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राजस्थान में एक और सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े का खुलासा, एक-एक लाख रुपये में बेचे सर्टिफिकेट

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जयपुर:

सरकारी नौकरी पाने के लिए होने वाले फर्जीवाड़े एक-एक कर सामने आ रहे हैं। पेपर लीक, नकल, डमी अभ्यर्थी, फर्जी डिग्रियों के बाद अब फर्जी खेल सर्टिफिकेट लगाकर नौकरियां हासिल करने के मामले का भी खुलासा हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि जैसे-जैसे सरकार और पुलिस पेपर लीक जैसे मामलों पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है, वैसे-वैसे माफिया नए नए तरीकों से फर्जीवाड़ा करके नौकरी दिलाने और हथियाने में लगे हैं। पिछले दिनों फर्जी विधवा सर्टिफिकेट से भी नौकरी प्राप्त करने के मामले सामने आए थे। अब खेल कोटे से नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी खेल सर्टिफिकेट बेचने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। पिछले दिनों एसओजी ने ताइक्वांडो फेडरेशन के सचिव दिनेश जगरवाल को गिरफ्तार किया था। अब दो दलालों को भी गिरफ्तार किया है जिनके नाम रंगलाल रैगर और नारायण सिंह राजपूत है।

1 – 1 लाख रुपए में बेचे फर्जी सर्टिफिकेट
पूर्व में गिरफ्तार किया गया ताइक्वांडो फेडरेशन का सचिव गंगानगर निवासी दिनेश जगरवाल सरकारी शिक्षक (पीटीआई) है। इसके साथ कई दलाल भी इस खेल में शामिल थे जो एक एक लाख रुपए में फर्जी खेल सर्टिफिकेट बेचने का काम करते थे। दलाल रंगलाल रैगर अजमेर के फायसागर रोड स्थित श्रीजी विहार का रहने वाला है जबकि नारायण सिंह राजपूत अजमेर के सिविल लाइन स्थित महाराजा स्कूल के पास का रहने वाला है। ये दोनों आरोपी दिनेश जगरवाल के लिए दलाली का कार्य करते थे। एसओजी के मुताबिक रंगलाल और नारायण ने कई अभ्यर्थियों से एक एक लाख रुपए लेकर फर्जी खेल सर्टिफिकेट बेचे थे। कई अभ्यर्थी पीटीआई भर्ती में चयनित हो गए जबकि कई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिन्होंने खेल कोटे से अन्य भर्तियों में नौकरी प्राप्त कर ली।

हर भर्ती में है 2 प्रतिशत खेल कोटा
सरकारी नौकरी के लिए होने वाली विभिन्न भर्तियों में खिलाड़ियों के लिए अलग से आरक्षण है। खिलाड़ियों का दो प्रतिशत कोटा तय है। किसी भी खेल में कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेल कर पदक प्राप्त कर चुका है तो उस खिलाड़ी को खेल कोटे से नौकरी दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा पीटीआई भर्ती में राज्य स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों को नौकरी के अवसर दिए जाते हैं। नौकरी मिलने पर खेल प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाता है। फेडरेशन के पदाधिकारियों की ओर से वेरिफिकेशन भी कर दिया जाता था। एसओजी की जांच में यह भी पता चला है कि दलालों ने मनोज गुर्जर, सियाराम और हेमलता गुर्जर से रुपए लेकर उन्हें फर्जी खेल सर्टिफिकेट दिया। दोनों आरोपी फिलहाल एसओजी की रिमांड पर है। पूछताछ में और भी आरोपियों के नाम सामने आ सकते हैं।

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