिरावट नहीं हो पाई।
