नई दिल्ली
तारीख- 10 सितंबर 2024, वक्त दोपहर के लगभग तीन बजे और जगह दिल्ली का हाईकोर्ट परिसर। लोगों के बीच एक अलग ही हलचल थी। वकीलों में भी सुगबुगाहट हो रही थी। खचाखच भरी अदालत में सुनवाई होनी थी एक ऐसे मामले में राहत देने की याचिका पर, जिसमें दोषी को 24 साल जेल की सजा सुनाई जा चुकी थी। अचानक हलचल बढ़ती है और कोर्ट के अंदर से खबर आती है कि अदालत ने किसी तरह की राहत नहीं दी है। दोषी को सलाखों के पीछे ही रहना होगा और काटनी होगी 24 साल की लंबी सजा। हलचल के बीच पता चलता है कि इस दोषी का नाम है सोनू पंजाबन।
सोनू पंजाबन, जिसका असली नाम गीता अरोड़ा है। वही सोनू पंजाबन, जो कभी लेडी डॉन के नाम से कुख्यात रही और जिसने दिल्ली-एनसीआर के भीतर देह व्यापार का सबसे बड़ा रैकेट चलाया। 22 जुलाई 2020 को कोर्ट ने सोनू पंजाबन को एक नाबालिग लड़की को जबरन देह व्यापार में धकेलने पर POCSO एक्ट के तहत दोषी माना और उसे 24 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सोनू पंजाबन को सभ्य समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि उसने महिला कहलाने की सारी हदें भी पार कर दी हैं। सोनू पंजाबन के ऊपर कई केस दर्ज हैं, लेकिन ये पहला मामला था, जिसमें उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई। आखिर कौन है ये सोनू पंजाबन और क्या है इसकी क्राइम कुंडली?
गैंगस्टर से शादी और जुर्म की दुनिया में एंट्री
सोनू पंजाबन देह व्यापार के धंधे में कैसे उतरी? गीता अरोड़ा से बदलकर कब उसका नाम सोनू पंजाबन हो गया? जुर्म की दुनिया में उसने कब अपने कदम रखे? इन सवालों के जवाब जानने के लिए जब उसकी हिस्ट्री खंगाली गई तो पता चला कि गैंगस्टर्स के साथ सोनू का पुराना और लंबा कनेक्शन रहा है। साल 2003 में उसकी जिंदगी में विजय सिंह नाम का गैंगस्टर आया और उसके साथ शादी करते ही सोनू ने जुर्म की दुनिया में एंट्री ले ली। हालांकि, उसी साल यूपी एसटीएफ ने एक मुठभेड़ में विजय सिंह को ढेर कर दिया।
पुलिस मुठभेड़ में मारा गया सोनू का प्रेमी दीपक
विजय सिंह की मौत के बाद कुछ वक्त बीता, तो सोनू की जिंदगी में दीपक नाम के एक दूसरे क्रिमिनल की एंट्री हुई। दीपक का नाम जुर्म की कई वारदातों में शामिल था और पुलिस उसके पीछे थी। दोनों के बीच पहले बातें शुरू हुईं और धीरे-धीरे बातचीत का ये सिलसिला अफेयर में बदल गया। दीपक के साथ सोनू के रिलेशन को अभी कुछ ही साल बीते थे कि असम में हुई एक मुठभेड़ में पुलिस ने उसे मार गिराया। यहां से सोनू का अफेयर दीपक के भाई और गैंगस्टर हेमंत सोनू के साथ शुरू हो गया। कुछ वक्त बाद दोनों ने शादी कर ली और साथ-साथ रहने लगे।
गीता अरोड़ा कैसे बनी सोनू पंजाबन
हालांकि, हेमंत के साथ भी सोनू पंजाब की जिंदगी ज्यादा दिनों तक नहीं चली। डबल मर्डर के एक मामले में, अप्रैल 2006 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर हुई मुठभेड़ में हेमंत मारा गया। हेमंत की मौत के बाद ही गीता अरोड़ा ने अपने पति के सरनेम ‘सोनू’ के साथ अपना नाम बदलकर सोनू पंजाबन रख लिया। अब सोनू पंजाबन देह व्यापार के धंधे में पूरी तरह उतर चुकी थी। साल 2007 में सोनू को पहली बार देह व्यापार के मामले में गिरफ्तार किया गया। कुछ समय बाद उसने कोर्ट से जमानत ले ली, लेकिन अगले ही साल 2008 में सोनू को फिर से इसी मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। सोनू पंजाबन की मुश्किलें उस वक्त बढ़ीं, जब 2011 में उसके ऊपर मकोका लगाया गया।
दूर-दूर तक फैली थी सोनू पंजाबन के धंधे की जड़ें
बताया जाता है कि सोनू पंजाबन को लग्जरी लाइफ पसंद थी और इसी वजह से उसने जुर्म की राह पर चलना शुरू किया। पहले वो खुद देह व्यापार के धंधे में उतरी और इसके बाद उसने दूसरी लड़कियों को इस दलदल में खींचना शुरू किया। उसके निशाने पर होती थीं वो लड़कियां, जो फिल्मों और मॉडलिंग की दुनिया में जाने की चाहत लिए अपना घर-परिवार छोड़ आती थीं। इन लड़कियों को अपने धंधे में शामिल कर, सोनू दूसरे राज्यों में भी इनकी सप्लाई करती थी। अपने ग्रुप में उसने कुछ ऐसे लोगों को भी भर्ती किया, जिनका काम इन लड़कियों का बाहर ले जाना और सुरक्षित वापस लाना था। उसके ग्राहकों में कई हाई-प्रोफाइल लोग शामिल थे।
क्या था वो मामला, जिसमें सुनाई गई 24 साल की सजा
इस बीच वो मामला आया, जिसके लिए सोनू पंजाबन को 24 साल की सजा सुनाई गई। दरअसल, संदीप बेदवाल नाम के आदमी ने एक नाबालिग लड़की को अगवा किया और उसे सोनू पंजाबन को बेच दिया। सोनू ने उसे खरीदने के बाद कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा और बाद में उससे वेश्यावृत्ति कराई। नाबालिग लड़की विरोध ना कर सके, इसके लिए सोनू उसे नशीली दवाइयां देती थी। तीन-चार महीने तक उसे अपने पास रखने और वेश्यावृत्ति कराने के बाद सोनू ने नाबालिग को लखनऊ के अपने साथी लाला को बेच दिया। इस मामले में सोनू की गिरफ्तारी हुई और उसके ऊपर मुकदमा चला।
कोर्ट ने कहा, तुम्हें महिला कहलाने का भी हक नहीं
22 जुलाई 2020 को सोनू पंजाबन को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि उसने ना केवल वेश्यावृत्ति के लिए पीड़िता को खरीदा, बल्कि उसे अपनी मांगों के आगे झुकने के लिए मजबूर भी किया। सोनू ने एक नाबालिग लड़की के साथ क्रूरता की हदें पार कीं। उसने पीड़िता को जबरन नशीली दवाइयां दीं, ताकि वह किसी ग्राहक का विरोध ना कर सके। कोर्ट ने कहा कि एक महिला की मर्यादा उसके लिए सबसे बड़ी चीज होती है। एक महिला, दूसरी नाबालिग महिला की मर्यादा को इस तरह से कैसे अपमानित कर सकती है? सोनू पंजाबन के इस शर्मनाक काम की वजह से, कोर्ट उसे किसी भी तरह की रियायत नहीं दे सकती। उसके लिए सिर्फ एक ही जगह है, जेल। ऐसी महिला को सभ्य समाज में रहने या महिला कहलाने का भी हक नहीं है।
