मिडिल ईस्ट में इस वक्त बारूद की गंध फैली हुई है और ईरान-इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर है। इसी बीच एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया के डिफेंस एक्सपर्ट्स के कान खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स का दावा है कि इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) को निशाना बनाने के लिए अपनी सबसे घातक मिसाइल ‘ब्लू स्पैरो’ (Blue Sparrow) का इस्तेमाल किया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन ‘ब्लू स्पैरो’ का नाम सुनते ही दुश्मनों के पसीने छूटने लगे हैं। आखिर क्या है इस मिसाइल की ताकत और क्यों इसे इजरायल का ‘गुप्त ब्रह्मास्त्र’ कहा जा रहा है? आइए जानते हैं।
क्या है ब्लू स्पैरो मिसाइल? ‘निशाने’ से ‘शिकारी’ बनने की कहानी
‘ब्लू स्पैरो’ इजरायल की उन्नत मिसाइल तकनीक का एक हिस्सा है। शुरुआत में इसे इजरायली डिफेंस सिस्टम (जैसे Arrow-3) की टेस्टिंग के लिए बनाया गया था। यानी, यह मिसाइल हवा में दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल बनकर उड़ती थी ताकि इजरायली डिफेंस सिस्टम उसे गिराने की प्रैक्टिस कर सके। लेकिन इजरायल ने इसकी तकनीक को इतना एडवांस कर दिया है कि अब इसे हमले के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह मिसाइल आम तौर पर फाइटर एयरक्राफ्ट (जैसे F-15 या F-35) से लॉन्च की जाती है, जो इसे और भी ज्यादा घातक बना देती है।
आसमान से बरसती ‘मौत’: पलक झपकते ही कर देती है सूपड़ा साफ!
ब्लू स्पैरो मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ्तार और सटीकता है। लॉन्च होने के बाद यह मिसाइल बहुत अधिक ऊंचाई पर जाती है और फिर वहां से हाइपरसोनिक स्पीड से अपने टारगेट की तरफ बढ़ती है। इसकी गति इतनी तेज होती है कि दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। यह मिसाइल लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है, जिसका मतलब है कि इजरायल अपने बॉर्डर से बहुत दूर बैठे दुश्मन को भी घर में घुसकर मार सकता है।
दुश्मन के राडार हो जाते हैं फेल: आखिर क्यों इसे रोकना है नामुमकिन?
ब्लू स्पैरो मिसाइल का उड़ान पथ (Flight Path) बैलिस्टिक ट्रेजेक्टरी पर आधारित होता है। आसान भाषा में कहें तो यह एक ऊंचे चाप (Arch) में उड़ती है, जिससे दुश्मन के एंटी-मिसाइल सिस्टम के लिए इसका अंदाजा लगाना और इसे बीच रास्ते में रोकना (Intercept) बहुत मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इसकी बाहरी बनावट ऐसी है जो राडार को गच्चा देने में मदद करती है। यही वजह है कि ईरान जैसे देशों के लिए यह मिसाइल एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है।
हाई-टेक नेविगेशन: हवा में भी बदल लेती है अपना रास्ता!
इस मिसाइल में आधुनिक नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम लगा हुआ है। अगर टारगेट अपनी जगह से थोड़ा हिल भी जाए या रास्ते में हवा का दबाव बदले, तो यह मिसाइल हवा में ही अपनी दिशा सुधार (Course Correction) सकती है। इसकी ‘पिन-पॉइंट एक्यूरेसी’ इसे दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों की कतार में खड़ा करती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि खामेनेई जैसे हाई-वैल्यू टारगेट के लिए इजरायल ने इसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वाली तकनीक का इस्तेमाल किया होगा।
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मिडिल ईस्ट में बढ़ता महायुद्ध का खतरा: क्या अब आर-पार की होगी जंग?
ब्लू स्पैरो जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल इस बात का सबूत है कि अब युद्ध केवल सैनिकों के बीच नहीं, बल्कि तकनीक के बीच है। इजरायल अपनी सैन्य ताकत के दम पर ईरान को सीधा संदेश दे रहा है कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। रक्षा जानकारों का कहना है कि अगर इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल जारी रहा, तो मिडिल ईस्ट में आने वाले दिनों में और भी भयानक धमाके देखने को मिल सकते हैं। यह मिसाइल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि इजरायल का वह संदेश है जिसे दुनिया अब ‘ब्लू स्पैरो’ के नाम से जान रही है।
