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Wednesday, April 29, 2026
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​Jio, Airtel का दबाव बेअसर, सरकार का दो-टूक जवाब, मस्क की हो गई बल्ले-बल्ले

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दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सैटैलाइट ब्रॉडबैंड के मामले में जियो और एयरटेल के दबाव को दरकिनाकर कर दिया है। मंत्री ने दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन किया जाएगा। सरकार ने मुकेश अंबानी और सुनील भारती मित्तल की मांग को खारिज करते हुए कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए नीलामी का रास्ता नहीं चुना जाएगा। ऐसे में जियो और एयरटेल का दबाव बेकार चला गया है।

सैटेलाइट स्पेक्ट्रम प्राइसिंग को लेकर भी विवाद
सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में प्राइसिंग को लेकर भी विवाद जारी है। इस मामले में सरकार का कहना है कि प्राइसिंग का कोई मुद्दा नहीं है, क्योंकि टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत को तय करेगी।

सिंधिया का सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन की नीलामी से साफ इनकार
सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में भारत इंटरनेशनल टेलिकम्यूनिकेशन यूनियन यानी ITU के नियमों का पालन करेगा। ITU के सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को लेकर दिशा-निर्देश बिल्कुल साफ है। ऐसे में भारत ITU के ही गाइडलाइन के हिसाब से सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन करेगा। एलन मस्क भी आईटीयू के नियमों का हवाला दे रहे थे कि भारत को सैटेलाइस स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में उसी के हिसाब से काम करना चाहिए।

एलन मस्क की मांग हुई पूरी
सरकार ने एलन मस्क की मांग को मानते हुए जियो और एयरटेल को साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में एलन मस्क की सैटलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक की भारत में एंट्री का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि भारत आईटीयू का सदस्य देश है और आईटीयू यूनाइटेड नेशन की डिजिटल टेक्नोलॉजी एजेंसी है।

जियो और एयरटेल की मांग खारिज
सरकार के फैसले के बाद जियो और एयरटेल को जोरदार झटका लगा है। दरअसल जियो और एयरटेल की ओर से लगातार सरकार पर दबाव बनाया जा रहा था कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए नीलामी की प्रक्रिया को अपनाया जाए। हालांकि सरकार पर भारत की दोनों दिग्गज टेलिकॉम कंपनियों जियो और एयरटेल का दबाव काम नहीं कर रहा है।

क्या है सैटेलाइट इंटरनेट
दरअसल सीधे सैटेलाइट के जरिए जमीन पर इंटरनेट पहुंचाने के माध्यम को सैटेलाइट इंटरनेट कहा जाता है। इसमें तार और टावर की जरूरत नहीं होती है। बस एक रिसीवर vbकी मदद से जमीन पर इंटरनेट पहुंचाया जाता है। इसमें एलन मस्क की स्टारलिंक और अमेजन जैसी कंपनियों का दबदबा मौजूद है।

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