श्रीनगर,
फारूक अब्दुल्ला ने कहा,’उमर अब्दुल्ला पूरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री होंगे. पावर शेयरिंग कोई मुद्दा नहीं है. हम जम्मू-कश्मीर के लोगों के आभारी हैं.’ फारूक ने आगे कहा कि लोगों ने अपना जनादेश दिया है, उन्होंने साबित कर दिया है कि वे 5 अगस्त को लिए गए फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं. बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटा दिया था. इसके साथ ही लद्दाख को केंद्र शासित राज्य से अलग कर दिया गया था.
बता दें कि उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा था. इन दो सीटों के नाम बडगाम और गांदरबल है. दोनों ही सीटों से उमर ने जीत दर्ज की है. बडगाम में उमर अब्दुल्ला को 36010 वोट मिले. पीडीपी उम्मीदवार आगा सैयद मुंतजिर 17527 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे. वहीं, उमर की दूसरी सीट यानी गांदरबल की बात करें तो यहां उमर को 18193 वोट मिले और उन्होंने जीत हासिल की. वहीं, 12745 वोटों के साथ पीडीपी के बशीर अहमद मीर दूसरे नंबर पर रहे.
चुनाव में पीडीपी की हुई फजीहत
बता दें कि इस चुनाव में सबसे बुरी हालत महबूबा मुफ्ती के सियासी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की हुई है. अब तक (2.25 बजे) पीडीपी महज 3 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कांफ्रेंस 50 सीटों पर आगे चल रही है. पीडीपी से ज्यादा तो निर्दलीय प्रत्याशी आगे चल रहे हैं. अब तक के रुझानों में 9 निर्दलीय उम्मीदवार आगे चल रहे हैं.
क्यों महत्वपूर्ण हैं चुनावी नतीजे?
यह चुनाव कश्मीर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक अहम क्षण है. यह कई वर्षों की उथल-पुथल और विशेष दर्जे को खत्म किए जाने के बाद क्षेत्र की भविष्य की शासन व्यवस्था में संभावित स्थायी बदलाव को दर्शाता है.
