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जिन्‍ना हमारे भी राष्ट्रपिता… बांग्लादेश में 50 साल में पहली बार पाकिस्‍तान के संस्‍थापक की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम

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ढाका

बांग्लादेश में अगस्त में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार कई बदलाव देखे रहे हैं। शेख हसीना के पीएम पद से हटने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अतंरिम सरकार बनने के बाद भारत विरोध और पाकिस्तान प्रेम दिखाने वाले कार्यक्रम अचानक बढ़ गए हैं। इसी कड़ी में अब बांग्लादेश में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम हुआ है। साल 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र देश बनने के बाद ये पहली बार है, जब बांग्लादेश में जिन्ना को याद करते हुए इस तरह का बड़ा आयोजन हुआ है। ढाका के नेशनल प्रेस क्लब में 11 सितंबर को जिन्ना की 76वीं पुण्यतिथि के कार्यक्रम में जमकर उनकी प्रशंसा की गई। यहां तक कि कुछ वक्ताओं ने तो जिन्ना को पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश का भी ‘राष्ट्रपिता’ घोषित करने की मांग कर दी। बांग्लादेश में शेख मुजीबुर्रहमान को राष्ट्रपिता का दर्जा दिया जाता है।

इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के बांग्लादेश में डिप्टी हाईकमिश्नर कामरान धंगल और मोहम्मद यूनुस सरकार से जुड़े कई लोग भी शामिल हुए। धनगल ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश के लोग जिन्ना की आजादी के वक्त निभाई गई शानदार भूमिका को समझेंगे और मानेंगे कि वह पूर्वी पाकिस्तान के निर्माता और बांग्लादेश के अग्रदूत थे। कार्यक्रम में शामिल ज्यादातर लोगों की बातों का लब्बोलुआब यही था कि बांग्लादेश का जन्म भी जिन्ना की वजह से हुआ है क्योंकि उन्होंने ही 1947 में मुस्लिमों के लिए अलग देश की लड़ाई लड़ी। कार्यक्रम में बोलते हुए बीएनपी समर्थक नजरुल इस्लाम ने कहा, ‘अगर जिन्ना नहीं होते, तो पाकिस्तान नहीं होता और पाकिस्तान के बिना बांग्लादेश भी नहीं होता। जिन्ना हमारे राष्ट्र के पिता हैं लेकिन हम उनकी कभी बात नहीं करते हैं। ये ठीक नहीं है, उम्मीद है कि बांग्लादेश में भी अब जिन्ना को उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर याद किया जाएगा।

जिन्ना और पाकिस्तान के लिए दिखा प्यार
इस कार्यक्रम में जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के जुड़े संगठन नागोरिक पोरीशोद के लोग भी शामिल थे, जो खुलेतौर पर पाकिस्तान से अपना प्यार जताता रहा है। पोरीशोद के अध्यक्ष मोहम्मद समसुद्दीन ने इस दौरान कहा कि अगर जिन्ना के प्रयासों के कारण पूर्वी बंगाल पूर्वी पाकिस्तान नहीं बना होता तो यह भारत का हिस्सा बना रहता और आज हमारी स्थिति आज के कश्मीर जैसी होती। कार्यक्रम में बांग्लादेश के सशस्त्र बलों से जुड़े अधिकारी भी पहुंचे थे।

इस कार्यक्रम में एक तरफ जिन्ना की शान में कसीदे पढ़े गए तो वहीं भारत को निशाना बनाया गया। कार्यक्रम में भारत में अल्पसंख्यको की स्थिति, कश्मीर के हालात की बात करते हुए कहा गया है कि इंडिया में मुसलमान दूसरे दर्जे के नागरिक बनकर रहने को लिए मजबूर हैं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारत से दूरी बनाकर रखने और पाकिस्तान के साथ मजबूत संबंध बनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में पाकिस्तान की जमकर तारीफ की गई और इस दौरान किसी भी वक्ता ने साल 1971 में बंगाली लोगों पर पाकिस्तानी सेना के भयावह जुल्मों पर कोई बात नहीं की। 1971 में पाक सेना के भयानक युद्ध अपराधों को इन लोगों ने नजरअंदाज कर दिया, जो बांग्लादेश की बड़ी आबादी के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

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