नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामलों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि लंबे समय तक चले संबंधों के खराब होने पर रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता। मुंबई के खारघर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। जस्टिस बी वी नागरत्ना और एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि सहमति से बने संबंधों के बिगड़ने पर उन्हें आपराधिक मामला बनाने का चलन चिंताजनक है। यह मामला 2017 का है।
कोर्ट ने एफआईआर को किया रद्द
जानकारी के अनुसार, यह एफआईआर वनिता एस जाधव नाम की महिला ने महेश दामू खरे के खिलाफ दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर एक महिला जानबूझकर लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए रखती है, तो यह नहीं कहा जा सकता कि संबंध सिर्फ शादी के झूठे वादे के कारण थे। कोर्ट ने कहा कि यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है कि शारीरिक संबंध पूरी तरह से खरे द्वारा उससे शादी करने के कथित वादे के कारण थे।
‘तुरंत दर्ज कराई जानी थी शिकायत, सालों बाद नहीं’
खरे शादीशुदा थे और जाधव विधवा महिला हैं, दोनों 2008 के साथ थे। जाधव का आरोप है कि खरे ने शादी का वादा करके उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए। खरे की पत्नी ने जाधव के खिलाफ जबरन वसूली की शिकायतें दर्ज कराई थीं। मार्च 2017 में जाधव ने खरे के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज कराई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी के वादे के टूटने की शिकायत, जो यौन संबंध के लिए सहमति पर आधारित है, पीड़ित महिला द्वारा तुरंत दर्ज कराई जानी चाहिए, न कि सालों तक शारीरिक संबंध जारी रखने के बाद।
‘ये चिंताजनक प्रवृत्ति’
अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि सहमति से बने संबंधों के खराब होने पर उन्हें आपराधिक मामला बनाने का एक चिंताजनक चलन है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘एक चिंताजनक प्रवृत्ति है कि लंबे समय तक चलने वाले सहमतिपूर्ण संबंधों को, खट्टा होने पर, आपराधिक बनाने की मांग की गई है…” यह फैसला उन मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है जहां सहमति से बने संबंधों के बाद रेप के आरोप लगाए जाते हैं। यह फैसला महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए झूठे आरोपों से पुरुषों को बचाने का प्रयास करता है।
