तेल अवीव:
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की है। इस बीच इजरायल को ईरान की ओर से हमले का डर सता रहा है। इजरायल अपने खुफिया और सुरक्षा प्रयासों को बढ़ा रहा है। क्योंकि उसे डर है कि ईरान डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने और पदभार ग्रहण करने के बीच के समय में हमले की कोशिश कर सकता है। कथित तौर पर इजरायली रक्षा अधिकारी संभावित खतरों का अनुमान लगाने और उनसे लड़ने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ईरान की परमाणु और सैन्य गतिविधियों पर खास तौर से नजर है।
अधिकारियों का कहना है कि इजरायल के राजनीतिक नेतृत्व को सैन्य और राजनयिक रणनीति को आकार देने के लिए ट्रंप की प्रस्तावित ईरान नीति को समझना चाहिए। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अगर वह दोबारा जीतते हैं तो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेंगे।अपने आखिरी राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। हालांकि उन्होंने कहा है कि अगर वह फिर से चुनाव जीतते हैं तो उनका लक्ष्य नया युद्ध शुरू करने की जगह युद्ध खत्म करेंगे। इसके लिए वह क्या तरीका अपनाएंगे यह अभी भी रहस्य है।
ईरान को हुआ बड़ा नुकसान
इजरायली वायु सेना ने हाल के हमलों में ईरान के महत्वपूर्ण साइटों को निशाना बनाया। इससे कथित तौर पर ईरान का बुनियादी ढांचा कमजोर हो गया है। यरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले ने प्रमुख रडार प्रणालियों और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरियों को निशाना बनाया है।इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के मुताबिक कम से कम 14 रडार सिस्टम और चार एस-300 मिसाइल बैटरियों को निशाना बनाया गया। बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है।
ईरान देगा हमले का जवाब
IDF के एक अधिकारी ने कहा, ‘इस ऑपरेशन की सटीकता और प्रभाव के लिए अमेरिका और हमारे ब्रिटिश सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया।’ इजरायली खुफिया सूत्रों का कहना है कि ईरान इराक, सीरिया, यमन और लेबनान के अपने सहयोगियों को घातक हथियार देकर इस हमले का बदला लेने की कोशिश कर सकता है। इजरायली खुफिया आकलन से पता चलता है कि ईरान ने पिछले साल में 60 फीसदी से ज्यादा यूरेनिम एनरिच किया है। लेकिन यह अभी तक परमाणु हथियार बनाने वाली शुद्धता नहीं पा सका है।
