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Wednesday, April 29, 2026
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जस्टिन ट्रूडो के मंत्री ने चुनाव से पहले दी चेतावनी, कनाडा में आने वाले ज्‍यादातर विदेशी छात्र मांग रहे शरण, निशाने पर भारतीय!

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ओटावा

कनाडा की जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बार फिर विदेशियों की बढ़ती संख्या के मामले को उठाया है। ट्रूडो सरकार में इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर ने विदेशी छात्रों के देश में शरण मांगने के ट्रेंड को चिंताजनक कहा है। मार्क मिलर का ये बयान ऐसे समय आया है, जब देश आम चुनावों की ओर बढ़ रहा है। चुनावों से पहले देश में घरों और रोजगार का संकट एक बड़ा मुद्दा बन रहा है। ऐसे में विदेशी, खासतौर से भारतीय छात्रों की संख्या पर ट्रूडो सरकार की ओर से लगातार बयान आ रहे हैं। ट्रूडो की कोशिश चुनाव में इसका फायदा लेने की दिख रही है।

टेलीविजन कार्यक्रम द वेस्ट ब्लॉक में बोलते हुए मार्क मिलर ने छात्र वीजा पर कनाडा आने के बाद शरण मांगने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की बढ़ती संख्या पर बोलते हुए इसे एक ‘खतरनाक प्रवृत्ति’ बताया है। मिलर ने कहा कि छात्र वीजा का इस्तेमाल उनके देश में स्थायी तौर पर बसने के लिए किया जा रहा है और उनका मंत्रालय इस मामले की जांच कर रहा है। उन्होंने कनाडा के उच्च शिक्षा संस्थानों को इस तरह के एलिमेंट को रोकने के लिए अपनी जरूरी सुधार करने के लिए कहा है।

कनाडा का विदेशियों की संख्या घटाने का प्लान
एरुडेरा की रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा ने अगले तीन वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों सहित अस्थायी निवासियों की संख्या 6.2 से घटाकर 5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इसी साल जनवरी में कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या पर रोक के लिए दो साल की सीमा की घोषणा की थी। मिलर का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में छात्रों की संख्या 2024 में संख्या घटेगी।

कनाडा ने मौजूदा वर्ष में 4,85,000 स्टडी परमिट देना का फैसला लिया था। ये देखते हुए 20 प्रतिशत छात्र देश में लंबे समय तक रहने के लिए आवेदन जमा करते हैं, सरकार ने 2024 के लक्ष्य को 364,000 परमिट तक सीमित कर दिया, जो 2023 में जारी किए गए 560,000 परमिट से काफी कम है। मिलर का कहना है कि 2024 के लिए जारी किए गए स्टडी परमिट 2023 से 35 प्रतिशत कम हैं।

भारतीयों को ठहराया जाता है दोषी
कनाडा की सरकार ने साफ किया है कि 2025 में, 2024 के मुकाबले स्टडी परमिट में 10 प्रतिशत की कमी लाई जाएगी। कनाडा आवास की कमी का सामना कर रहा है, जिसके लिए अक्सर अंतरराष्ट्रीय छात्रों और प्रवासियों को दोषी ठहराया जाता है। कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से सबसे ज्यादा संख्या भारत, चीन, फिलीपींस और नाइजीरिया के छात्रों की है। खासतौर से भारतीय छात्रों के लिए कनाडा बीते वर्षों में पसंदीदा जगह रहा है। ऐसे में अक्सर कनाडा में अप्रवासन के मुद्दे पर भारतीयों की ओर उंगली उठाई जाती है।

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