नई दिल्ली,
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को एक ‘गेम चेंजर’ बताते हुए उन राज्यों से अपील की है जो अभी तक इसे नहीं अपना पाए हैं. उन्होंने कहा कि एनईपी सभी भाषाओं को महत्व देती है और देश के युवाओं को अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग करने का मौका देती है. रविवार को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में धनखड़ ने कहा, “शिक्षा एक ऐसा खजाना है जिसे कोई छीन नहीं सकता.” उन्होंने सभी से कम से कम एक व्यक्ति को साक्षर बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया.
दरअसल, केंद्र सरकार 2020 में नई शिक्षा नीति लेकर आई थी, जिसके तहत नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के 800 पन्नों के मसौदे में कुछ प्रमुख बदलावों का प्रस्ताव स्कूली शिक्षा के चार चरण हैं. इनमें 5 (फाउंडेशनल) +3 (प्रिपरेट्री) +3 (मिडिल)+ 4 (सेकेंडरी) स्टेज शामिल है. जारी किए गए मसौदे में भारत में कक्षा 1 से 12वीं तक बच्चे कैसे पढ़ेंगे, क्या सीखेंगे, कैसे सीखेंगे, छात्रों की प्रतिभा का मूल्यांकन कैसे होगा आदि कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं.
NEP को लेकर उपराष्ट्रपति की राज्यों से अपील
उपराष्ट्रपति ने उन राज्यों से फिर से सोचने की अपील की है, जिन राज्यों ने अभी तक शिक्षा नीति (एनईपी) को नहीं अपनाया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह नीति देश के लिए गेम चेंजर है. उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे युवाओं को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का पूरा दोहन करने का अधिकार देती है, जिसमें सभी भाषाओं को उचित महत्व दिया गया है.”
साक्षरता को बढ़ावा देने का आह्वान
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, “शिक्षा एक ऐसी चीज है जिसे कोई चोर आपसे नहीं छीन सकता. कोई सरकार इसे आपसे नहीं छीन सकती. न तो रिश्तेदार और न ही दोस्त इसे आपसे छीन सकते हैं. इसमें कोई कमी नहीं आ सकती. यह तब तक बढ़ती रहेगी और बढ़ती रहेगी जब तक आप इसे साझा करते रहेंगे.” उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि अगर साक्षरता को जुनून के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो भारत फिर से नालंदा और तक्षशिला जैसा शिक्षा का केंद्र बन सकता है.
कम से कम एक व्यक्ति को करें साक्षर करें: उपराष्ट्रपति
उन्होंने कहा, “जब हम किसी को साक्षर बनाते हैं, तो हम उस व्यक्ति को खुद को खोजने में मदद करते हैं, हम उसे गरिमा का एहसास कराते हैं, हम निर्भरता को कम करते हैं, हम स्वतंत्रता पैदा करते हैं. यह व्यक्ति को खुद की मदद करने में योग्य बनाता है. यह हाथ थामने का एक सबसे अच्छा तरीका है.” उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति को शिक्षित करके आप जो खुशी और आनंद का अनुभव करते हैं, चाहे वह पुरुष हो, महिला हो, बच्चा हो या लड़की, वह असीम है. उन्होंने कहा, “आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि इससे आपको कितनी खुशी मिलेगी. यह मानव विकास में आपकी ओर से की जा सकने वाली सबसे बड़ी उपलब्धि होगी.”
मातृभाषा का महत्व
मातृभाषा के विशेष महत्व पर बात करते हुए धनखड़ ने कहा कि यह वह भाषा है जिसमें हम सपने देखते हैं. धनखड़ ने भारत की अद्वितीय भाषाई विविधता पर जोर दिया और कहा, “दुनिया में भारत जैसा कोई देश नहीं है. जब भाषा की समृद्धि की बात आती है तो हम कई भाषाओं के साथ एक अद्वितीय राष्ट्र हैं.” राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने अनुभवों पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, “मैं सदस्यों को 22 भाषाओं में बोलने का मौका देता हूं. जब मैं उन्हें उनकी भाषा में बोलते हुए सुनता हूं, तो मैं अनुवाद सुनता हूं, लेकिन उनकी बॉडी लैंग्लेज ही मुझे बता देती है कि वे क्या कह रहे हैं.” उन्होंने भारतीय संस्कृति में ‘ऋषि परंपरा’ के गहन महत्व पर भी बात की. इस अवसर पर शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव संजय कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे.
किन राज्यों में NEP पर चल रहा काम
उत्तराखंड में 12 जुलाई, 2022 को नई शिक्षा नीति लागू की गई थी. यह देश का पहला राज्य था जिसने विद्यालयी शिक्षा के अंतर्गत प्राइमरी एजुकेशन में नई शिक्षा नीति को लागू किया. इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 26 अगस्त, 2021 को राज्य में नई शिक्षा नीति लागू की थी. पिछले साल 13 सितंबर 2024 को उत्तर प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं. इसके तहत, स्कूलों में सप्ताह में सिर्फ़ 29 घंटे ही पढ़ाई होगी. वहीं, कर्नाटक ने नई शिक्षा नीति को लागू करने से मना कर दिया है. कर्नाटक में राज्य शिक्षा नीति लागू की जाएगी.
