नई दिल्ली,
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आज जीएसटी काउंसिल की 54वीं बैठक होने जा रही है. इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है और फैसले लिए जा सकते हैं. 2000 रुपये से कम के छोटे ट्रांजैक्शंस और ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स के साथ ही एक अहम मुद्दे पर विचार किए जाने की पूरी संभावना है, जिसे लेकर केंद्र की मोदी 3.0 सरकार में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी चिंता जाहिर कर चुके हैं. हम बात कर रहे हैं लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाले टैक्स की, जिसमें कटौती को लेकर आज विचार किया जा सकता है.
नितिन गडकरी कही थी ये बड़ी बात
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में सोमवार को होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठ में सबसे ज्यादा नजर स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर लगने वाले 18% जीएसटी को कम करने से संबंधित ऐलान पर है. इसे लेकर आम से लेकर खास तक की ओर से मांग की जा चुकी है. बीते 28 जुलाई 2024 को केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने भी एक पत्र लिखकर वित्त मंत्री से लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस पर लागू जीएसटी (GST On Insurance) हटाने की मांग की थी. उन्होंने इस टैक्स को ‘जिंदगी की अनिश्चितताओं पर टैक्स लगाने जैसा’ करार दिया है.
सीतारमण को लिखे अपने पत्र में गडकरी ने कहा था कि नागपुर मंडल जीवन बीमा निगम कर्मचारी संघ ने इन मुद्दों पर उन्हें ज्ञापन सौंपा है. संघ का मानना है कि लोगों को इस जोखिम के खिलाफ कवर खरीदने के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसी तरह, मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18 फीसदी जीएसटी बिजनेस के इस क्षेत्र के विकास के लिए बाधक साबित हो रहा है, जो सामाजिक रूप से जरूरी है.
GST घटाने से पॉलिसीहोल्डर्स को फायदा?
नितिन गडकरी की मांग को अगर आज होने जा रही GST Council की बैठक में मान लिया जाता है, तो फिर लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस सस्ते हो सकते हैं, क्योंकि इंश्योरेंस पर जीएसटी आपके प्रीमियम की राशि में इजाफा करता है और आपको ज्यादा खर्च करना पड़ता है. लेकिन क्या इसका फायदा पॉलिसीहोल्डर्स को मिलेगा, ये सवाल भी उठ रहा है. दरअसल, बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में ये चिंता जाहिर की गई है कि अगर काउंसिल जीएसटी में कटौती करती है, तो बीमाकर्ता ग्राहकों को राहत देने बजाय वित्तीय लाभ अपने पास रख सकते हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर जीएसटी की दर 18 से घटकर 5 फीसदी किए जाने पर विचार हो सकता है.
फाइनेंशियल सर्विस के तौर पर लगता है GST
1 जुलाई 2017 में पूरे देश में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने भारत के टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है और तब से पूरे देश में अलग-अलग कर की जगह एक ही कर लगाया जाता है. GST के एक अप्रत्यक्ष कर होता है, जो कि घरेलू उत्पाद, कपड़े, उपभोक्ता वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन, रियल एस्टेट के साथ ही सेवाओं पर लगाया जाता है. बीमा को भी एक फाइनेंशियल सर्विस मानते हुए इस कैटेगरी में शामिल किया जाता है. टर्म इंश्योरेंसऔर मेडिकल इंश्योरेंस दोनों पर एक समान 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगता है.
कैसे आपकी जेब का खर्च बढ़ाता है प्रीमियम
टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस की बात करें, तो इसके लिए जीएसटी कुल प्रीमियम राशि पर लागू किया जाता है. इसे उदाहरण के तौर पर समझें, तो अगर आप कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं और इसका कवरेज 5 लाख रुपये है, तो प्रीमियम लागत करीब 11,000 रुपये साल होती है. अब इसपर 18 फीसदी की दर से जो जीएसटी लगाया जाता है, उसका कैलकुलेशन करें तो [11000/(100 + 18%)] यानी अपने हर प्रीमियम पर आपको 1980 रुपये का अतिरिक्त भुगतान जीएसटी के रूप में करना होता है और आपका प्रीमियम 12,980 रुपये हो जाता है. इस तरीके से जीएसटी लागू होने के बाद टर्म पॉलिसी (Term Policy) खरीदने वाले पॉलिसी खरीदारों को अधिक प्रीमियम राशि का पेमेंट करना पड़ता है.
जीएसटी से पहले लगता था इतना टैक्स
बता दें, इंश्योरेंस पर जीएसटी लागू होने पर 15% टैक्स लगता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद 1 जुलाई 2017 से 18% वसूला जा रहा है. टैक्स दर में 3% की इस बढ़ोतरी से इंश्योरेंस पॉलिसियों के प्रीमियम पर सीधा असर पड़ा है, जिससे प्रीमियम की कीमतें बढ़ गईं. यहां बता दें कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स घटाए जाने पर चर्चा के साथ ही इससे मिलने वाले रेवेन्यू पर पड़ने वाले साइड इफेक्ट पर भी विचार किया जा सकता है. दरअसल, वित्त वर्ष 2023-24 में केंद्र और राज्यों ने 8,262.94 करोड़ रुपये हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के जरिए कमाए थे. इसके अलावा हेल्थ री-इंश्योरेंस प्रीमियम से उन्हें 1,484.36 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी.
